Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

पहचान मिटाने वाले खुद मिट गए हजार साल बाद भी सीना ताने खड़ा है सोमनाथ मोदी ने बताया भारत की जीवटता का सच…


होमताजा खबरदेश

पहचान मिटाने वाले खुद मिट गए, हजार साल बाद भी सीना ताने खड़ा है सोमनाथ: PM

Last Updated:

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ भारत के स्वाभिमान और सांस्कृतिक अमरता का जयघोष करते हुए आक्रांताओं के इतिहास पर करारा प्रहार किया. पीएम मोदी ने कहा कि ठीक एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर भारत की अस्मिता को मिटाने का दुस्साहस किया था. आज वे हमलावर इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके हैं और उनका कोई वजूद बाकी नहीं है, जबकि सोमनाथ मंदिर सागर तट पर पूरी भव्यता के साथ देश को अमरता का आशीर्वाद दे रहा है.

पहचान मिटाने वाले खुद मिट गए, हजार साल बाद भी सीना ताने खड़ा है सोमनाथ: PMZoom

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान की गाथा याद दिलाई.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 138वें एपिसोड में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ पर बात की. पीएम मोदी ने कहा, “इस साल की शुरुआत ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ से की थी. आज से एक हजार साल पहले 1026 में मोहम्मद गजनी ने पहली बार सोमनाथ मंदिर को विध्वंस किया था. जो लोग सोमनाथ मंदिर को तोड़कर भारत की पहचान मिटाने आए थे, आज उनका कोई वजूद भी नहीं है. आज सोमनाथ मंदिर पूरी भव्यता के साथ, विशाल समुद्र के किनारे भारत को अमरता आशीर्वाद दे रहा है. इसलिए इस साल सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया.”

पीएम मोदी ने कहा, “1026 में जब गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्वंस किया गया था, उसी साल गुजरात के मोढेरा में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर हमला हुआ था. मंदिर को तोड़ा गया था. यानी मोढेरा मंदिर के विध्वंस को भी 1 हजार साल पूरे हो गए हैं. जब मोढेरा मंदिर तोड़ा गया, तब उसका निर्माण हुए सिर्फ एक साल हुआ था. 1025 में सूर्य मंदिर का निर्माण राजा भीमदेव ने कराया था. जब इतना बड़ा आक्रमण हुआ हो, सोमनाथ मंदिर जैसा आस्था का इतना बड़ा केंद्र खंडित किया गया हो और कई जगहों पर भी हमले हुए हों तो किसी भी समाज या शासन का मनोबल टूट सकता था. हालांकि, राजा भीमदेव प्रथम ने न केवल गजनी का मुकाबला किया बल्कि कुछ ही समय में मोढेरा सूर्यमंदिर का पुनर्निर्माण भी करवा दिया.”

प्रधानमंत्री ने कहा, “इसी जीवटता के कारण बार-बार विध्वंसता के बाद भी सोमनाथ मंदिर का निर्माण होता रहा. मोढेरा मंदिर पर बाद के कालखंड में हमले रुके नहीं. अलाउद्दीन खिलजी ने वास्तुकला के इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया था. भारत के लोग सूर्य की उपासना सिर्फ मंदिर और वास्तुकला से नहीं करते. हमारी सूर्य उपासना का अर्थ होता है कि प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरतंरता की प्रेरणा. इसलिए मोढेरा आज सिर्फ सूर्य मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि देश का प्रथम सूर्य ग्राम यानी सोलर विलेज बन चुका है.”

उन्होंने कहा, “मोढेरा आज पूरी तरह सौर्य ऊर्जा से चलता है. इस गांव ने देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है. मोढेरा में पर्यटकों के लिए कई सुविधाओं की शुरुआत भी हुई है. जनवरी में मकर संक्रांति के बाद मोढेरा नृत्य महोत्सव का आयोजन होता है. इसमें भारत के सांस्कृतिक और शास्तीय नृत्य की प्रस्तुति होती है. मेरी अपील है कि सभी लोग मोढेरा अवश्य जाएं.”

About the Author

राकेश रंजन कुमार

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top