भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत के बीच बाहरी ताकतों की भूमिका को लेकर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत अब आर्थिक शक्ति के तौर पर तेजी से उभर रहा है और देश की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता से हथियार लॉबी की चिंताएं बढ़ सकती हैं.
हरिवंश ने सवाल उठाया कि आखिर 2014 से पहले भारत अपनी जरूरत के लगभग सभी प्रमुख हथियार विदेशों से क्यों खरीदता था? उनके मुताबिक, अब भारत खुद हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यही बदलाव उन ताकतों को असहज कर सकता है, जिनके आर्थिक हित भारत के रक्षा आयात से जुड़े रहे हैं.
चीन के ‘घेराव’ को लेकर किया अलर्ट
इस इलाके में चीन की गतिविधियों का ज़िक्र करते हुए राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि चीन आठ से दस डीप-वॉटर पोर्ट बना रहा है. उन्होंने इसे श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के जरिये भारत को असल में घेरने की कोशिश बताया. उन्होंने दिल्ली में उठ रहे ‘नेपाल के बाद अब भारत’ जैसे नारों का हवाला देते हुए पूछा कि ऐसे घटनाक्रमों को बाहरी ताकतों के प्रभाव से जोड़कर क्यों न देखा जाए.
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिवंश ने सवाल किया, ‘चीन 8-10 इंटरनेशनल गहरे पानी वाले बंदरगाह बना रहा है, जिससे वह असल में भारत को चारों तरफ से घेर रहा है – इसमें श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल शामिल हैं. वहीं दिल्ली में ‘नेपाल के बाद अब भारत’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं… ऐसे में, मैं यह कैसे न मानूं कि इन मामलों में बाहरी ताकतों का असर है?’
हरिवंश का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. लड़ाकू विमानों से लेकर मिसाइल, युद्धपोत और दूसरे सैन्य उपकरणों तक देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश हो रही है. ऐसे में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को उन्होंने भारत के आर्थिक और रणनीतिक उभार से जोड़कर देखा.
संसद में टकराव पर भी बोले हरिवंश
हरिवंश ने इस बातचीत में संसद के कामकाज को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जारी गतिरोध पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की बात कही थी.
उन्होंने कहा कि सरकार का विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है और चुनाव में सरकार को हराना भी विपक्ष की जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन संसद को चलने देना भी उतना ही जरूरी है. उनके मुताबिक, जनता ने सरकार को पांच साल के लिए जनादेश दिया है और उसे अपना काम करने का अवसर मिलना चाहिए.
दरअसल, संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला. इस दौरान विपक्ष की विभिन्न मांगों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामा और स्थगन देखने को मिला. दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही. सरकार की ओर से बहस के लिए तैयार होने की बात कही गई, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी.
ऐसे माहौल में हरिवंश की टिप्पणी सिर्फ संसद की कार्यवाही तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, रक्षा आत्मनिर्भरता और पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती गतिविधियों को एक बड़े रणनीतिक परिदृश्य से जोड़ दिया.