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Ramdhari Singh Dinkar: बिहार के बेगूसराय का सिमरिया गांव साहित्य की अनोखी तस्वीर पेश करता है. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली में हजारों घरों की दीवारों पर उनकी कविताओं की पंक्तियां लिखी हैं. यहां किताबों के साथ दीवारें भी लोगों को साहित्य, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का पाठ पढ़ाती हैं. फोटो में देखिए दिनकर की कविताओं से सजा सिमरिया गांव…
बिहार के बेगूसराय जिले का सिमरिया गांव राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली है. गांव में प्रवेश करते ही घरों की दीवारों पर उनकी ओजपूर्ण कविताओं की पंक्तियां दिखाई देती हैं. यहां साहित्य किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि दीवारों के जरिए आम लोगों तक पहुंच रहा है.
सिमरिया गांव के हजारों घरों की दीवारों पर राष्ट्रकवि दिनकर की कविताओं की पंक्तियां उकेरी गई हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, यह सिर्फ सजावट नहीं बल्कि साहित्य को लोगों के बीच पहुंचाने का प्रयास है. राह चलते लोग भी इन पंक्तियों को पढ़कर दिनकर के विचारों से जुड़ते हैं.
आज की पीढ़ी के साहित्य से दूर होने की चर्चा के बीच सिमरिया में अलग तस्वीर देखने को मिलती है. यहां किताबें पढ़ने का मौका न मिलने वाले लोग भी दीवारों पर लिखी दिनकर की कविताओं के जरिए उनके साहित्य और विचारों से जुड़ रहे हैं.
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया आज भी उनकी साहित्यिक विरासत को संजोए हुए है. गांव की गलियों और घरों पर लिखी उनकी कविताएं यह अहसास कराती हैं कि दिनकर का साहित्य यहां के जीवन का हिस्सा बन चुका है.
सिमरिया में दिनकर की कविताएं नई पीढ़ी तक भी पहुंच रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्चे उनकी कई रचनाएं याद करके सुनाते हैं.
सिमरिया अब सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि साहित्य प्रेमियों और साहित्यकारों के लिए खास जगह बन चुका है. यहां मौजूद पुस्तकालय साहित्य का खजाना है और सालभर बड़े साहित्यकारों का आना-जाना रहता है. दिनकर की जयंती और पुण्यतिथि पर भी गांव में उनकी कविताओं की गूंज सुनाई देती है.