ईरान-इजरायल युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय टैंकर कैप्टन रमन कपूर और उनके 23 चालक दल (क्रू) के सदस्यों ने मौत के साये में 75 दिन बिताए. एक तरफ सिर के ऊपर से गुजरती मिसाइलें थीं तो दूसरी तरफ समुद्र में गूंजते धमाकों का सन्नाटा. कैप्टन रमन कपूर ने युद्ध क्षेत्र के बीच बिताए उन 75 खौफनाक दिनों, मानसिक तनाव और मर्चेंट नेवी के गुमनाम नायकों की अनसुनी दास्तान साझा की है. कैप्टन रमन कपूर को युद्ध छिड़ने की पहली खबर किसी आधिकारिक ईमेल या कंपनी के सर्कुलर से नहीं बल्कि इराकी पोर्ट के एक स्थानीय पायलट से मिली. उस समय जहाज पर 1,100,000 मीट्रिक टन (MT) तेल लदा हुआ था. उन्होंने एक डिमांड रखते हुए कहा कि हमें सहानुभूति नहीं बल्कि सुरक्षित गलियारा और वार जोन में जाने से मना करने का अधिकार चाहिए.
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि कुछ ही देर में पोर्ट अथॉरिटी का आदेश आया, “बर्थ खाली करें, सुरक्षित एंकरेज (लंगर) पर जाएं और आगे के आदेश का इंतजार करें. आगे नहीं बढ़ना है.” जहाज पर कुल 23 क्रू मेंबर थे, जिनमें सबसे छोटा 21 साल का युवक था और सबसे बुजुर्ग 30 साल का तजुर्बा रखने वाला बोसन. कैप्टन ने तुरंत सभी को ब्रिज पर बुलाया और सच बता दिया कि जंग शुरू हो चुकी है.
धमाकों के बीच का सन्नाटा
युद्ध क्षेत्र में जहाज खड़ा जरूर था लेकिन काम कभी नहीं रुका. सुरक्षा ड्रिल, जनरेटर और फायर सिस्टम की जांच रोज का काम बन गई थी. हर सुबह 8 बजे सुरक्षा ब्रीफिंग होती थी और दोपहर में मिसाइल हमले और जहाज छोड़ने की मॉक ड्रिल कराई जाती थी.
खौफ का असली मंजर तब सामने आया जब क्रू मेंबर्स डिनर कर रहे थे. अचानक एक तेज धमाका हुआ, जहाज का पोर्ट साइड चमक उठा और पूरा जहाज थर्रा गया. धमाका 1 मील से भी कम दूरी पर हुआ था. टेबल पर रखे कॉफी कप नीचे गिर गए. उस दिन के बाद से डर की एक नई आवाज बन गई थी दो धमाकों के बीच छा जाने वाला सन्नाटा.
बगावत का डर
तनाव तब और बढ़ गया जब कंपनी ने जहाज को युद्ध क्षेत्र में ही दूसरे जहाज के साथ शिप-टू-शिप (STS) कार्गो ट्रांसफर करने का आदेश दिया. क्रू मेंबर्स ने इसका विरोध किया क्योंकि कुछ ही दिन पहले इसी तरह के ट्रांसफर में शामिल एक अन्य जहाज पर हमला हुआ था. हालांकि, नौसेना की गश्त, सुरक्षा बोट और विशेष बोनस के आश्वासन के बाद यह काम 36 घंटे में पूरा किया गया, जहां हर 15 मिनट पर क्रू मेंबर आसमान की तरफ मिसाइल देखने को मजबूर थे. लंबी अनिश्चितता, घर से दूर रहने के तनाव और समय पर रिप्लेसमेंट न मिलने के कारण क्रू मेंबर्स बगावत और इस्तीफे के कगार पर पहुंच गए थे.
14 मई को मिली आजादी, लेकिन दर्द अभी बाकी है
फाइनली 12 मई को कैप्टन रमन कपूर के रिप्लेसमेंट की खबर आई और 14 मई को वे 75 दिनों बाद जहाज से सही-सलामत साइन-ऑफ कर सके. हालांकि, उनका क्रू और हजारों अन्य नाविक आज भी उस युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं. कैप्टन कपूर कहते हैं, “दुनिया को लगता है कि मर्चेंट नेवी की जिंदगी फिल्मों जैसी होती है लेकिन यहां कोई हीरो नहीं होता. 90% वैश्विक व्यापार समुद्र के जरिए होता है जिसे निहत्थे नाविक अंजाम देते हैं. दुनिया को नाविकों की याद तब आती है जब किसी का शव घर पहुंचता है. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों को तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे. हमें सहानुभूति नहीं बल्कि सुरक्षित गलियारा और युद्ध क्षेत्र में जाने से इनकार करने का अधिकार चाहिए.”
सवाल-जवाब
होर्मुज की खाड़ी में भारतीय टैंकर कैप्टन कितने दिनों तक फंसे रहे?
भारतीय टैंकर कैप्टन रमन कपूर और उनका 23 सदस्यों का क्रू युद्ध क्षेत्र में 75 दिनों तक फंसा रहा.
जहाज पर कितना कार्गो मौजूद था?
जहाज पर 1,100,000 मीट्रिक टन (MT) तेल (तेल का कार्गो) मौजूद था.
कैप्टन रमन कपूर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों से क्या मांग की है?
उन्होंने IMO और अन्य समुद्री निकायों से नाविकों के लिए सुरक्षित गलियारा (Safe Corridor), वास्तविक समय की सुरक्षा जानकारी और नौकरी गंवाए बिना असुरक्षित जलमार्ग में जाने से इनकार करने के अधिकार की मांग की है.