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Chevron Business in India : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी शेवरॉन के सीईओ को जमकर फटकार लगाई और तत्काल कीमतें घटाने के लिए कहा है. इससे कंपनी की चर्चा दुनियाभर में होने लगी है और भारत में भी लोगों के मन में इस कंपनी को जानने की जिज्ञासा पैदा हो रही है. आखिर इसका भारत से क्या नाता है और यहां क्या कारोबार करती है.
अमेरिकी कंपनी शेवरॉन ने भारत में करीब 10 हजार करोड़ का निवेश किया है.
नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एनर्जी सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार शेवरॉन के सीईओ को जमकर फटकार लगाई है. ट्रंप ने कंपनी के चेयरमैन और सीईओ माइक वर्थ को फटकार लगाते हुए कहा है तेल की खुदरा कीमतों को तत्काल घटाया जाए. ट्रंप की इस फटकार के बाद शेवरॉन की चर्चा दुनियाभर में हो रही है. अब आपके भी मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ये कंपनी भारत में क्या काम करती है. इसका कितना बड़ा कारोबार है और कितना निवेश अभी तक किया है.
अमेरिकी कंपनी शेवरॉन (Chevron) को दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में गिना जाता है. यह पेट्रोलियम उत्पादन से लेकर लुब्रीकेंट सहित तमाम एनर्जी सेक्टर में काम करती है. इसका मार्केट कैप करीब 400 अरब डॉलर (करीब 40 लाख करोड़ रुपये) के आसपास है. इसका कारोबार सिर्फ अमेरिका ही नहीं एशिया, यूरोप और अफ्रीका के भी तमाम देशों में फैला हुआ है. इसे मार्केट कैप के हिसाब से देखें तो दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में यह 38वें पायदान पर आती है. शेवरॉन ने भारत में भी अपना कारोबार फैलाने पर जोर दिया है.
भारत में भी पांव पसार रही कंपनी
शेवरॉन ने भारतीय बाजार में भी कदम रखा है, लेकिन इसका जोर पेट्रोलियम उत्पादन से ज्यादा अन्य कारोबार पर है. अक्टूबर, 2023 में शेवरॉन की सब्सिडियरी कंपनी शेवरॉन ब्रांड इंटरनेशनल ने भारतीय तेल उत्पादक कंपनी एचपीसीएल के साथ समझौता किया था. दोनों कंपनियों ने मिलकर लुब्रीकेंट सेक्टर के लिए लाइसेंस, उत्पादन, वितरण और मार्केटिंग का काम शुरू किया था. इसके लिए दोनों कंपनियों ने कालटेक्स (Caltex) नाम से ब्रांड शुरू किया है. इसके अलावा शेवरॉन ने Havoline और Delo ब्रांड वाले लुब्रीकेंट को भी भारत में बेचना शुरू किया है.
बैंगलुरु में किया है 1 अरब डॉलर का निवेश
शेवरॉन ने भारत में तेल उत्पादन के बजाय इंजीनियरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, लुब्रीकेंट और रिसर्च पर ज्यादा जोर दिया है. कंपनी ने बैंगलुरु में शेवरॉन इंजीनियरिंग एंड इनोवेशन एक्सीलेंस सेंटर (ENGINE) स्थापित किया है, जिसके लिए 1 अरब डॉलर (करीब 9,500 करोड़ रुपये) का निवेश किया गया है. इस निवेश के जरिये कंपनी अपने लुब्रीकेंट कारोबार को बढ़ावा दे रही है. कंपनी ने अपने निवेश का इस्तेमाल एआई, रोबोटिक्स, डिजिटल ट्विन पर किया है, जिसके लिए 1,000 पेशेवरों को भी नियुक्त किया है.
भारतीय कंपनियों को तकनीकी मदद
शेवरॉन की सब्सिडियरी कंपनी शेवरॉन ओरोनाइट ने भारतीय एडिटिव्स लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है. यह कंपनी लुब्रीकेंट और एडिटिव्स बनाती और बेचती है. इसके अलावा शेवरॉन ने भारतीय रिफाइनरियों को ईंधन के उध्तपादन और बेस ऑयल की तकनीक भी उपलब्ध कराती है. जहां तक निवेश की बात है तो शेवरॉन ने अभी तक करीब 10 हजार करोड़ का ही निवेश किया है, लेकिन उसका फोकस भारतीय बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने पर है.
सरकार की योजना से बढ़ सकता है दायरा
शेवरॉन अभी तक भारत के तेल उत्पादन के सेक्टर में कोई काम नहीं करती है, लेकिन सरकार ने पिछले दिनों समुद्री तेल निकालने और खोज को बढ़ावा देने का ऐलान किया है. सरकार की इस योजना से शेवरॉन के लिए आने वाले समय में भारतीय बाजार में ओर मौके बढ़ सकते हैं. शेवरॉन को तेल खोजने की तकनीक के क्षेत्र में बड़ा अनुभव है, जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को भी मिलेगा. वैसे भी यह कंपनी भारत में तेल उत्पादन के बजाय उसे तकनीकी सपोर्ट देने में ज्यादा फोकस कर रही है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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