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Pitru Paksh 2026: मिर्जापुर के रामगया घाट पर प्रभु श्री राम ने रावण वध के बाद अपने पिता दशरथ का पिंडदान किया था. आनंद रामायण में वर्णित है कि उन्होंने मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन-पूजन और रामेश्वर महादेव की स्थापना भी की. उसी काल के अंतर्गत उन्हें महसूस हुआ कि मेरे पिता का मृत्यु हो गया है और वो मृत्यु अकाल मृत्यु है, क्योंकि पुत्र के शोक से मृत्यु हुई. यहीं पर जब उन्हें ध्यान हुआ तो उन्होंने यहीं पर जो विन्ध्याचल का मंदिर है, उससे कुछ दूरी पर 5-700 मीटर की दूरी पर गंगा जी के किनारे, वहां पर उन्होंने अपने पिता के निमित्त एक शिला पर कर्म किया और उसी शिला पर आकर के दशरथ जी प्रेत स्वरूप बैठे.
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित रामगया घाट विश्व प्रसिद्ध है. ऐसी मान्यता है कि प्रभु श्री राम रावण का वध करने के बाद जब अयोध्या लौटे तो उन्होंने अपने पिता का पितृदान किया था. ऐसे में पिंडदान करने को लेकर वो मिर्जापुर जिले में भी आए हुए थे. मां विंध्यवासिनी मंदिर के पास स्थित रामगया घाट पर उन्होंने पिंडदान किया था, जिसके बाद इस घाट का नाम भी उन्हीं के नाम से पड़ गया.
भगवान श्री राम के विंध्यवासिनी धाम में आगमन के प्रमाण आनंद रामायण में मिलते हैं, जिसमें वर्णित है कि प्रभु श्री राम मां विंध्यवासिनी धाम में आए हुए थे. यहां पर उन्होंने पिंडदान किया. रामेश्वर महादेव की स्थापना की और मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन पूजन किया. मान्यता है कि यहां पर पिंडदान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं.
आनंद रामायण में मिलता है यहां पिंडदान का वर्णन
विंध्यधाम के विद्यवान आचार्य पं. अनुपम महाराज ने लोकल 18 से बताया कि रामगया घाट का वर्णन आनंद रामायण में वर्णित मिलेगा. आनंद रामायण के अनुसार स्पष्ट लिखा हुआ है कि भगवान राम जब वनवास गए थे तो उस वनवास के काल में विन्ध्याचल पर्वत पर भी आए हैं. यहां पर भी उन्होंने काफी समय व्यतीत किया है. उसी काल के अंतर्गत उन्हें महसूस हुआ कि मेरे पिता का मृत्यु हो गया है और वो मृत्यु अकाल मृत्यु है, क्योंकि पुत्र के शोक से मृत्यु हुई. यहीं पर जब उन्हें ध्यान हुआ तो उन्होंने यहीं पर जो विन्ध्याचल का मंदिर है, उससे कुछ दूरी पर 5-700 मीटर की दूरी पर गंगा जी के किनारे, वहां पर उन्होंने अपने पिता के निमित्त एक शिला पर कर्म किया और उसी शिला पर आकर के दशरथ जी प्रेत स्वरूप बैठे.
भगवान राम नें भी यहां किया पिंडदान
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि उनका सारा पितृ श्राद्ध किया, तर्पण किया, पिंडदान किया एवं उन्हें प्रेतत्व से मुक्ति देकर पितृ योनि में ले जाने का सारा कार्यक्रम यहीं पर सम्पन्न हुआ. राम जी के द्वारा स्थापित यहां पर रामेश्वरम मंदिर भी है, जिसका प्रमाण है कि राम भगवान ने यहां कर्म किया. आज भी प्रेत शिला मौजूद है, जिसपर राम भगवान ने अपने पिता का श्राद्ध कर्म किया है. राम जी का चरण पादुका भी वहां पर विराजमान है, वहां पर जो भी लोग श्राद्ध कर्म करते हैं, उनके घर से पितृदोष मुक्त हो जाता है. जिनके घर में संतान उत्पत्ति नहीं हो रही, कर्ज से बाधा बनी है, कर्जा बना है, यदि त्रिपिण्डी श्राद्ध कर दें तो घर का कलह, कर्ज सब मुक्त हो जाता है, वहां पर तर्पण, पितृ के लिए श्राद्ध कर्म बहुत उत्तम माना गया है. ऐसा पुराण में वर्णित है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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