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बारिश की वजह से धान के खेतों में भर गया ज्यादा पानी तो यहां एक्सपर्ट से जानिए फसल बचाने का सही तरीका…


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धान की खेती पर बारिश की मार, समय रहते करें ये काम वरना होगा बड़ा नुकसान

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गोरखपुर में लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए नई परेशानी बन गई है. धान के खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जल निकासी और प्राकृतिक खेती के उपाय अपनाकर फसल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

गोरखपुर:  यूपी के गोरखपुर में लगातार हो रही बारिश जहां शहर में जलभराव और यातायात की समस्या बढ़ा रही है. वहीं ग्रामीण इलाकों में यह बारिश किसानों के लिए नई चुनौती बन गई है. जिन किसानों ने धान की रोपाई पूरी कर ली है उनके खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भर गया है. ऐसे में किसान अब खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने में जुटे हैं ताकि धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

धान की फसल पर मंडराया खतरा

धान की खेती के लिए पानी जरूरी होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा जलभराव फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. लगातार पानी भरे रहने से पौधों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं, ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई गांवों में किसान नालियां बनाकर खेतों से अतिरिक्त पानी बाहर निकाल रहे हैं.

दवा का छिड़काव भी हुआ प्रभावित

बारिश के कारण किसान अपने खेतों में कीटनाशक और अन्य जरूरी दवाओं का छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं. गीली जमीन और लगातार बारिश की वजह से दवा का असर कम हो जाता है, जिससे फसल को कीट और बीमारियों से बचाना मुश्किल हो रहा है. मौसम साफ होने का इंतजार किसानों की चिंता बढ़ा रहा है.

प्राकृतिक खेती से मिल सकता है समाधान

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के प्रोफेसर ‘अनुपम’ का कहना है कि यदि किसान शुरुआत से ही गोबर और गुड़ से तैयार प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करें तो मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है. इससे खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ती है, पौधे अधिक मजबूत होते हैं और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता भी काफी कम हो जाती है.

मिट्टी होगी मजबूत, पैदावार भी बढ़ेगी

प्रोफेसर अनुपम के अनुसार प्राकृतिक खाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करती है, जिससे फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. ऐसे खेतों में पानी का संतुलन भी अपेक्षाकृत बेहतर रहता है और उत्पादन में सुधार देखने को मिलता है. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने की सलाह दी ताकि मौसम की मार का असर कम किया जा सके.

फिलहाल गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बारिश थमने और मौसम सामान्य होने से रहता है. एक ओर खेतों से पानी निकालने की मशक्कत जारी है, तो दूसरी ओर फसल को सुरक्षित रखने की चिंता भी बनी हुई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जल निकासी और प्राकृतिक खेती जैसे उपाय अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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