नई दिल्ली. देश में तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने के लिए नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने मंजूरी और सुरक्षा प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए हैं. अब एयरपोर्ट पर काम करने वाली कंपनियों को अलग-अलग कैटेगरी के लिए बार-बार सिक्योरिटी क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होगी. एक सिक्योरिटी क्लियरेंस 9 कैटेगरी के लिए मान्य होगी और इसकी वैधता 5 साल की होगी.
BCAS के DG राजेश निर्वाण ने कहा कि इन बदलावों का मकसद नियमों को ज्यादा आसान बनाना और मंजूरी की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम करना है. उनके मुताबिक, एक सिक्योरिटी क्लियरेंस सभी संबंधित कैटेगरी के लिए मान्य होगी और यह कैटेगरी तथा कॉन्ट्रैक्ट से अलग होगी. इसके लिए मंगलवार को BCAS के क्षेत्रीय कार्यालयों में ओपन हाउस भी शुरू किया गया है, ताकि आवेदकों की समस्याओं का सीधे समाधान हो सके.
9 कैटेगरी के लिए एक ही क्लियरेंस
अभी BCAS अलग-अलग श्रेणियों के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस जारी करता है. इनमें ऑथराइज्ड एजेंट, ग्राउंड हैंडलर, कैटरिंग, कन्सेशनायर, रेगुलेटेड एजेंट, ऑक्जिलरी सर्विस प्रोवाइडर, FBO, प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी और फ्यूल फार्म शामिल हैं. अब इन सभी के लिए एक ही सिक्योरिटी क्लियरेंस होगी. इसकी मंजूरी 5 साल तक वैध रहेगी. किसी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी सिर्फ इस आधार पर क्लियरेंस रोकने की व्यवस्था खत्म की जा रही है, बशर्ते मंजूरी के लिए आवेदन कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के दौरान किया गया हो.
सिक्योरिटी वेटिंग में भी समयसीमा
सिक्योरिटी वेटिंग के दौरान जरूरी स्पष्टीकरण एक साथ मांगे जाएंगे. आवेदनों की प्रक्रिया के लिए तय समयसीमा होगी और लंबित मामलों की निगरानी वरिष्ठ स्तर पर की जाएगी. इससे एयरपोर्ट पर निर्माण और दूसरी गतिविधियों से जुड़ी मंजूरियों में देरी कम करने का लक्ष्य है. फ्लोर प्लान की मंजूरी में BCAS अब मुख्य रूप से सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देगा. व्यावसायिक जगह का आवंटन, बैठने की व्यवस्था जैसे गैर-सुरक्षा मामलों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी. स्वीकृत क्षेत्र के भीतर व्यावसायिक गतिविधि बदलने की भी अनुमति दी जाएगी. यानी सुरक्षा से जुड़े नियम BCAS देखेगा, जबकि गैर-सुरक्षा से जुड़े व्यावसायिक फैसलों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को अधिक अधिकार मिलेगा.
70% से ज्यादा संस्थाओं को राहत
कुछ श्रेणियों के लिए सिक्योरिटी प्रोग्राम को सरल कर अंडरटेकिंग के रूप में स्वीकार किया जाएगा. इससे 70 फीसदी से ज्यादा संस्थाओं को फायदा होने की बात कही गई है. इसके लिए टेम्पलेट को भी आसान बनाया जा रहा है और प्रक्रिया को e-CAS प्लेटफॉर्म पर डिजिटल किया जाएगा. एयरोड्रोम एंट्री परमिट यानी AEP की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. फिंगरप्रिंट के लिए कार्यालय आने की मौजूदा व्यवस्था को हटाकर ऑनलाइन फेशियल बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा. BCAS के मुताबिक, देश के एयरपोर्ट पर हर साल करीब 15 लाख AEP जारी किए जाते हैं. इसके लिए नया पोर्टल अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद है.
e-CAS 2.0 पर आएंगी BCAS की सेवाएं
सिक्योरिटी क्लियरेंस, ऑडिट और ट्रेनिंग समेत BCAS की प्रमुख सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी है. इससे आवेदन की ट्रैकिंग, पेंडेंसी की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने का लक्ष्य है. नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि मंत्रालय विमानन क्षेत्र में कारोबारी सुगमता के लिए लगातार काम कर रहा है और समस्याओं का समाधान एक तय समयसीमा के भीतर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.
तेजी से बढ़ रहा भारतीय विमानन बाजार
भारत में साल 2014 में 74 एयरपोर्ट थे, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर 165 हो चुके हैं. वित्तवर्ष 2025-26 में करीब 42 करोड़ यात्रियों ने हवाई यात्रा की. साल 2035 तक देश में 2,250 से ज्यादा कॉमर्शियल विमानों के होने का अनुमान है और UDAN के तहत 679 रूट संचालित हो रहे हैं. ऐसे में BCAS का फोकस सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए मंजूरी की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और अनुपालन का बोझ कम करने पर है. मंत्रालय के मुताबिक, इन बदलावों से MRO, Flight Training Organisations और एयरपोर्ट से जुड़ी दूसरी संस्थाओं को भी सुविधा मिलेगी. इन सुधारों का लक्ष्य सुरक्षा में ढील देना नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े नियमों को ज्यादा स्पष्ट और समयबद्ध बनाते हुए एयरपोर्ट पर कारोबार की प्रक्रिया को आसान करना है.