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दरवाजे पर एक साथ दस् तक दे रही दो तबाही चक्रवात और अल नीनो का खतरा…


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दरवाजे पर दस्‍तक दे रही दो तबाही, अल-नीनो पहले से एक्टिव, अब चक्रवात का खतरा

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Aaj Ka Mausam: भारतीय संस्‍कृति में एक कहावत है कि मौसम की तरह रंग बदलते हो. इसका मतलब यह हुआ कि सामने वाले का मूड पल-पल बदलता रहता है, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. भारत में मौसम का मिजाज भी लगातार बदल रहा है. एक तरफ विनाशकारी चक्रवात की आशंका गहराने लगी है तो दूसरी तरफ अल नीनो पहले से ही अपने रंग में है. मौसम विज्ञानियों ने इसको लेकर गंभीर चिंता जताई है.

दरवाजे पर दस्‍तक दे रही दो तबाही, अल-नीनो पहले से एक्टिव, अब चक्रवात का खतराZoom

भारत के दरवाजे पर एक साथ दो तबाही दस्‍तक दे रही है. एक तरफ साइक्‍लोन का खतरा मंडराने लगा है तो दूसरी तरफ अल नीनो धीरे-धीरे ज्‍यादा प्रभावी हो रहा है. (फाइल फोटो)

Aaj Ka Mausam: भारत के विभिन्‍न हिस्‍सों में मौसम का तेवर लगातार बदल रहा है. दिल्‍ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में सूरज का तेवर थोड़ नरम हुआ है. वहीं, समंदर के गर्भ में पल रहा राक्षस लगातार सिर उठा रहा है. मौसम विज्ञानियों की मानें तो भारत पर इस समय दो मौसमी खतरा है – पहला अल-नीनो और दूसरा चक्रवात अर्नब (Arnab Cyclone). मौसम विज्ञानी पहले ही प्रशांत महासागर में अल-नीनो के ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने की चेतावनी दे चुके हैं. इससे सूखा और अकाल जैसे हालात बनने की आशंका बेहद प्रबल है. वहीं, बंगाल की खाड़ी में बना निम्‍न दबाव का क्षेत्र लगातार स्‍ट्रॉन्‍ग होता जा रहा है. यदि यह डीप डिप्रेशन में तब्‍दील होता है तो भारत के तटवर्ती राज्‍यों और उसकी सीमा से जुड़े अन्‍य प्रदेश ‘अर्नब चक्रवात’ की चपेट में आ सकते हैं. यह नाम बांग्‍लादेश की ओर से सुझाया गया है. हालांकि, अभी यह कहना जल्‍दबाजी है कि बंगाल की खाड़ी में मची हलचल चक्रवात का रूप धारण करेगी. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने लो प्रेशर एरिया के और मजबूत होने के चलते कई राज्‍यों में अधिकतम 75 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलने और बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है.

IMD के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में अगले 5 से 6 दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर अंडमान सागर में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अगले दो दिनों में और मजबूत होगा. इसके 21 सितंबर को डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में तब्दील होने की संभावना है. इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट के पास पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग ने इस सिस्टम के कारण दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में 23 और 24 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. दक्षिण छत्तीसगढ़ में भी 24 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में 22 से 24 सितंबर, दक्षिण ओडिशा में 22 से 25 सितंबर, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर तथा विदर्भ में 24 और 25 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.

तेजी से मजबूत हो रहा नया वेदर सिस्‍टम

IMD के अनुसार, उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से 19 सितंबर की शाम 5:30 बजे निम्न दबाव क्षेत्र बना था. 20 सितंबर सुबह 8:30 बजे यह पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर अंडमान सागर के ऊपर स्थित था. मौसम विभाग का अनुमान है कि यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे मजबूत होगा. 21 सितंबर को इसके डिप्रेशन में बदलने और 22 सितंबर को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन बनने की संभावना है. इसके बाद 23 सितंबर की सुबह तक इसके उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों के आसपास पहुंचने की संभावना जताई गई है. दक्षिण और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं.





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