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एमबीबीएस डॉक्टर की सैलरी कितनी होती है क्या और नाइट शिफ्ट का एक्सट्रा पैसा मिलता है…


नई दिल्ली (MBBS Doctor Salary). दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल नीट पास करने वालों को एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन मिलता है. जब कोई 5.5 साल की कठिन मेहनत के बाद एमबीबीएस की डिग्री हासिल करता है तो मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि करियर की शुरुआत में कमाई कितनी होगी? आमतौर पसर लोगों को लगता है कि डॉक्टर बनते ही पैसों की बारिश होने लगती है और पहली ही नौकरी में लाखों का पैकेज मिल जाता है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग होती है.

2026 में फ्रेश एमबीबीएस ग्रेजुएट्स के लिए कमाई के कई रास्ते खुले हैं. लेकिन शुरुआती सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस क्षेत्र और किस शहर में काम कर रहे हैं. सरकारी हॉस्पिटल के सैलरी स्ट्रक्चर और कॉर्पोरेट प्राइवेट हॉस्पिटल के पे-पैकेज में काफी अंतर देखने को मिलता है. जानिए फ्रेश एमबीबीएस डॉक्टर को अपनी पहली जॉब में वास्तव में कितना इनहैंड पे-चेक मिलता है और समय के साथ इसमें कैसे और कितनी बढ़ोतरी होती है.

2026 में फ्रेशर्स की शुरुआती सैलरी का हिसाब

2026 में एमबीबीएस पूरा करने के बाद किसी फ्रेश डॉक्टर की औसत शुरुआती सैलरी 40,000 से 75,000 रुपये प्रति महीना के बीच होती है. सालाना पैकेज की बात करें तो यह लगभग 5 से 8 लाख रुपये के आस-पास बैठता है. हालांकि, यह शुरुआती आंकड़ा है जो पद, हॉस्पिटल के प्रकार और काम के घंटों के हिसाब से बदलता रहता है.

सरकारी हॉस्पिटल: स्टेबिलिटी के साथ-साथ अच्छे अलाउंस

अगर आपकी पोस्टिंग किसी सरकारी हॉस्पिटल या हेल्थ सेंटर में जूनियर रेजिडेंट (JR) या मेडिकल ऑफिसर (MO) के रूप में होती है तो शुरुआती सैलरी 60,000 से 90,000 रुपये प्रति माह तक हो सकती है. केंद्र सरकार के संस्थानों (जैसे AIIMS या सफदरजंग) में 7वें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स (लेवल 10) के तहत बेसिक पे के साथ-साथ नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA), महंगाई भत्ता (DA) और एचआरए मिलाकर इनहैंड सैलरी 1 लाख रुपये के करीब भी पहुंच जाती है.

प्राइवेट सेक्टर: अनुभव के साथ तेजी से बढ़ती कमाई

प्राइवेट हॉस्पिटल और कॉर्पोरेट चेन में फ्रेशर्स को शुरुआत में 35,000 से 65,000 रुपये प्रति महीना सैलरी मिलती है. छोटे शहरों के प्राइवेट क्लीनिक में यह शुरुआती रकम थोड़ी कम हो सकती है. लेकिन प्राइवेट सेक्टर की खासियत यह है कि यहां आपकी परफॉर्मेंस, ओवरटाइम और नाइट शिफ्ट के आधार पर सैलरी बहुत तेजी से बढ़ती है.

शहर और लोकेशन का पड़ता है असर

आप किस शहर में प्रैक्टिस कर रहे हैं, इसका असर भी आपके पे-चेक पर पड़ता है. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में लिविंग कॉस्ट ज्यादा होने के कारण फ्रेशर्स को 20 से 30 फीसदी ज्यादा पैकेज मिलता है. वहीं टियर-2 और टियर-3 शहरों में शुरुआती सैलरी थोड़ी कम होती है, लेकिन वहां रहने का खर्च भी कम होता है. इसके अलावा, दूरदराज या ग्रामीण इलाकों में सरकारी बॉन्ड ड्यूटी करने वाले डॉक्टर्स को स्पेशल रूरल अलाउंस भी दिया जाता है.

बिना PG किए कमाई बढ़ाने के आसान तरीके

अगर आप एमबीबीएस के तुरंत बाद पीजी नहीं करना चाहते तो भी कमाई बढ़ाने के कई ऑप्शन मौजूद हैं. आप कॉरपोरेट हॉस्पिटल में इमरजेंसी रूम (ER) या आईसीयू में नाइट शिफ्ट कर सकते हैं, जहां प्रति शिफ्ट एक्स्ट्रा पे मिलता है. इसके अलावा टेली-कंसल्टेशन प्लेटफॉर्म्स, हेल्थ-टेक कंपनियों में मेडिकल एडवाइजर, क्लीनिकल रिसर्च और इंश्योरेंस कंपनियों में मेडिकल कोडिंग जैसे रोल्स भी बेहतरीन इनकम देते हैं.



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