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क् या आप जान पाएंगे अपनी दवा का सच ड्रग कंट्रोल कमेटी ने लिया ऐसा बड़ा फैसला बढ़ सकती है आपकी चिंता…


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क्‍या जान पाएंगे दवा का सच? DCC ने लिया ऐसा फैसला, बढ़ सकती है आपकी चिंता!

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दवाओं की क्वालिटी टेस्टिंग से जुड़ी बैच टेस्ट रिपोर्ट को आम लोगों के लिए पब्लिक करने के प्रस्ताव को ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी ने मंजूरी नहीं दी है. 18 सितंबर को हुई डीसीसी की 70वीं मीटिंग में फार्मास्युटिकल कंपनियों की बैच टेस्ट रिपोर्ट और सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस को पब्लिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने का प्रस्ताव रखा गया था. आखिर यह प्रस्ताव क्या था, बैच टेस्ट रिपोर्ट क्या होती है और डीसीसी ने इसे मंजूरी क्यों नहीं दी? समझे पूरा मामला.

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दवाओं की क्वालिटी टेस्टिंग से जुड़ी बैच टेस्ट रिपोर्ट में डीसीसी ने बढ़ा फैसला लिया है. (एआई इमेज)

दवाओं की क्वालिटी को लेकर आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि बाजार में बिक रही किसी मेडिसिन की जांच आखिर कैसे होती है? क्या किसी दवा के बैच की टेस्ट रिपोर्ट आम लोग भी देख सकते हैं? और अगर किसी मेडिसिन की क्वालिटी टेस्ट हुई है, तो उसकी पूरी जानकारी पब्लिक क्यों नहीं होती? इन्हीं सवालों से जुड़ा एक प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (डीसीसी) के सामने आया था. इसमें फार्मास्युटिकल कंपनियों की दवाओं के बैच की क्वालिटी टेस्टिंग से जुड़ी रिपोर्ट्स को एक पब्लिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. लेकिन, डीसीसी ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया. यह फैसला डीसीसी की 70वीं मीटिंग के मिनट्स में दर्ज है. यह मीटिंग 18 सितंबर को हुई थी.

क्या प्रस्ताव रखा गया था?
डीसीसी के सामने दवाओं के क्वालिटी कंट्रोल और टेस्टिंग से जुड़ी रिपोर्ट्स को पब्लिक करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया था. प्रस्ताव में फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स को अपनी दवाओं के हर बैच की टेस्ट रिपोर्ट या सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस (सीओए) को एक पब्लिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना अनिवार्य किया जाना था. यानी अगर कोई कंपनी किसी खास बैच में मेडिसिन बनाती है, तो उस बैच की क्वालिटी टेस्टिंग के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को एक ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्‍ध कराया जाता, जिसे आम लोग भी देख सकते.

बैच टेस्ट रिपोर्ट क्या होती है?
जब कोई फार्मास्युटिकल कंपनी किसी मेडिसिन का बैच तैयार करती है, तो उस बैच की क्वालिटी की जांच की जाती है. टेस्टिंग के बाद कंपनी एक डॉक्यूमेंट तैयार करती है, जिसे सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस (सीओए) कहा जाता है. इस डॉक्यूमेंट में यह बताया जाता है कि उस बैच को तय किए गए क्वालिटी टेस्ट में जांचा गया है और उसके टेस्ट रिजल्ट क्‍या थे.

रिपोर्ट को पब्लिक करने की क्यों महसूस हुई जरूरत?
इस प्रस्ताव का मकसद दवाओं की क्वालिटी से जुड़ी जानकारी को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना था. अगर किसी मेडिसिन की बैच टेस्ट रिपोर्ट पब्लिक होती, तो थ्योरिटिकली कंज्यूमर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और दूसरे लोग यह देख सकते थे कि किसी खास बैच की क्वालिटी टेस्टिंग में रिजल्ट कैसे थे. इससे मेडिसिन की क्वालिटी को लेकर ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने की उम्मीद की जा सकती थी. लेकिन डीसीसी के सामने सवाल सिर्फ ट्रांसपेरेंसी का नहीं था. कमेटी को यह भी देखना था कि ड्रग क्वालिटी की निगरानी किस तरीके से और किस रेग्युलेटरी मैकेनिज्म के तहत होनी चाहिए.

डीसीसी ने क्या फैसला लिया?
डीसीसी ने मैन्युफैक्चरर्स की बैच टेस्ट रिपोर्ट्स या सर्टिफिकेट्स ऑफ एनालिसिस को पब्लिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के प्रस्ताव को खारिज कर‍ दिया है. आपको बता दें कि ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी यानी डीसीसी एक ऐसा रेग्युलेटरी एडवाइजरी बॉडी है, जिसमें सेंटर और स्टेट के ड्रग रेगुलेटर्स शामिल होते हैं. दवाओं से जुड़े रेग्युलेटरी मामलों में सेंटर और राज्यों के बीच कोऑर्डिनेशन और कंसल्टेशन के लिए यह कमेटी अहम भूमिका निभाती है.

About the Author

अनूप कुमार मिश्रAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…

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