उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है. समाजवादी पार्टी ने प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार बनाकर नामांकन करा दिया है. खास बात यह है कि नथवानी का नाम सामने आते ही अब तीसरे उम्मीदवार को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं. इसकी वजह यह भी है कि सपा की दूसरी सीट के लिए नथवानी का नाम पहले से चर्चा में नहीं था. अब सबसे बड़ा सवाल है कि अगर सपा तीसरी सीट के लिए भी मैदान में उतरती है तो उसका उम्मीदवार कौन होगा? इसके लिए पार्टी किन समीकरणों को ध्यान में रखेगी? सोशल मीडिया और सियासी हलकों में सलीम शेरवानी, बृजभूषण शरण सिंह, आलोक रंजन और अरविंद सिंह गोप जैसे नाम चर्चा में हैं. इनमें बृजभूषण के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है. वह बीजेपी के दिग्गज नेता हैं. ऐसे में उनके नाम ने तीसरे उम्मीदवार की चर्चा ने अटकलों के बाजार को और भी गरम कर दिया है. आइए जानते हैं, इन चार नामों के पीछे क्या राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बताए जा रहे हैं.
आखिर क्यों हो रही है इन 4 नामों की सबसे ज्यादा चर्चा?
हम आपको सबसे पहले ही बता दें कि सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अभी कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन पार्टी के भीतर और मीडिया रिपोर्टों में कई नाम चर्चा में हैं. इनमें सलीम शेरवानी, आलोक रंजन और अरविंद सिंह गोप के नाम पहले से सामने आते रहे हैं. अब बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का नाम भी चर्चा में आ गया है. इसकी वजह 30 सितंबर को उनका अखिलेश यादव को लेकर दिया गया बयान भी है. उन्होंने कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है.” हालांकि, इस बयान को राज्यसभा उम्मीदवारी से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. न ही इसके मायने अभी तक समझ में आए हैं. बृजभूषण शरण सिंह ने यह बयान क्यों दिया? इसके पीछे उनकी मंशा क्या थी अभी कुछ भी आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन इस बयान ने अटकलों का बाजार जरूर गरम कर दिया है. तो चलिए सारे चर्चा में आने वाले नेताओं की कहानी थोड़ा बहुत समझते हैं.
1. बृजभूषण शरण सिंह: सबसे चौंकाने वाला नाम
बृजभूषण शरण सिंह का नाम इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है क्योंकि वह लंबे समय से बीजेपी की राजनीति में रहे हैं और कैसरगंज से पूर्व सांसद हैं. 30 सितंबर को उन्होंने अखिलेश यादव को लेकर कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है.” यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस बनाए हुए है. इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनके नाम को लेकर चर्चा बढ़ी. हालांकि, अभी यह सिर्फ चर्चा है और सपा ने उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई घोषणा नहीं की है.
2. आलोक रंजन: प्रशासनिक अनुभव वाला चेहरा
आलोक रंजन का नाम सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के तौर पर पहले से चर्चा में रहा है. वह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव हैं और अखिलेश यादव सरकार के दौरान महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका में रहे. 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके. इस बार भी उनका नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके पास प्रशासन और शासन का लंबा अनुभव है. हालांकि, 2026 में सपा ने अभी तक उन्हें उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. यही नहीं उनका नाम राम गोपाल यादव के साथ ही फाइनल माना रहा था लेकिन सपा ने धनराज परिमल नथवानी पर दांव लगा दिया.
3. सलीम शेरवानी: मुस्लिम चेहरे की चर्चा
सलीम शेरवानी का नाम भी सपा के तीसरे उम्मीदवार की चर्चा में लगातार बना हुआ है. वह पांच बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं. सपा से उनके पुराने संबंध रहे हैं. राज्यसभा चुनाव से पहले उनके नाम की चर्चा इसलिए भी हुई क्योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने की खुद इच्छा जताई थी. मीडिया रिपोर्टों में उनका नाम संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है. ऐसे में अगर सपा किसी मुस्लिम चेहरे को मौका देती है तो शेरवानी का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है.
4. अरविंद सिंह गोप: संगठन का पुराना चेहरा
अरविंद सिंह गोप भी सपा के पुराने नेताओं में शामिल हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं. उनका नाम सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर चल रही चर्चाओं में सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सलीम शेरवानी और अरविंद सिंह गोप समेत कई नामों पर पार्टी के भीतर मंथन की बात सामने आई थी. गोप के पक्ष में उनका पुराना संगठनात्मक अनुभव और पार्टी से लंबा जुड़ाव देखा जा रहा है. लेकिन उनकी उम्मीदवारी को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
तीसरी सीट के लिए 37 वोट का गणित
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत बताई जा रही है. मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से सपा के पास दो उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है. सपा ने अब रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बना दिया है. तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे. यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार के नाम के साथ विधायकों के समर्थन का गणित भी अहम हो गया है.
अखिलेश के ‘सरप्राइज’ ने बढ़ाया सस्पेंस
तीसरे उम्मीदवार को लेकर अखिलेश यादव ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है. इससे पहले उन्होंने सपा विधायक दल की बैठक के बाद तीसरे उम्मीदवार को लेकर ‘सरप्राइज’ देने की बात कही थी. 30 सितंबर को रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी के नामांकन के बाद भी तीसरे नाम का ऐलान नहीं हुआ. ऐसे में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तीसरा उम्मीदवार कौन होगा, बल्कि यह भी है कि सपा उसके लिए जरूरी अतिरिक्त समर्थन कैसे जुटाएगी. फिलहाल सलीम शेरवानी, आलोक रंजन और अरविंद सिंह गोप के नाम अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आ चुके हैं. वहीं बृजभूषण शरण सिंह का नाम सामने आने से इस मुकाबले को लेकर चर्चा और बढ़ गई है. नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है और मतदान 16 अक्टूबर को होना है. तो अभी कुछ दिन इंतजार करें और देखें कौन आता है सपा की तरफ से तीसरा उम्मीदवार.