नई दिल्ली. एक बात की चर्चा इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दोनों जगह पर खूब हो रही है. बेल्जियम से 300 पहियों पर लदकर भारत आया वेसेल्स, जिसे यूपी के बलरामपुर जिले में स्थित चीनी मिल के लिए मंगाया गया है. यह चीनी मिल 51 साल पहले एक छोटी सी यूनिट के रूप में शुरू हुई थी और आज इसका कारोबार करीब 14 हजार करोड़ रुपये का पहुंच गया है. बलरामपुर चीनी मिल को देश की दूसरी सबसे बड़ी मिल के रूप में गिना जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस मिल को इतनी ऊंचाई तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका एक महिला की रही है.
बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है. इस मिल की शुरुआत साल 14 जुलाई, 1975 को हुई थी. मिल को शुरू करने और बढ़ाने में केएन सारोगी की बड़ी भूमिका रही है. केएन सारोगी कंपनी के मौजूदा चेयरमैन और एमडी विवेक सारोगी के पिता थे. अभी कंपनी की कमान विवेक के हाथ में है और उनकी पत्नी सुमेधा सारोगी भी कंपनी में हिस्सेदारी रखती हैं. विवेक की बेटी अवंतिका सारोगी कंपनी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. सारोगी के फैमिली ट्रस्ट का प्रमोटर्स के रूप में इस कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है.
मीनाक्षी सारोगी ने बनाया बड़ा कारोबार
बलरामपुर चीनी मिल को ऊंचाईयों तक ले जाने का काम विवेक सारोगी की मां मीनाक्षी सारोगी ने किया. उन्होंने गन्ने की खरीद, किसानों को भुगतान और उत्पादन के साथ सप्लाई पर कंट्रोल किया और कंपनी लगातार कारोबार बढ़ाती गई. उनकी देखरेख में कंपनी 1 यूनिट से बढ़कर 10 यूनिट तक पहुंच गई और आज यह चीनी के साथ, एथनॉल और बिजली तक बनाती है. इस मिल ने आसपास के कई जिलों के हजारों किसानों को गन्ने की खेती के प्रेरित किया है.
कंपनी में किसका कितना हिस्सा
बलरामपुर चीनी मिल्स ने जून, 2026 में शेयर बाजार को जो जानकादी दी थी, उसके मुताबकि प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 42.86 फीसदी थी. इसमें सारोगी परिवार के ट्रस्ट का हिस्सा 24.83 फीसदी है. इसके अलावा विवेक सारोगी की 3.68 फीसदी हिस्सेदारी और सुमेधा सारोगी की 2.71 फीसदी हिस्सेदारी है. उनकी बेटी अवंतिका की भी इस कंपनी में 1.51 फीसदी हिस्सेदारी है.
कैसे पहुंचा इतना बड़ा कारोबार
बलरामपुर चीनी मिल की जब शुरुआत हुई थी, तब इसकी क्षमता सिर्फ 80 टन रोजाना थी, लेकिन आज यह 80 हजार टन रोजाना गन्ने की खपत करने की क्षमता रखता है. सारोगी परिवार ने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए तुलसीपुर और बभनान मिल को भी खरीद लिया था. यह मिल हर साल करीब 6 हजार करोड़ का रेवेन्यू पैदा करती है. इसके अलावा 5 लाख किसानों के लिए कमाई का प्रमुख जरिया भी है. आज कंपनी की मिलें बलरामपुर के अलावा बभनान, तुलसीपुर, हैदरगढ़, अकबरपुर, रौजागांव, मनकापुर, कुंभी, गुलरिया और मैजापुर में भी चल रही हैं.
कितने रुपये का किया कारोबार
बलरामपुर चीनी मिल का पिछले वित्तवर्ष में कुल कारोबार 6,271 करोड़ रुपये रहा था. इससे पहले के वित्तवर्ष में यह कारोबार 5,415 करोड़ था. इस कारोबार में चीनी की हिस्सेदारी 5,507 करोड़, डिस्टलरी की 1,721 करोड़, पीएलए की 23.9 करोड़ और अन्य कारोबार से 13.9 करोड़ की कमाई हुई है.