शाहजहांपुर: गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले वेधक कीटों से बचाव के लिए ‘ट्राइकोकार्ड’ का इस्तेमाल एक बेहद कारगर और जैविक उपाय माना जाता है. गन्ने की फसल को कीटों के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए जुलाई से अक्टूबर तक का महीना ट्राइकोकार्ड लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस अवधि में गन्ने में अंकुर वेधक, टॉप बोरर और स्टॉक बोरर जैसे वेधक कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ट्राइकोकार्ड के उपयोग से बिना किसी हानिकारक रासायनिक कीटनाशक के कीटों को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे किसानों की लागत में भी भारी कमी आती है.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि गन्ने में वेधक कीटों के जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोकार्ड सबसे प्रभावी उपाय है. जुलाई से अक्टूबर तक का समय इसे लगाने के लिए एकदम सही है. एक कार्ड में लगभग 20,000 ट्राइकोग्राम के अंडे होते हैं, जो 24 घंटे के भीतर मित्र तितलियों में बदल जाते हैं. ये तितलियां हानिकारक वेधक कीटों के अंडों को नष्ट कर देती हैं, जिससे कीटों की अगली पीढ़ी नहीं पनप पाती है. यह मात्र 50 रुपये में उपलब्ध एक पूर्णतः रसायन-मुक्त और सस्ता उपाय है. किसान गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर से सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच इसे प्राप्त कर सकते हैं.
ट्राइकोकार्ड क्या है और यह कैसे काम करता है?
ट्राइकोकार्ड गत्ते का एक छोटा सा कार्ड होता है, जिस पर मित्र कीट ‘ट्राइकोग्राम’ के लगभग 20,000 अंडे लगे होते हैं. जब इस कार्ड के टुकड़ों को गन्ने की पत्तियों पर लगाया जाता है, तो 24 घंटे के अंदर इनसे मित्र तितलियां बाहर निकलती हैं. ये तितलियां गन्ने को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक टॉप बोरर या स्टॉक बोरर के अंडों की तलाश करती हैं और उनके अंदर अपने अंडे देकर उन्हें शुरुआती अवस्था में ही पूरी तरह नष्ट कर देती हैं.
खेत में ट्राइकोकार्ड लगाने का सही तरीका
ट्राइकोकार्ड को खेत में सही तरीके से लगाना बेहद जरूरी है. लगभग 6 इंच के इस कार्ड को 4 से 5 छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. इसके बाद, खेत की मेढ़ से लगभग 5 मीटर अंदर जाकर गन्ने की पत्तियों के निचले हिस्से में इन्हें स्टेपल कर दिया जाता है. एक एकड़ खेत के लिए एक कार्ड पर्याप्त होता है. इसे पूरे खेत में समान दूरी पर फैलाकर पत्तियों पर लगाना चाहिए ताकि मित्र कीट आसानी से चारों तरफ फैल सकें.
ट्राइकोकार्ड लगाते समय बरतें ये सावधानियां
ट्राइकोकार्ड का अधिकतम लाभ उठाने के लिए कुछ सावधानियां रखनी आवश्यक हैं. कार्ड को हमेशा शाम के समय या दोपहर ढलने के बाद ही खेत में लगाना चाहिए. इसके अलावा, किसानों को यह ध्यान रखना होगा कि कार्ड लगाने के बाद कम से कम 7 से 8 घंटे तक बारिश न हो, ताकि कार्ड खराब न हो और तितलियां सुरक्षित निकल सकें. यदि खेत में कीटों का प्रकोप फिर भी बना रहता है, तो 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा ट्राइकोकार्ड का प्रयोग किया जा सकता है.
सस्ता, जैविक और पर्यावरण के अनुकूल उपाय
रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में ट्राइकोकार्ड बेहद किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है. जहां रसायनों पर हजारों रुपये खर्च होते हैं, वहीं मात्र 50 रुपये प्रति एकड़ की दर से ट्राइकोकार्ड उपलब्ध हो जाता है. इसके प्रयोग से मिट्टी, फसल और पर्यावरण को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. यूपी गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर में यह कार्ड किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिसे कार्यालय समय सुबह 10 से शाम 5 बजे के दौरान आसानी से खरीदा जा सकता है.