Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

आसिम मुनीर ने अपने दाहिने हाथ को सौंपी आर्म् ड फोर्सेज की चाबी


India-Pakistan News: भारत से पिटने के बाद पाकिस्‍तान के आर्म्‍ड फोर्सेज में लगातार बदलाव किया जा रहा है. इन बदलावों से आर्मी चीफ आसिम मुनीर का दबदबा बढ़ रहा है. आर्मी के समक्ष तकरीबन समर्पण कर चुके प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने पहले आसिम मुनीर को फील्‍ड मार्शल बनाया. उसके बाद मुनीर पाकिस्‍तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बन गए और अब मुनीर अपने मनमर्जी से प्रमुख पदों पर नियुक्तियां कर रहे हैं, ताकि आर्मी के साथ ही नेवी और एयरफोर्स पर पकड़ को मजबूत किया जा सके. आसिम मुनीर ने अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम नेशनल स्‍ट्रैटजिक फोर्स के कमांडर को नियुक्‍त किया है जो ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए जिम्‍मेदार होगा. इनका नाम जनरल सैय्यद आमिर रजा है. जनरल आमिर रजा पाकिस्‍तान के स्‍ट्रैटजिक फोर्स के ऑपरेशन के लिए जिम्‍मेदार होंगे. इस बात की पूरी संभावना है कि भार‍त विरोधी रुख के लिए कुख्‍यात आसिम मुनीर के नए मातहत जनरल आमिर रजा फील्‍ड मार्शल की नीतियों को आगे बढ़ाएंगे, ऐसे में जनरल रजा पर नई दिल्‍ली की पैनी नजर होगी.

दरअसल, पाकिस्तान की सैन्य कमान व्यवस्था में हाल के संवैधानिक और कानूनी बदलावों के बाद काफी चेंजेज किए जा रहे हैं. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हाथों में पाकिस्‍तान की सैन्य सत्ता के साथ अब रणनीतिक बलों की ऑपरेशनल कमान के लिए एक नया पद बनाया गया है. लेफ्टिनेंट जनरल से 4 सितारा जनरल बने सैयद आमीर रजा को कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (CNSC) नियुक्त किया गया है. यह पद पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े रणनीतिक कमांड को एक साझा ऑपरेशनल ढांचे के तहत लाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. रजा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में सर्वोच्च सैन्य अधिकार प्राप्त हुआ है. हालांकि, पाकिस्तान की परमाणु नीति और रणनीतिक हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम अधिकार अब भी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास है. नई व्यवस्था रणनीतिक क्षमताओं के ऑपरेशन और समन्वय में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की भूमिका को अधिक स्पष्ट और केंद्रीकृत करती है.

27वें संविधान संशोधन के बाद बदली सैन्य व्यवस्था

पाकिस्तान में पिछले साल नवंबर में लागू हुए 27वें संविधान संशोधन ने सैन्य कमान की इस नई व्यवस्था की नींव रखी. इसी बदलाव के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद स्थापित किया गया और आसिम मुनीर पाकिस्तान के पहले CDF बने. इस व्यवस्था ने उन्हें तीनों सेनाओं के ऊपर एक व्यापक सैन्य भूमिका प्रदान की है. इसी पुनर्गठन के तहत कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का पद बनाया गया. आर्मी एक्ट के तहत इस पद पर प्रधानमंत्री नियुक्ति करते हैं, लेकिन इसके लिए CDF की सिफारिश जरूरी होती है. CNSC का कार्यकाल तीन साल निर्धारित किया गया है. नई व्यवस्था में सेना, नौसेना और वायुसेना की रणनीतिक कमान से संबंधित ऑपरेशनल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय की जिम्मेदारी CNSC को दी गई है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम फैसला CNSC करेगा. परमाणु नीति और रणनीतिक हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अंतिम फैसले का अधिकार औपचारिक रूप से नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास ही रहेगा.

कौन हैं जनरल सैय्यद आमिर रजा?

आमिर रजा पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में लंबे समय से महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. उन्हें 1988 में 6th Lancers में कमीशन मिला था. उनके सैन्य करियर में बख्तरबंद इकाइयों की कमान से लेकर पैदल सेना और रणनीतिक संगठन से जुड़े विभिन्न दायित्व शामिल रहे हैं. रजा एक आर्मर्ड रेजिमेंट, आर्मर्ड ब्रिगेड और दक्षिण वजीरिस्तान में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं. इसके अलावा वह एक इन्फैंट्री डिवीजन और लाहौर स्थित IV Corps के कमांडर भी रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान के डिफेंस प्रोडक्‍शन क्षेत्र की महत्वपूर्ण संस्था हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला का नेतृत्व किया. जनरल रजा हथियारों से जुड़े महानिदेशालय में भी काम किया. वह II Corps में चीफ ऑफ स्टाफ की भूमिका निभा चुके हैं. हाल के वर्षों में उनका एक अहम दायित्व सैन्य संगठन में बदलावों को लागू करना रहा है. 27वें संविधान संशोधन के बाद सैन्य ढांचे में बदलाव और पिछले साल भारत के साथ संघर्ष के बाद पाकिस्तान सेना में किए गए संगठनात्मक पुनर्गठन में भी उनकी भूमिका रही है. रजा का नाम पाकिस्तान के आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना से भी जुड़ा है. यही वजह है कि रणनीतिक बलों की नई कमान में उनकी नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा है.

जनरल रजा का प्रामोशन अहम क्‍यों

जनरल आमिर रजा का प्रमोशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लेफ्टिनेंट जनरल रहते हुए वह वरिष्ठता सूची में काफी नीचे थे. रिपोर्टों के अनुसार, 4 सितारा जनरल बनाए जाने और CNSC की जिम्मेदारी दिए जाने के समय वह लेफ्टिनेंट जनरलों की वरिष्ठता सूची में आठवें स्थान पर थे. उनकी पदोन्नति से कई वरिष्ठ अधिकारी पीछे हो गए. इनमें लेफ्टिनेंट जनरल इनाम हैदर मलिक, फैयाज हुसैन शाह, नौमान जकारिया, मुहम्मद जफर इकबाल, अहसन गुलरेज और शाहिद इम्तियाज जैसे नाम शामिल हैं. लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के महानिदेशक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर बने हुए हैं और उनके कार्यकाल को बढ़ाया गया है. इस तरह पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण शक्तियां चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों के इर्द-गिर्द केंद्रित दिखाई दे रही हैं.

पाकिस्‍तान आर्म्‍ड फोर्सेज में इस बदलाव को आसिम मुनीर के बढ़ते रसूख के तौर पर देखा जा रहा है. आसिम मुनीर भारत विरोधी रुख के लिए कुख्‍यात हैं.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव

भारत के लिए इस सैन्‍य पुनर्गठन का सबसे अहम पहलू पाकिस्तान की रणनीतिक कमान में होने वाला बदलाव है. भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों और मिसाइल क्षमताओं के कारण दोनों देशों की सैन्य कमान संरचना का सीधा रणनीतिक महत्व है. जनरल रजा को तीनों सेनाओं की रणनीतिक कमानों के कॉमन ऑपरेशनल स्‍ट्रक्‍चर की जिम्मेदारी मिलना भारत के लिए उनकी गतिविधियों और अधिकार क्षेत्र पर नजर रखने की जरूरत बढ़ाता है. विशेष रूप से पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं, रॉकेट फोर्स, रणनीतिक हथियार प्रणालियों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों से जुड़े घटनाक्रमों पर भारत की निगाह रहेगी. जनरल रजा का आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना से जुड़ा होना भी भारत के लिए महत्वपूर्ण संकेत है. पाकिस्तान जिस तरह अपने रॉकेट और मिसाइल बलों को अधिक संगठित और संयुक्त कमान के तहत ला रहा है, उससे उसकी रणनीतिक और पारंपरिक लंबी दूरी की मारक क्षमताओं के इस्तेमाल की योजना में बदलाव की संभावना का आकलन करना जरूरी होगा. इसके अलावा यह नियुक्ति भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है. ऐसे में पाकिस्तान की निर्णय लेने वाली सैन्य श्रृंखला में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर दोनों देशों की सैन्य रणनीति के आकलन पर पड़ सकता है.

परमाणु बम का बटन किसके पास

हालांकि, CNSC की भूमिका को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके पास पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम अधिकार नहीं है. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी औपचारिक रूप से परमाणु नीति और रणनीतिक हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े निर्णयों के लिए सर्वोच्च संस्था बनी हुई है. इसलिए जनल रजा को पाकिस्तान का ‘परमाणु कमांडर’ कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. उनकी भूमिका मुख्य रूप से रणनीतिक बलों के ऑपरेशनल कंट्रोल और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़ी है. फिर भी नए स्‍ट्रक्‍चर में उनका स्थान बेहद संवेदनशील है, क्योंकि वह उस कमान श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं जो पाकिस्तान की रणनीतिक क्षमताओं को सैन्य स्तर पर संचालित करती है.

आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत

जनरल रजा की नियुक्ति को आसिम मुनीर की बढ़ती सैन्य शक्ति से अलग करके नहीं देखा जा सकता. पाकिस्तान के नए सैन्य ढांचे में CDF के तौर पर मुनीर शीर्ष पर हैं, जबकि CNSC उनके नीचे रणनीतिक बलों के ऑपरेशनल स्‍ट्रक्‍चर को संभालने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनता है. इससे पाकिस्तान की कमान संरचना में एक तरफ शीर्ष स्तर पर अधिकारों का केंद्रीकरण हुआ है तो दूसरी तरफ रणनीतिक बलों के लिए अलग और स्पष्ट ऑपरेशनल लीडरशिप नेतृत्व तैयार किया गया है. इसका व्यावहारिक असर आने वाले समय में पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायुसेना के रणनीतिक संसाधनों के बीच समन्वय पर पड़ सकता है. खास तौर पर मिसाइल बलों, रणनीतिक हथियार प्रणालियों और संयुक्त सैन्य योजना से जुड़े मामलों में CNSC की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top