Agency:एजेंसियां
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2019 की जामिया हिंसा और 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित हेट स्पीच के आरोपों में बीजेपी नेताओं कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. इससे पहले मार्च 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने भी कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया था. हालांकि, शिकायतकर्ता को निजी शिकायत के तौर पर अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की अनुमति दी गई थी.
कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा पर FIR की मांग खारिज, जामिया हिंसा और दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली HC का फैसला
दिल्ली दंगा से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि नेताओं के बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. दिल्ली पुलिस ने इस मांग का विरोध किया था.
यह घटनाक्रम इसी साल मार्च में दिल्ली की एक अदालत द्वारा 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार करने के कुछ महीनों बाद सामने आया है. उस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी. यह शिकायत उस समय दयालपुर थाने के एसएचओ रहे कपिल मिश्रा, बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट और बीजेपी के पूर्व विधायकों जगदीश प्रधान और सतपाल सांसद के खिलाफ थी.
हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता के आरोपों का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस आवेदन को निजी शिकायत के तौर पर माना जाए और शिकायतकर्ता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की अनुमति दी. इसके बाद मामले को शिकायतकर्ता के बयान और साक्ष्य दर्ज करने के लिए सूचीबद्ध किया गया.
दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करने की मांग का विरोध किया था. पुलिस का कहना था कि दंगों के मामले में कपिल मिश्रा को झूठा फंसाने की कोशिश की गई है. इसी मामले से जुड़ी कानूनी कार्रवाई में इससे पहले भी एक अहम घटनाक्रम सामने आ चुका है.
नवंबर 2025 में एक सत्र अदालत ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें FIR संख्या 59/2020 के मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ आगे की जांच का निर्देश दिया गया था. विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने 10 नवंबर 2025 के अपने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट ने ऐसे मामले में BNSS की धारा 175(3) का इस्तेमाल कर अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर आदेश दिया था, जो पहले से ही एक विशेष अदालत के सामने लंबित था.
अदालत ने मजिस्ट्रेट के रुख को गलत तरीके से सिद्धांत गढ़ने वाला बताया और आगे की जांच का निर्देश देने वाले आदेश को अवैध, अनुचित और कानून की नजर में टिकाऊ नहीं माना. रिविजनल कोर्ट ने कहा कि जब अंतिम रिपोर्ट दाखिल हो चुकी थी और बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने उसका संज्ञान ले लिया था, तब मजिस्ट्रेट BNSS की धारा 175(3) का इस्तेमाल नहीं कर सकता था. यह धारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के अनुरूप है.
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