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इधर खिलाड़ियों ने फुटबॉल प्रतिभा खेल कौशल व शारीरिक क्षमता का किया प्रदर्शन




खरसावां । झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के तत्वावधान में सरायकेला-खरसावां जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सहयोग से भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में अंडर-14 बालक फुटबॉल चयन-सह-ट्रायल कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 120 बाल खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव मोहम्मद दिलदार, पिनाकी रंजन एवं जिला ओलंपिक संघ के सचिव मोहम्मद दिलदार ने संयुक्त रूप से किया। इस चयन-सह-ट्रायल कैंप का उद्देश्य प्रतिभावान बाल फुटबॉल खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें राज्य स्तरीय फुटबॉल टीम के लिए चयनित करना है। कैंप में खिलाड़ियों ने अपनी फुटबॉल प्रतिभा, खेल कौशल एवं शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे चयन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण एवं उभरते हुए खिलाड़ियों को बेहतर अवसर प्रदान करने तथा फुटबॉल के विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। यद्यपि इस कैंप सिर्फ़ उन खिलाड़ियों को शामिल किया गया जिनका रजिस्ट्रेशन ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन में हो चुका है। डी एस ए सचिव ने खेल के क्षेत्र में कैरियर निर्माण के लिए फुटबॉल के मुख्य धारा से खिलाड़ियों को जुड़ने की अपील की । कैंप में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं खेलप्रेमियों में उत्साह का माहौल रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से आवासीय फुटबाल प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षक श्री बलराम महतो, संजय सुंडी, दिकू हेंब्रम, भूटान स्वासी सहित कई सदस्य उपस्थित थे। झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के चयनकर्ता के रूप में अविनाश टोप्पो एवं बाबूराम मुंडा शामिल थे। भास्कर न्यूज | सरायकेला खेलो झारखंड जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चिलचिलाती धूप में बच्चों के खड़े रहने की घटना के बाद अब शिक्षा विभाग के आयोजनों की व्यवस्थाओं और खर्च को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभागीय कार्यक्रमों में टेंट, मंच, भोजन सहित अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा कथित तौर पर बार-बार एक ही वेंडर को दिए जाने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विभागीय आयोजनों में सभी वेंडरों को समान अवसर मिल रहा है और चयन की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है?आयो से जुड़े खर्च, टेंडर अथवा कोटेशन की प्रक्रिया और कार्यादेश जारी करने के आधार को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है। यदि लगातार एक ही वेंडर को काम मिल रहा है, तो उसके चयन की प्रक्रिया और निर्धारित मानकों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि काम देने में निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। वहीं, विभागीय आयोजनों में कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। व्यवस्था कराने से लेकर काम दिलाने तक उनकी कथित सक्रियता के बीच यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तविक जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी की है तथा भुगतान किन आधारों पर किया जाता है। खेलो झारखंड जैसे विद्यार्थियों से जुड़े आयोजन में खर्च के साथ बच्चों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। वेंडर चयन, कार्यादेश, भुगतान और आयोजन की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, किसी भी अनियमितता अथवा मिलीभगत की पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही की जा सकती है।



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