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Supreme Court on Liquor Ban: देश के कई राज्यों में शराब पर सख्त पाबंदी है. इनमें गुजरात और बिहार जैसे राज्य भी शामिल हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान शराब के सेवन को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
Supreme Court on Liquor Ban: शराब पर पाबंदी लगाना उचित है? शराबबंदी से जुड़े कानूनों को लेकर अक्सर ही सवाल उठते रहे हैं. गुजरात, बिहार जैसे राज्यों में शराब पीने और उसके उत्पादन पर (कुछ अपवाद को छोड़कर) सख्त प्रतिबंध लागू हैं. इसपर राजनीति भी होती रही है. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी शराबबंदी वाले कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं. एक मामले की सुनवाई के दौरान दो जजों की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि शराब को प्रतिबंधित करने का क्या हासिल है. साथ ही शीर्ष अदालत की पीठ ने जहरीली शराब पीने से एक राज्य में 600 से ज्यादा हुई मौतों का भी जिक्र किया. सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी के चलते पैदा हुईं 5 बुराइयां भी गिना दीं.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 18 सितंबर 2026 को शराबबंदी के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इससे जुड़ी 5 प्रमुख ‘बुराइयों’ का उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी से राजस्व का नुकसान, प्रतिबंध लागू करने पर सरकारी खर्च, पुलिस में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाने और आखिरकार नशीले पदार्थों की समस्या बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. इन नियमों में मेथनॉल की खरीद पर प्रतिबंध लगाए गए थे और गैर-दवा निर्माताओं को इसकी बिक्री से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना अनिवार्य किया गया था. महाराष्ट्र सरकार ने इन नियमों का बचाव किया था.
भावनगर और सागर शराब कांड का भी जिक्र
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नियम 1991 में मुंबई में मेथनॉल मिले जहरीली शराब पीने से 93 लोगों की मौत के बाद बनाए गए थे. केमिकल मैन्यूफैक्चरर्स कंपनियों और इंडियन केमिकल काउंसिल समेत याचिकाकर्ताओं ने इन प्रावधानों को चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा कि हाल के वर्षों में गुजरात के भावनगर और मध्य प्रदेश के सागर में हुई जहरीली शराब की घटनाएं अधिकारियों के लिए चेतावनी हैं. भावनगर में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि सागर में 15 लोगों की जान गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने बताया शराबबंदी से पैदा होने वाली 5 बुराइयां
- राजस्व का नुकसान
- प्रतिबंध लागू करने पर सरकारी खर्च
- पुलिस में भ्रष्टाचार
- अवैध शराब बनाने
- नशीले पदार्थों की समस्या बढ़े का खतरा
गुजरात में 600 से ज्यादा मौतें
पीठ ने कहा कि इतिहास बताता है कि पूर्ण शराबबंदी से अक्सर शराब का अवैध करोबार शुरू हो जाता है. इससे अनियंत्रित और जानलेवा शराब के उत्पादन का खतरा बढ़ जाता है. अदालत ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में सख्त शराबबंदी नीति लागू है, लेकिन राज्य के गठन और स्वतंत्रता के बाद से कम से कम 10 बड़ी जहरीली शराब त्रासदियां हो चुकी हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों की जान गई.
महाराष्ट्र सरकार की दलीलें खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि मेथनॉल में कड़वा पदार्थ और रंग मिलाने की अनिवार्यता का जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध स्थापित नहीं किया गया है. पीठ ने कहा कि राज्य की मंशा पर संदेह नहीं है, लेकिन केवल मंशा के आधार पर किसी नियम को ‘मनमाना’ होने की कसौटी से मुक्त नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि राज्य यह नहीं बता सका कि इन पदार्थों को मिलाने से मेथनॉल के लगातार इस्तेमाल को रोका या हतोत्साहित किया जा सकेगा अथवा इसकी केमिकल स्ट्रक्चर इस तरह बदलेगी कि इसका इस्तेमाल जहरीली शराब बनाने में न हो सके. पीठ ने सवाल उठाया कि अन्य मिलावटी पदार्थों के इस्तेमाल से बनने वाली अवैध शराब को रोकने के लिए राज्य की क्या योजना है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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