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Azamgarh News: मूर्तिकार अमरजीत सिंह पटेल ने बताया कि उनके इस कार्यशाला में स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और कोलकाता से आए हुए. कुछ पुनर्मंड कारीगरों के द्वारा यहां पर तरह-तरह की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं, लोग अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार जिस तरह की मूर्तियों की डिजाइन की डिमांड करते हैं. कहा कि उन्हें यह आइडिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से मिला था. इंस्टाग्राम पर डिजाइन देखने के बाद उन्होंने इसे साकार करने का निर्णय लिया. इस प्रतिमा को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 15 दिनों से अधिक का समय लगा.
आजमगढ़: नवरात्रि का पर्व नजदीक है जिसे लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं. इसी बीच आजमगढ़ में जगह-जगह पर लगने वाले दुर्गा पूजा के पंडालून को लेकर मूर्तियां बनाने का भी कमजोरों पर शुरू हो चुका है. वही आजमगढ़ जिले के रानी की सराय में एक मूर्तिकार के द्वारा एक ऐसी भव्य प्रतिमा तैयार की गई है. जो लोगों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बन रही है. इस मूर्ति की सबसे बड़ी खासियत है कि एक ही मूर्ति में भगवान शिव और पार्वती के रूपों को सजाया गया है. जो अपने आप में बेहद चमत्कारी और आकर्षक नजर आ रहा है.
बंगाल व स्थानीय कारीगर मिलके कर रहे ये काम
लोकल18 से बातचीत करते हुए मूर्तिकार अमरजीत सिंह पटेल ने बताया कि उनके इस कार्यशाला में स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और कोलकाता से आए हुए. कुछ पुनर्मंड कारीगरों के द्वारा यहां पर तरह-तरह की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं, लोग अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार जिस तरह की मूर्तियों की डिजाइन की डिमांड करते हैं. खूब बहू इस तरह से मूर्तियां तैयार कर दी जाती हैं. उन्होंने बताया कि इस बार की सबसे आकर्षक प्रतिमा जो लोगों के बीच में चर्चा का केंद्र बनी हुई है. उसमें एक ही शरीर में भोलेनाथ और माता पार्वती की प्रतिमा है. जिसमें एक ही शरीर के भीतर भगवान के दो अलग-अलग स्वरूपों के दिव्य दर्शन हो रहे हैं. अमरजीत सिंह पटेल ने बताया कि आजमगढ़ जिले में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसी अनोखी प्रतिमा पहली बार प्रदर्शित की जाएगी. स्थानीय कारीगरों के कठिन परिश्रम और लग्न की बदौलत खूबसूरत और बेहद अलग मूर्ति को तैयार किया गया है.
सोशल मीडिया प्लेटफार्म से आया आइडिया
उन्होंने इस खास प्रतिमा के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें यह आइडिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से मिला था. इंस्टाग्राम पर डिजाइन देखने के बाद उन्होंने इसे साकार करने का निर्णय लिया. इस प्रतिमा को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 15 दिनों से अधिक का समय लगा. वही वही इस मूर्ति को बनाने में लगभग ₹50000 का खर्च भी आया है. प्रतिमा निर्माण की सामग्री और प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मूर्ति को बनाने के लिए पारंपरिक तरीकों का ही इस्तेमाल किया गया है. सबसे पहले उबाल से प्रतिमा का ढांचा बनाने के बाद काली मिट्टी की पढ़ने चढ़ाई गई और अंत में बेहतरीन फिनिशिंग के लिए बालू मिट्टी का प्रयोग किया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद ही एक मूर्ति अपने अंतिम रूप में आती है.
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