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सावन के महीने में आजमगढ़ के प्राचीन शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. बाबा भंवरनाथ मंदिर से लेकर रामघाट के प्राचीन शिव मंदिर और महाराजगंज के भैरव बाबा मंदिर तक, इन धार्मिक स्थलों से कई रोचक मान्यताएं जुड़ी हैं. कहीं स्वयंभू शिवलिंग के प्रकट होने की कहानी है तो कहीं मंदिर का संबंध भगवान श्रीराम से बताया जाता है.
सावन का पावन महीना शुरू होते ही चारों तरफ बोल बम और हर-हर महादेव का जयकारा सुनाई देने लगता है. यह महीना भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान पूरे देश से श्रद्धालु भगवान शिव के विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन करने के लिए एकत्रित होते हैं और धूमधाम से कांवड़ यात्रा भी निकालते हैं.
इसी तरह आजमगढ़ जिले में भी कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जहां भगवान शिव विभिन्न रूपों में विराजमान हैं. ऐसे में आज हम आपको आजमगढ़ के प्राचीन शिव मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सावन के महीने में दर्शन-पूजन करने की विशेष मान्यताएं हैं.
आजमगढ़ शहर में स्थित बाबा भंवरनाथ का मंदिर जिले के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है. इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है. मंदिर के पुजारी गणेश गिरी बताते हैं कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर खुदाई की जा रही थी. तभी भंवरों का एक विशाल समूह निकला था. भंवरों के निकलने के बाद यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुए थे. भंवरों के साथ शिवलिंग प्रकट होने के कारण यहां का नाम भंवरनाथ पड़ा था.
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सावन के महीने में इस मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ इकट्ठा होती है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मांगी गई सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस मंदिर में प्रत्येक सोमवार भगवान भोलेनाथ का महाकालेश्वर के रूप में श्रृंगार एवं पूजा-पाठ किया जाता है. सावन के महीने के साथ-साथ शिवरात्रि के समय भी लाखों भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है और यहां लोग अपने परिवार के साथ पूजा-पाठ करने के लिए आते हैं.
इसी तरह आजमगढ़ जनपद में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा शिव मंदिर भी मौजूद है, जिसका इतिहास प्रभु श्री राम से जुड़ा हुआ है. मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम वन गमन के दौरान इस मंदिर में रुककर रात्रि विश्राम किया था और मंदिर में एक बड़े आकार का शिवलिंग मौजूद है. ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना प्रभु श्री राम के द्वारा की गई थी.
यह प्राचीन मंदिर आजमगढ़ शहर के रामघाट पर मौजूद है. इस मंदिर में मौजूद शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह आसपास के शहरों और क्षेत्रों में मौजूद सभी शिवलिंगों में सबसे बड़े आकार का है. लेकिन देखरेख और संरक्षण के अभाव में यह मंदिर अब समय के साथ-साथ धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है और अपनी पुरानी विरासत को भी खोता जा रहा है.
आजमगढ़ जनपद मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर महाराजगंज कस्बे में स्थित भैरव बाबा का मंदिर भी जिले के सबसे प्राचीन और पवित्र धर्मस्थलों में से एक है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ विध्वंस के बाद भगवान शिव के अवतार काल भैरव यहां दक्षिणमुखी रूप में स्थापित हुए हैं. इस मंदिर को भगवान श्री राम की प्रथम यात्रा का तीसरा पड़ाव भी माना जाता है.
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर में एक प्राचीन हवन कुंड भी मौजूद है. इसके अलावा, मंदिर के समीप ही एक पटल सरोवर भी मौजूद है, जिसकी मान्यता है कि इसके पवित्र जल में स्नान करने से हर तरह के चर्म रोगों से छुटकारा मिल जाता है.
इस मंदिर की मान्यताएं अपने आप में विशेष हैं. सावन के महीने में इस मंदिर परिसर में भक्तों की अपार संख्या में भीड़ इकट्ठा होती है.