हैदराबाद: अगर आप हैदराबाद या इसके आसपास कोई प्लॉट, मकान या विला खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कागजी रजिस्ट्री या स्थानीय अनुमति देखकर आश्वस्त न हों. शहर में झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर चल रही सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के बीच सैकड़ों निर्माणों पर बुलडोजर चलाए गए हैं. इनमें कई ऐसे मकान भी शामिल रहे हैं, जिनके पास स्थानीय स्तर पर रजिस्ट्री और निर्माण की मंजूरी के दस्तावेज मौजूद थे लेकिन वे जल निकायों के संरक्षण नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.
प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य कारण निर्माण का FTL यानी फुल टैंक लेवल या बफ़र ज़ोन के दायरे में आना है. पर्यावरण और जल संरक्षण नियमों के अनुसार, इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण पूरी तरह गैर-कानूनी माना जाता है.
क्या हैं FTL और बफ़र ज़ोन?
FTL (Full Tank Level): यह किसी झील, तालाब या जलाशय में पानी की वह अधिकतम सीमा होती है, जहाँ तक पूरी क्षमता में पानी भर सकता है. इस जलस्तर की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित होता है.
बफ़र ज़ोन (Buffer Zone): FTL सीमा से सटा हुआ बाहरी सुरक्षा दायरा बफ़र ज़ोन कहलाता है. पर्यावरण संतुलन और जलभराव से बचाव के लिए इसे खुला छोड़ना अनिवार्य होता है. इस दायरे में सीमित खेती जैसी गतिविधियां तो हो सकती हैं लेकिन मकान, दुकान, गोदाम या चारदीवारी बनाना कानूनन अपराध है.
अक्सर खरीदार मानते हैं कि यदि संपत्ति की रजिस्ट्री हो चुकी है, तो वह पूरी तरह सुरक्षित और वैध है. जानकारों के मुताबिक, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री मुख्य रूप से जमीन के मालिकाना लेन-देन को दर्ज करती है. यह दस्तावेज इस बात की पुष्टि नहीं करता कि संबंधित जमीन किसी झील के FTL, बफ़र ज़ोन या प्राकृतिक नाले के दायरे से बाहर है.
खुद कैसे करें जांच?
खरीदारी से पहले संबंधित संपत्ति की स्थिति जांचना बेहद आसान है
1. हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के आधिकारिक लेक पोर्टल पर जाएं.
2. वहां अपने जिले, मंडल और गांव का विवरण चुनें.
3. संबंधित झील का नाम और उसका आधिकारिक नक्शा (Cadastral/FTL Map) देखें.
4. राजस्व रिकॉर्ड व सर्वे नंबर के जरिए मिलान करें कि आपका प्लॉट सुरक्षित दायरे में है या नहीं.
गाढ़ी कमाई को नुकसान से बचाने के लिए किसी भी सौदे से पहले FTL और बफ़र ज़ोन की तकनीकी जांच कराना ही सबसे सुरक्षित कदम है.