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पूजा के वक्त मोदी जी की सीता कौन थीं प्रमोद तिवारी के बयान से मचा हड़कंप बोली हिंदू विरोधी कांग्रेस…


नई दिल्ली: राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी पर उठे राजनीतिक विवाद पर संसद से सड़क तक शुरू हुआ सियासी घमासान अब भगवान राम और माता सीता के संदर्भ तक पहुंच गया है. कुछ दिन पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया था. इस दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बाकायदा एक नाटकीय प्रदर्शन किया था. इसके बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के एक बयान ने इस विवाद को और गरमा दिया है. तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर में पूजा किए जाने को लेकर सवाल खड़ा किया. उन्होंने भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ का उदाहरण दिया और पूछा कि उस समय भगवान राम के साथ पूजा में माता सीता थीं. लेकिन मोदी जी की सीता कौन हैं. बयान सामने आते ही बीजेपी ने इसे हिंदू आस्था से जोड़ते हुए कांग्रेस पर हमला बोल दिया.

मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है. इसके पीछे राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद की वह पूरी राजनीतिक लड़ाई है, जिसमें विपक्ष सरकार और मंदिर व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, जबकि बीजेपी विपक्ष पर भगवान राम और हिंदू आस्था का अपमान करने का आरोप लगा रही है. संसद में पप्पू यादव के प्रदर्शन के बाद मामला और तूल पकड़ चुका है. अब प्रमोद तिवारी के बयान ने इस राजनीतिक लड़ाई को एक नया धार्मिक और भावनात्मक मोड़ दे दिया है. बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने तिवारी के बयान को शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस को हिंदू विरोधी पार्टी तक कह दिया. यानी राम मंदिर के चढ़ावे से शुरू हुई बहस अब भगवान राम, माता सीता और प्रधानमंत्री मोदी की पूजा तक पहुंच गई है.

कहां पहुंच गया सियासी संग्राम?

राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन के आरोपों को लेकर संसद के मौजूदा मानसून सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है. विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को संसद परिसर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर एक नाटक किया था. इसमें पप्पू यादव ने भगवा कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया. विपक्षी सांसदों ने दानपात्र में पैसे डालने और फिर कथित तौर पर पैसे निकालने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया. इसके बाद बीजेपी ने इस प्रदर्शन को भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान बताया. इसी विवाद के बीच अब प्रमोद तिवारी का बयान सामने आया है.

प्रमोद तिवारी ने पूजा में सीता की मौजूदगी पर उठाया सवाल

प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘अब, बहुत सी चीजें शुभ हैं… यहां तक कि जब भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था, तब उन्होंने देवी सीता की पत्थर की मूर्ति बनवाकर अपने बगल में रखी थी और उसके बाद यज्ञ किया था. अब जब प्रधानमंत्री मोदी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा/पूजा कर रहे थे, तब मैं देखता रहा मुझे वहां कहीं भी देवी सीता दिखाई नहीं दीं. अब उस समय भगवान राम की सीता कौन थीं और मोदी जी की सीता कौन हैं… इसका फैसला मोदी जी खुद कर लें.’

तिवारी की इसी टिप्पणी को बीजेपी ने आपत्तिजनक बताया है. बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘शर्मनाक हिंदू विरोधी कांग्रेस! कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने शालीनता की हर सीमा पार कर दी है. ‘राम मंदिर पूजा के वक्त मोदी जी की सीता कौन थीं?’ राहुल गांधी ने अपने चाटुकारों को अब अपने स्तर तक गिरने का निर्देश दे दिया है. जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है.’

कांग्रेस हिंदू विरोधी पार्टी: BJP का पलटवार

प्रदीप भंडारी ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी हिंदू विरोधी है. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी हिंदू विरोधी पार्टी है. ये वही पार्टी है जिसने अभी तक प्रभु श्री राम के दर्शन नहीं किए. कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के कहने पर साधु-संतों का संसद के बाहर अपमान किया और अब प्रमोद तिवारी राहुल गांधी के कहने पर पीएम मोदी और हिंदुओं का अपमान कर रहे हैं.’

बीजेपी के इस हमले से साफ है कि वह प्रमोद तिवारी के बयान को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी के तौर पर नहीं देख रही है. पार्टी इसे कांग्रेस की हिंदू और राम मंदिर से जुड़ी राजनीति के बड़े नैरेटिव से जोड़ रही है. वहीं विपक्ष पहले से राम मंदिर चढ़ावे के इस्तेमाल और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहा है.

पप्पू यादव के नाटक के बाद और तेज हुई बयानबाजी

राम मंदिर चंदे के विवाद ने संसद में उस समय नया रूप लिया, जब विपक्षी सांसदों ने कथित चढ़ावागबन को लेकर प्रतीकात्मक नाटक किया. पप्पू यादव ने इस प्रदर्शन में दानपात्र से पैसे निकालने का अभिनय किया. बीजेपी नेताओं ने इसे भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान बताया. इसके बाद वाराणसी में पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद के खिलाफ शिकायत और FIR का मामला भी सामने आया. अब इसी कड़ी में प्रमोद तिवारी का बयान राजनीतिक वार-पलटवार को और तीखा करता नजर आ रहा है.

राम मंदिर विवाद में अब नया धार्मिक एंगल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद की शुरुआत कथित चढ़ावे के दुरुपयोग के आरोपों से हुई थी. लेकिन संसद के प्रदर्शन और उसके बाद हुई बयानबाजी ने इसे सीधे धार्मिक आस्था और राजनीतिक पहचान से जोड़ दिया है. एक तरफ विपक्ष मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहा है. दूसरी तरफ बीजेपी विपक्ष पर राम और हिंदू धर्म का अपमान करने का आरोप लगा रही है. प्रमोद तिवारी के बयान के बाद यह टकराव और बढ़ने की संभावना है. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच यह जुबानी जंग राजनीतिक रूप से कितनी दूर जाती है, इस पर नजर रहेगी.



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