Last Updated:
सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जा रहे इस मंदिर में बाबा जनवारी नाथ जी को प्रसाद के रूप में लड्डू, बर्फी और पेड़ा चढ़ता है. अगर आप भी इस अद्भुत मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर से लगभग 22 किमी दूर लंभुआ रोड पर आना होगा. लंभुआ बाजार से दाहिने तरफ ब्लाक रोड पर मंदिर के लिए रास्ता गया हुआ है. आपको बता दें कि यह मंदिर सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है. अगर कोई श्रद्धालु बहुत दूर से आता है तो वह मंदिर के हाल में 1-2 दिन तक रुक भी सकता है.
स्थानीय निवासी बद्री विशाल तिवारी लोकल 18 से बताते हैं कि सुल्तानपुर के इसौली गांव में स्थित शिव मंदिर के बारे में जहां जो 20 फीट ऊंचे टीले पर स्थित है और यह 200 वर्षों से अधिक पुराना है. यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है.यहां पर शिवरात्रि के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है.
देवरहर गांव स्थित महेश नाथ धाम को लेकर ऐतिहासिक मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल में भुरुचों का कबीला हुआ करता था जहां पर भुरुच अपने साथियों के साथ निवास करते थे. यह सुल्तानपुर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है.
सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जा रहे इस मंदिर में बाबा जनवारी नाथ जी को प्रसाद के रूप में लड्डू, बर्फी और पेड़ा चढ़ता है. अगर आप भी इस अद्भुत मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर से लगभग 22 किमी दूर लंभुआ रोड पर आना होगा. लंभुआ बाजार से दाहिने तरफ ब्लाक रोड पर मंदिर के लिए रास्ता गया हुआ है. आपको बता दें कि यह मंदिर सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है. अगर कोई श्रद्धालु बहुत दूर से आता है तो वह मंदिर के हाल में 1-2 दिन तक रुक भी सकता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
सुल्तानपुर शहर के बीचों-बीच एक शिव मंदिर स्थित है. इस शिव मंदिर के पीछे मान्यता यह है कि यहां कोई भी आदमी दर्शन करने के लिए आता है और जल चढ़ाता है तो उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यह रामलीला मैदान में सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है.
सुल्तानपुर शहर से कुड़वार रोड पर लगभग 40 किलोमीटर दूर इसौली ग्राम सभा में यह मंदिर स्थित है.अगर हम इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो यह 150 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर है जिसकी स्थापना हनुमंत राय श्रीवास्तव द्वारा करवाई गई थी. यह मंदिर जिले की भव्यता को दर्शाता है और सुल्तानपुर के धार्मिक धरोहरों को संजो कर रखे हुए है.आपको बता दें कि इस मंदिर का निर्माण लखौरी ईंटों से किया गया है.
सुल्तानपुर अयोध्या रोड पर सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर इछूरी पर्यटक स्थल में जैसे ही प्रवेश किया जाता है प्रवेश द्वार पर ही एक भव्य मंदिर बनाया गया है जिसमें भगवान भोलेनाथ की लगभग 6 फीट की प्रतिमा स्थापित की गई है. यहां भी लोगों द्वारा जलाभिषेक किया जा सकता है.
लगभग 20 फिट ऊंचे टीले पर स्थित इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि को भव्य भंडारे आदि का कार्यक्रम होता है.तथा प्रत्येक तीसरे वर्ष मलमास में एक महीने लगातार कथा होती है और टिकरी से यहां तक भव्य शिवबारात निकाली जाती है. जिसमें 15 हजार से भी अधिक लोग शामिल होते हैं. इस शिव बारात में हाथी घोड़े नंदी बैल आदि शामिल होते हैं.
मंदिर के पुजारी आचार्य प्रशांत उपाध्याय ने बताया कि महेश नाथ धाम में भगवान भोलेनाथ स्वयं उत्पन्न हुए थे और उनकी मूर्ति भी मिली है. जिसको लेकर मान्यता है कि बाबा महेश नाथ अत्यंत क्रोधी है लेकिन उनके क्रोध के साथ-साथ इनके सहनशील और दयालु होने का भी लोगों में विश्वास है. इस धाम में जो भी व्यक्ति आता है उसकी मनोकामनाएं जरूर पूर्ण होती हैं. इन सभी स्थलों पर सावन में श्रद्धालु जल चढ़ाते हैं.