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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) से भारत में दाखिल हुई 17 साल की नाबालिग लड़की को हिरासत में लिया है. लाम सेक्टर में रूटीन निगरानी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि नजर आई, जिसके बाद लड़की को रोक लिया गया. शुरुआती पूछताछ में उसने दावा किया कि वह गलती से LoC पार कर भारतीय सीमा में आ गई. सेना ने शुरुआती जांच के बाद उसे लोकल पुलिस को सौंप दिया है.
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) से भारत में दाखिल हुई 17 साल की नाबालिग लड़की को हिरासत में लिया गया है.
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) से भारत में दाखिल हुई 17 साल की एक नाबालिग लड़की को हिरासत में लिया है. लड़की को नौशेरा सेक्टर के लाम इलाके में सेना के जवानों ने रूटीन निगरानी के दौरान पकड़ा. शुरुआती पूछताछ में लड़की ने दावा किया कि वह अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय इलाके में आ गई. उसकी पहचान पीओजेके के खुइरेटा निवासी मोहम्मद अजीम की बेटी एस. अजीम के तौर पर हुई है.
अधिकारियों के मुताबिक, लाम सेक्टर में तैनात सेना के जवान नियमित निगरानी कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें एलओसी के पास संदिग्ध गतिविधि नजर आई. जवानों ने तुरंत लड़की को रोककर हिरासत में ले लिया. शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आगे की जांच के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है.
‘गलती से पार हुई LoC’
शुरुआती पूछताछ में इस लड़की ने सुरक्षा अधिकारियों को बताया कि उसका भारतीय क्षेत्र में आने का कोई इरादा नहीं था और वह गलती से LoC पार कर गई. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां उसके इस दावे की पुष्टि कर रही हैं. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वह किन परिस्थितियों में नियंत्रण रेखा तक पहुंची और सीमा पार करने की वास्तविक वजह क्या थी.
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. नाबालिग की पहचान और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारियों की भी जांच की जा रही है.
गलती से LoC पार करने वालों का क्या होता है?
जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा बेहद संवेदनशील इलाका है. इसके बावजूद कभी-कभी स्थानीय लोग रास्ता भटकने या अन्य परिस्थितियों के कारण अनजाने में LoC पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंच जाते हैं. ऐसे मामलों में सेना सबसे पहले व्यक्ति को सुरक्षित हिरासत में लेकर उसकी पहचान और परिस्थितियों की प्रारंभिक जांच करती है.
इसके बाद संबंधित व्यक्ति को स्थानीय पुलिस या अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सौंपा जाता है. जांच में अगर यह पुष्टि हो जाती है कि सीमा पार करना अनजाने में हुआ था और उसके पीछे कोई आपराधिक या सुरक्षा संबंधी मंशा नहीं थी, तो उसकी वापसी के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है.
ऐसे भेजा जाता है वापस
ऐसे मामलों में भारतीय और पाकिस्तानी पक्ष के बीच स्थापित सैन्य संपर्क व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है. जरूरत पड़ने पर हॉटलाइन या फ्लैग मीटिंग के जरिए पाकिस्तानी अधिकारियों को मामले की जानकारी दी जाती है. जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत LoC के किसी अधिकृत क्रॉसिंग पॉइंट से वापस भेजा जा सकता है. अतीत में पुंछ के चकन दा बाग और उरी के कमान अमन सेतु जैसे स्थानों के जरिए ऐसे मामलों में नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई है.
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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