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India PoK Violence: पीओके के ताजा हालातों को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए सवाल उठाया कि अगर पीओके वाकई भारत का अभिन्न हिस्सा है, तो फिर वहां हो रहे अत्याचारों पर सरकार खामोश क्यों बैठी है? पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वहां के लोगों पर हो रहे जुल्म और मौतों पर देश को तुरंत आवाज उठानी चाहिए.
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके में हो रही हिंसा को लेकर केंद्र आवाज उठाए.
श्रीनगर. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र सरकार से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हाल की घटनाओं पर आवाज उठाने को कहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर यह हमारा है तो हम चुप नहीं रह सकते. डॉ अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर भारत सरकार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को देश का अभिन्न अंग मानती है तो उसे वहां लोगों की हत्याओं और मुश्किलों के बारे में आवाज उठानी चाहिए.
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, बेरोजगारी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और हाल ही में सुरक्षा के नाम पर की गई सख्ती पर भी चिंता जताई. डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्थाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी बार-बार अपील की है कि वे दखल दें और पीओके के हालात पर ध्यान दें.
उन्होंने कहा, “मैंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया है कि वे वहां जाएं, हालात का जायजा लें और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें. मैंने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी अपील की है.” पीओके पर केंद्र के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर इस इलाके को भारत का अभिन्न अंग बताती है, लेकिन हत्याओं और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरों पर चुप रहती है. उन्होंने कहा, “वे कहते रहते हैं कि पीओके हमारा हिस्सा है. अगर यह आपका हिस्सा है तो आप वहां हो रही घटनाओं के बारे में बात क्यों नहीं करते? आप यह क्यों नहीं कहते कि हत्याएं बंद होनी चाहिए? मैंने उनकी तरफ से कोई बयान नहीं सुना है.”
छात्रों के नेतृत्व में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर एनसी अध्यक्ष ने कहा कि अगर अधिकारी छात्रों की मांगें पूरी नहीं करते हैं तो आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा, “अगर उनसे किए गए वादे पूरे नहीं किए जाते और इसके बजाय उन पर एफआईआर दर्ज की जाती है, उन्हें गिरफ्तार किया जाता है और परेशान किया जाता है, तो यह आंदोलन जारी रहेगा. छात्र जाग चुके हैं और, ईश्वर ने चाहा तो, वे इसे आगे बढ़ाएंगे.” डॉ. अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं में नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और कहा कि बेरोजगारी इस इलाके के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
एनसी विधायकों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के लिए 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई थी. जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे तो ऐसे में एनसी को अपने विरोध-प्रदर्शन की जगह बदलकर नई दिल्ली में पृथ्वीराज रोड करनी पड़ी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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