नई दिल्ली: रोबोटिक सर्जरी के मामले में दिल्ली एनसीआर सबसे आगे है. दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा रोबोटिक सर्जरी हो रही है, क्योंकि मरीज भी अब रोबोटिक सर्जरी की ही मांग कर रहे हैं. इसकी वजह यह है कि रोबोटिक सर्जरी में बहुत बड़ा चीरा लगाना नहीं पड़ता है. ब्लड लॉस कम होता है. मरीज जल्दी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो जाता है. दर्द भी कम होता है. कोई भी लंबा निशान ऑपरेशन का इसमें नहीं पड़ता है. यही वजह है कि अब रोबोटिक सर्जरी की ही मांग अस्पतालों में बढ़ने लगी है.
यह जानकारी दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दी. नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में यूरोलॉजी, रोबोटिक और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के एचओडी और ऑर्गनाइज़िंग चेयरमैन (यूरोलॉजी), प्रो. डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि भारत अब रोबोटिक सर्जरी के मामले में एक अहम मोड़ पर है.
रोबोटिक सर्जरी की संख्या में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी. उन्होंने कहा कि भारत 2030 तक रोबोटिक सर्जरी में ग्लोबल लीडर बनने की राह पर है. रोबोटिक सर्जरी और इंस्टॉलेशन के मामले में दिल्ली एनसीआर देश में सबसे आगे है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेगनेंसी के जो डिलीवरी केस होते हैं उसमें अभी रोबोटिक सर्जरी को लेकर कुछ भी कह पाना थोड़ा मुश्किल है.
39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम हैं
इस दौरान मैक्स हॉस्पिटल में मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक और रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रमुख और सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी इंडिया के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विवेक बिंदल ने कहा कि दिल्ली एनसीआर के 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम हैं. जिनमें से 11 अस्पतालों में एक से ज़्यादा सिस्टम हैं. 2025 में रोबोटिक प्रोसीजर की संख्या लगभग पांच गुना बढ़कर 10,937 हो गई. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से रोबोटिक सर्जरी के लिए दुनिया के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है.
इसमें दिल्ली एनसीआर रोबोटिक-सिस्टम इंस्टॉलेशन और सर्जरी की संख्या दोनों ही मामलों में देश में सबसे आगे है. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोबोटिक-असिस्टेड प्रोसीजर में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है – 2021 में 2,257 से बढ़कर 2022 में 3,594, 2023 में 5,024, 2024 में 7,595 और 2025 में 10,937 हो गई. यानी चार सालों में लगभग पांच गुना बढ़ोतरी.
इन बीमारियों में रोबोटिक सर्जरी बेस्ट
डॉ. विवेक बिंदल ने कहा कि साल 2025 में दिल्ली एनसीआर में लगभग 33% रोबोटिक प्रोसीजर जनरल सर्जरी-बिनाइन (गैर-कैंसर वाले) प्रोसीजर थे. 30.2% यूरोलॉजी, 22.1% गायनेकोलॉजी और 10% जनरल सर्जरी-मैलिग्नेंट (कैंसर वाले) प्रोसीजर थे. इसके अलावा, सिर और गर्दन, छाती (थोरेसिक) और कार्डियक सर्जरी में भी रोबोटिक प्रोसीजर किए गए. उन्होंने कहा कि पूरे भारत में रोबोट की मदद से होने वाली सर्जरी की संख्या 2021 में 8,912 से बढ़कर 2025 में 44,857 हो गई है, जो देश भर में रोबोटिक सर्जरी को तेजी से अपनाए जाने को दिखाता है.
सफदरजंग अस्पताल में यूरोलॉजी, रोबोटिक्स और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रोफेसर और हेड, प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार ने बताया कि वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सर्जनों ने चीन के चेंगदू में लगभग 5,000 किलोमीटर दूर स्थित रोबोटिक कंसोल को दूर से ऑपरेट किया और रियल-टाइम सटीकता के साथ जटिल प्री-क्लिनिकल प्रक्रियाएं पूरी की. इस डेमो ने भौगोलिक बाधाओं को दूर करने में रोबोटिक टेलीसर्जरी की क्षमता को उजागर किया और टियर-2 और टियर-3 शहरों तक सुपर-स्पेशलिस्ट सर्जिकल विशेषज्ञता पहुंचाने की नींव रखी.