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फर्जी फॉर्म भरकर वोटर लिस्ट से नाम कटवाने वालों पर दर्ज होगा केस कर्नाटक सीईओ का फरमान…


बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक में मतदाता सूची से लोगों के नाम कटवाने की कोशिशों को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बड़े पैमाने पर फॉर्म 7 जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी अंबुकुमार ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और 224 विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ को आदेश जारी किए हैं. आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची में जानबूझकर गलत जानकारी देने या झूठी आपत्तियां दर्ज कराने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. यह कदम तब उठाया गया है, जब राज्य में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर सियासी विवाद ने तूल पकड़ा है.

गुरुवार (01 अक्टूबर 2026) को ही, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने करीब 50 लाख वोटर्स के नाम अवैध तरीके से हटाने की साजिश का आरोप लगाया था. आयोग के इस फैसले के बाद अब गलत इरादे से फॉर्म भरने वालों पर एफआईआर दर्ज होगी.

फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने वालों पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी?

सीईओ कार्यालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि कई ईआरओ के पास बल्क में फॉर्म 7 जमा किए गए हैं. जांच पड़ताल के दौरान यह बात सामने आई कि इनमें से कई फॉर्म पूरी तरह से सही नहीं हैं. इस गंभीर मामले को देखते हुए आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को कानून के मुताबिक केस दर्ज करने का निर्देश दिया है. जो भी आवेदक जानबूझकर गलत बयान या लिखित घोषणा करेगा, उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत सख्त कार्रवाई होगी.

हालांकि इस कानूनी प्रक्रिया को शुरू करने से पहले निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 20 के तहत विस्तृत जांच की जाएगी. आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सख्त कार्रवाई सिर्फ फॉर्म 7 ही नहीं, बल्कि फॉर्म 6, 6ए और फॉर्म 8 में गलत जानकारी देने वाले आवेदकों पर भी समान रूप से लागू की जाएगी.

डीके शिवकुमार ने क्या लगाए हैं आरोप?

इससे पहले बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्षी दलों पर हमला बोला था. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत करीब 50 लाख पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर करने की आपराधिक साजिश रची गई है.
शिवकुमार के अनुसार अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटर्स को निशाना बनाकर पहले से भरे हुए फॉर्म 7 बांटे जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि बाबलेश्वर में 1600 से अधिक, विजयपुरा में 14000 और भालकी में 3244 फर्जी आवेदन पकड़े गए हैं. उन्होंने चुनाव आयोग से तुरंत मामले में एफआईआर दर्ज कर जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने की मांग की थी.

चुनाव आयोग के इस सख्त फैसले से वोटर्स को क्या राहत मिलेगी?

चुनाव आयोग के आदेश के बाद अब किसी भी वैध वोटर का नाम लिस्ट से काटना आसान नहीं होगा. अब अधिकारियों को हर आपत्ति की बारीकी से जांच करनी होगी. थोक में फॉर्म जमा करके दुर्भावना से नाम कटवाने वालों पर अब कानूनी फंदा कसेगा. इससे बिना किसी ठोस आधार के पात्र नागरिकों का वोटिंग अधिकार छीनने की कोशिशों पर भी रोक लग सकेगी.



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