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Karnataka Politics: कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आ गई है. 19 विधायकों को मंत्री बनाए जाने के बाद कुछ नेताओं ने मंत्री पद नहीं मिलने पर इस्तीफे की पेशकश की. विधायक यशवंत रायगौड़ा वी. पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कही, जबकि बेलूर गोपालकृष्ण भी नाराज बताए गए. इस बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराज विधायकों को कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि जो इस्तीफा देना चाहता है, वह दे सकता है और उसका इस्तीफा कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लिया जाएगा. शिवकुमार ने विधायकों से धैर्य रखने और पार्टी के साथ बने रहने की अपील की.
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज विधायकों ने इस्तीफे की पेशकश की. (फाइल फोटो)
Karnataka Politics: कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है. 19 विधायकों को मंत्री बनाए जाने के बाद कई नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई. कुछ विधायकों ने मंत्री पद नहीं मिलने पर इस्तीफे तक की बात कह दी. मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अब दो टूक संदेश दे दिया है. उनका कहना है कि जिसे इस्तीफा देना है, वह दे सकता है और ऐसा हुआ तो सरकार उसे कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लेगी. सीएम का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब कांग्रेस के कुछ विधायक खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं. यानी कैबिनेट विस्तार से सरकार में खाली पद तो भरे गए, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष की नई कहानी भी शुरू हो गई.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 19 मंत्रियों को शामिल किया गया. इसके बाद कर्नाटक सरकार में अब एक मंत्री पद खाली है. विस्तार के बाद कांग्रेस विधायक यशवंत रायगौड़ा वी. पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कही. बेलूर गोपालकृष्ण ने भी मंत्री पद नहीं मिलने पर पद छोड़ने की पेशकश की. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के भीतर नाराजगी आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर सकती है? डीके शिवकुमार ने हालांकि साफ कर दिया है कि पार्टी में रहकर धैर्य रखना होगा और हर किसी को तुरंत मंत्री पद नहीं मिल सकता.
नाराज विधायकों को डीके शिवकुमार का सीधा संदेश
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘इस्तीफा राजनीति का हिस्सा है. जो इस्तीफा देना चाहता है, उसे कोई रोक नहीं सकता. अगर वे पार्टी और अपना राजनीतिक भविष्य चाहते हैं तो उन्हें पार्टी में रहना चाहिए. अगर पार्टी है तो बाकी सब कुछ उसके बाद आता है.’
उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का भी हवाला दिया. शिवकुमार ने कहा कि जब धर्म सिंह और सिद्धारमैया के कार्यकाल में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला था, तब वह भी इस्तीफा दे सकते थे. उन्होंने कहा कि जी. परमेश्वर और उन्होंने भी इंतजार किया था. राजनीति में धैर्य रखना जरूरी है. इसके बाद सीएम ने सबसे कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा, ‘अगर कोई इस्तीफा देता है तो मैं कुछ ही मिनटों में उसे स्वीकार करने जा रहा हूं.’ शिवकुमार के इस बयान को नाराज विधायकों के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है.
19 नए मंत्री, फिर भी कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी
कर्नाटक में लंबे इंतजार के बाद सोमवार को कैबिनेट विस्तार हुआ. इसमें 19 विधायकों को मंत्री बनाया गया. विस्तार के बाद सरकार में एक मंत्री पद अभी खाली है. जाहिर है कि मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों को इस बार भी मौका नहीं मिला. इसी वजह से कुछ नेताओं की नाराजगी सार्वजनिक हो गई.
विधायक यशवंत रायगौड़ा वी. पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा सौंप दिया. वहीं बेलूर गोपालकृष्ण ने भी मंत्री पद नहीं मिलने के बाद पद छोड़ने की पेशकश की. इन घटनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि नाराज विधायक वास्तव में अपने इस्तीफे पर कायम रहते हैं या पार्टी के भीतर बातचीत के बाद मामला शांत हो जाता है.
बोर्ड-निगमों में भी मिलेगा मौका, शिवकुमार ने दिया संकेत
डीके शिवकुमार ने नाराज विधायकों को शांत करने के लिए एक और रास्ते का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के बोर्ड और निगमों में जल्द नियुक्तियां की जाएंगी. पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों को इन संस्थानों में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. शिवकुमार के मुताबिक पहले जिन पार्टी नेताओं और विधायकों को बोर्ड और निगमों में सदस्य या अध्यक्ष बनाया गया था, उनके लिए करीब ढाई साल का कार्यकाल तय किया गया था. अब यह अवधि भी काफी आगे बढ़ चुकी है. उन्होंने कहा कि पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से इस्तीफा लेकर इन पदों को नए सिरे से भरा जाएगा. इसके बाद विधायकों से बातचीत की जाएगी.
सिद्धारमैया की नाराजगी की भी चर्चा
कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर सिर्फ विधायकों की नाराजगी ही चर्चा में नहीं है. पार्टी के कुछ अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी हाईकमान के फैसले से पूरी तरह खुश नहीं थे. बताया गया कि कैबिनेट विस्तार के दौरान सिद्धारमैया की ओर से सुझाए गए कुछ नामों को नजरअंदाज किया गया. हालांकि डीके शिवकुमार ने इन चर्चाओं को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया कैबिनेट विस्तार से नाराज नहीं हैं. ऐसे में फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश यही होगी कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पैदा हुई नाराजगी को ज्यादा बड़ा राजनीतिक विवाद बनने से रोका जाए. खासकर तब, जब सरकार को सदन के भीतर और बाहर अपने विधायकों के साथ एकजुटता बनाए रखने की जरूरत है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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