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पिता की स्मृति में महाराजा डूंगर सिंह ने बनवाया था शिव मंदिर जानें बीकानेर के इस प्रसिद्ध मंदिर की कहानी…


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Laleshwar Mahadev Temple: लालेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बीकानेर के राजघराने से जुड़ा बताया जाता है. शिवबाड़ी के अधिष्ठाता विमर्शानंद महाराज के अनुसार, महाराजा डूंगर सिंह ने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से इस मंदिर का निर्माण करवाया था. पिता की स्मृति से जुड़े होने के कारण मंदिर का नाम लालेश्वर महादेव रखा गया. यह मंदिर बीकानेर की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

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बीकानेर. बीकानेर के शिवबाड़ी क्षेत्र में स्थित लालेश्वर महादेव मंदिर आस्था के साथ ही ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. मंदिर में विराजमान पंचमुखी महादेव का सोने के आभूषणों से किया जाने वाला दिव्य शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है. इस मंदिर का निर्माण तत्कालीन बीकानेर महाराजा डूंगर सिंह ने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की स्मृति में वर्ष 1880 में करवाया था. मंदिर की स्थापना के बाद से ही यह स्थान शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

लालेश्वर मंदिर शिवबाड़ी के अधिष्ठाता विमर्शानंद महाराज ने बताया कि महाराजा डूंगर सिंह ने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से इस मंदिर का निर्माण करवाया था. इसी कारण मंदिर का नाम लालेश्वर महादेव मंदिर रखा गया. लाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर बीकानेर की प्राचीन स्थापत्य कला और राजपरिवार की धार्मिक आस्था का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है.

आभूषणों से शृंगार करने की परंपरा चली आ रही
महाराज ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद राजपरिवार की महारानियों ने भगवान महादेव के स्वरूप और उनके शृंगार के दर्शन किए. उन्होंने कहा कि भगवान का शृंगार पहले से ही अत्यंत सुंदर है, लेकिन यदि इसे और अधिक भव्य बनाया जाए तो इसकी शोभा कई गुना बढ़ जाएगी. इसके बाद भगवान महादेव के शृंगार के लिए सोने के आभूषण तैयार करवाए गए. तभी से विशेष अवसरों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भगवान का स्वर्ण आभूषणों से शृंगार करने की परंपरा चली आ रही है.

हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा
लालेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव का पंचमुखी स्वरूप है. सनातन धर्म में पंचमुखी महादेव को भगवान शिव के पांच प्रमुख कार्यों का प्रतीक माना जाता है. इन पांच कार्यों में सृष्टि की रचना, उसका पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह शामिल हैं. पंचमुखी स्वरूप भगवान शिव की सर्वव्यापकता और संपूर्ण सृष्टि के संचालन में उनकी भूमिका को दर्शाता है. मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, सावन और महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की विशेष भीड़ रहती है. इस दौरान भगवान महादेव का विधि-विधान से अभिषेक, पूजन और आकर्षक शृंगार किया जाता है. विशेष पर्वों पर मंदिर परिसर शिवमय हो जाता है और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है.

पुराना लालेश्वर महादेव मंदिर बीकानेर राजपरिवार की धार्मिक भावना
करीब डेढ़ शताब्दी पुराना लालेश्वर महादेव मंदिर आज भी बीकानेर राजपरिवार की धार्मिक भावना, प्राचीन स्थापत्य और शिवभक्ति की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है. पंचमुखी महादेव का दिव्य स्वरूप और सोने के आभूषणों से होने वाला शृंगार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है.

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Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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