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Muthanga Case Verdict: केरल के वायनाड मुथंगा कांड में 23 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. पुलिसकर्मी केवी विनोद की मौत और हिंसा से जुड़े मामले में कोर्ट ने 57 आरोपियों में से 56 को बरी कर दिया. वहीं चार आरोपियों को पुलिसकर्मियों पर हमले, अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में दोषी ठहराते हुए प्रभावी रूप से पांच साल जेल की सजा दी गई है. मुख्य आरोपी अशोकन की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी थी. साल 2003 में ए.के. एंटनी सरकार के दौरान हुए इस मामले ने केरल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा किया था.
केरल के मुथंगा कांड में 23 साल बाद कोर्ट का फैसला आया. (फाइल फोटो)
Muthanga Case Verdict: केरल के वायनाड का मुथंगा कांड एक बार फिर चर्चा में है. जिस घटना ने 2003 में पूरे देश का ध्यान खींचा था, उस पर 23 साल बाद अदालत का फैसला आया है. आदिवासी जमीन अधिकार आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पुलिसकर्मी केवी विनोद की मौत हुई थी. अब इस मामले में कोर्ट ने 57 आरोपियों में से 56 को बरी कर दिया है, जबकि चार आरोपियों को पुलिसकर्मियों पर हमले, अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है. हालांकि हत्या के मुख्य आरोपी माने गए अशोकन की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी थी इसलिए उसे सजा नहीं दी गई. इतने लंबे समय बाद आया यह फैसला एक बार फिर उस दौर की राजनीति, आदिवासी अधिकारों और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है.
मुथंगा कांड सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह केरल की राजनीति का एक ऐसा अध्याय था जिस पर आज भी बहस होती है. साल 2003 में जब आदिवासी परिवारों ने जमीन के अधिकार की मांग को लेकर मुथंगा वन क्षेत्र में डेरा डाला था, तब राज्य में कांग्रेस नेता ए.के. एंटनी की सरकार थी. पुलिस कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़की और केरल आर्म्ड पुलिस के जवान केवी विनोद की मौत हो गई. वहीं पुलिस फायरिंग में एक आदिवासी युवक जोगी की भी जान चली गई थी. अब कोर्ट के फैसले ने कई आरोपियों को राहत दी है, लेकिन यह मामला फिर से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है.
मुथंगा कांड, पुलिस कार्रवाई और कोर्ट का फैसला
- वायनाड की प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड स्पेशल कोर्ट ने मुथंगा मामले में फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों को अधिकांश आरोपियों के खिलाफ साबित नहीं कर पाया. इसी वजह से 57 में से 56 आरोपियों को बरी कर दिया गया.
- अदालत ने आरोपी नंबर-2 अशोकन को पुलिस कांस्टेबल केवी विनोद की मौत के लिए जिम्मेदार माना था. कोर्ट के अनुसार अशोकन ने वह अंतिम वार किया था जिससे विनोद की मौत हुई. हालांकि ट्रायल के दौरान उसकी मौत हो जाने के कारण उसके खिलाफ कोई सजा नहीं सुनाई गई.
चार आरोपियों को 5 साल की प्रभावी सजा
अदालत ने आदिवासी गोत्र महासभा के नेता एम. गीथानंदन, बीनू, रमेशन कोय्यलिपुरा और अनिल कुमार को दोषी पाया. इन आरोपियों पर पुलिसकर्मियों के अपहरण, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसे आरोप साबित हुए. कोर्ट ने अलग-अलग 16 धाराओं में कुल 19 साल 7 महीने की सजा सुनाई, लेकिन सभी सजाएं साथ चलेंगी. ऐसे में आरोपियों को प्रभावी रूप से करीब 5 साल जेल में रहना होगा. इसके अलावा अदालत ने जुर्माना भी लगाया है.
क्या था 2003 का मुथंगा आंदोलन?
- मुथंगा आंदोलन की शुरुआत 5 जनवरी 2003 को हुई थी. आदिवासी गोत्र महासभा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों ने जंगल की जमीन पर झोपड़ियां बनाकर अपना विरोध शुरू किया था. उनकी मांग थी कि उन्हें जमीन का अधिकार दिया जाए.
- उस समय केरल के मुख्यमंत्री ए.के. एंटनी थे. सरकार ने आंदोलनकारियों को हटाने के लिए पुलिस अभियान चलाया. 19 फरवरी 2003 को कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़क गई. पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई जवानों पर हमला किया. इसी दौरान कांस्टेबल केवी विनोद गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई.
पुलिसकर्मी विनोद की मौत और जोगी की जान गई
मुथंगा हिंसा में पुलिस कांस्टेबल केवी विनोद की मौत सबसे बड़ा मुद्दा बनी थी. आरोप था कि उन्हें प्रदर्शनकारियों ने बंधक बनाकर हमला किया था. वहीं दूसरी ओर पुलिस फायरिंग में आदिवासी युवक जोगी की मौत हुई थी. इस घटना के बाद मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस ने की. इसके बाद क्राइम ब्रांच और फिर सीबीआई को जांच सौंपी गई. केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस को एर्नाकुलम की सीबीआई स्पेशल कोर्ट से वायनाड की अदालत में ट्रांसफर किया गया.
कोर्ट ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की सिफारिश की
अदालत ने केवी विनोद के परिवार को 7 लाख रुपए, घायल पुलिसकर्मी अब्दुल सलाम को 3 लाख रुपए और घायल शशिधरन को 2 लाख रुपए मुआवजा देने की सिफारिश की है. यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई है.
23 साल बाद आए इस फैसले ने एक तरफ कई आरोपियों को राहत दी है, तो दूसरी तरफ पुलिसकर्मी की मौत और घायल जवानों के मामले में दोषियों को सजा भी मिली है. मुथंगा कांड अब भी केरल के राजनीतिक इतिहास में एक विवादित और संवेदनशील घटना के रूप में दर्ज है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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