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राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है. चुनाव आयोग ने उनके दावे को भ्रामक बताया और बिहार एसआईआर से जुड़े पुराने आदेश का हवाला दिया. दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी. अब अदालत रिकॉर्ड देखकर यह जांचना चाहती है कि बदलाव किसने किए और उनका आधार क्या था.
राहुल गांधी ने निशाना साधा.
नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए. उन्होंने इसे बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए पद के कथित दुरुपयोग का एक और सबूत बताया. राहुल ने कहा कि लोकतंत्र पर इस कथित हमले में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा. फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है. इसलिए इसमें बदलाव का मामला सीधे नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ता है. यही वजह है कि इस विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है.
चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया भ्रामक
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक जारी किया. आयोग ने कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था. आयोग के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था. आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था. इसी आधार पर उसने राहुल के बयान को भ्रामक बताया. हालांकि, इसी घोषणा और संशोधित फॉर्म को लेकर अब अदालत की टिप्पणी ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह देखना चाहेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने किए. यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आई. अदालत ने निर्वाचन आयोग और केंद्र से जवाब भी मांगा. हालांकि, इस टिप्पणी को अपने आप में यह फैसला नहीं माना जा सकता कि बदलाव गैरकानूनी थे या इसके लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार था. इन सवालों पर रिकॉर्ड और जवाबों की जांच अहम होगी.
अब आगे क्या होगा?
इस मामले में तीन बातें अहम हैं. राहुल गांधी ने बदलावों की वैधता और मंशा पर सवाल उठाए हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि उसका बयान भ्रामक है और वह अपने आदेश का बचाव कर रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट करना चाहता है कि संशोधन किसने किया और उसे किस आधार पर लागू किया गया. यानी अभी मामला आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर दस्तावेजों की जांच के चरण में है. आने वाली सुनवाई में आयोग का जवाब और बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड अहम होंगे. फिलहाल, अदालत की टिप्पणी न तो राहुल गांधी के सभी आरोपों पर अंतिम मुहर है और न ही आयोग के पक्ष का अंतिम फैसला. असली तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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