नई दिल्ली. अगर आप निजी कंपनी में काम करते हैं और बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी को लेकर परेशान रहते हैं, तो आने वाले समय में नियम बदल सकते हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने और सभी क्षेत्रों में पेड पैटर्निटी लीव जरूरी करने की सिफारिश की है. इसके साथ ही 2030 तक देश में 5 लाख क्रेच सीटें विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है.
NCW ने मैटरनिटी और बच्चों की देखभाल से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है. यह रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी गई है. रिपोर्ट में 9 प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी 37 सिफारिशें शामिल हैं.
CCL सिर्फ मां नहीं, पिता भी ले सकेंगे
आयोग ने मौजूदा चाइल्ड केयर लीव व्यवस्था को जेंडर-न्यूट्रल बनाने का सुझाव दिया है. यानी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी का अधिकार केवल मां तक सीमित न रहे, बल्कि पिता को भी मिले. NCW ने मौजूदा 730 दिनों की CCL को दोनों कामकाजी अभिभावकों के बीच 365-365 दिनों में बांटने का प्रस्ताव दिया है. अगर पति-पत्नी एक ही संस्था में काम करते हैं तो उनके लिए साझा लीव पूल की व्यवस्था भी की जा सकती है. 0 से 2 साल की उम्र के बच्चों के लिए आयोग ने 60:40 के साझा देखभाल मॉडल का भी सुझाव दिया है.
निजी कंपनियों में भी CCL का प्रस्ताव
अभी चाइल्ड केयर लीव की व्यवस्था मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी है. NCW ने पहली बार निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी इसके दायरे में लाने की सिफारिश की है. इसके लिए पहले बड़े उद्योगों और फिर मध्यम एवं छोटे कारोबारों को स्टेप वाइज शामिल करने का सुझाव दिया गया है. इसके लिए सोशल सिक्योरिटी कोड में बदलाव की बात कही गई है.
पिता को भी मिले पेड पैटर्निटी लीव
NCW ने निजी और असंगठित क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों में पैटर्निटी लीव जरूरी करने की सिफारिश की है. आयोग का कहना है कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए. पिता को भी बच्चे की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए.
2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें
कामकाजी महिलाओं के लिए बच्चों की देखभाल सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. इसे देखते हुए NCW ने ‘राष्ट्रीय बाल देखभाल अवसंरचना मिशन’ शुरू करने का सुझाव दिया है. इसके तहत 2030 तक देशभर में 5 लाख क्रेच सीटें विकसित करने का टारगेट रखा गया है. ऑफिस में क्रेच, कई संस्थानों के लिए साझा क्रेच और राज्य स्तर पर बाल देखभाल कोष जैसे मॉडल सुझाए गए हैं.
गिग और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं पर भी फोकस
NCW ने कहा है कि गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं को पर्याप्त मैटरनिटी सुरक्षा नहीं मिल पाती. इसके लिए ‘मातृत्व एवं बाल देखभाल कोष’ बनाने का सुझाव दिया गया है. साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) को सार्वभौमिक और कानूनी अधिकार बनाने की सिफारिश की गई है.
गोद लेने वाली माताओं को भी 26 हफ्ते की छुट्टी
आयोग ने गोद और कमीशनिंग माताओं को भी जैविक माताओं के समान मैटरनिटी सुविधा देने का सुझाव दिया है. इनके लिए मौजूदा 12 सप्ताह की छुट्टी को बढ़ाकर 26 सप्ताह करने की सिफारिश की गई है. कामकाजी और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी बदलाव का प्रस्ताव है. NCW ने मौजूदा 15 मिनट के नर्सिंग ब्रेक को बढ़ाकर 30 मिनट करने की सिफारिश की है. इसके साथ ही ऑफिस या फैक्टरी पर अलग लैक्टेशन रूम और नियमों के बेहतर पालन की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है.
तीसरे बच्चे तक CCL देने पर भी विचार
NCW ने चाइल्ड केयर लीव से जुड़ी दो बच्चों की सीमा पर भी दोबारा विचार करने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में चरणबद्ध तरीके से तीसरे बच्चे तक CCL का लाभ देने का सुझाव दिया गया है.
महिलाओं के करियर पर न पड़े असर
आयोग ने कहा है कि मातृत्व और बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी की वजह से महिलाओं के करियर पर असर नहीं पड़ना चाहिए. इसके लिए भर्ती, प्रमोशन, वेतन और पेंशन में भेदभाव रोकने और कार्यस्थल पर महिलाओं को लेकर सोच बदलने की जरूरत बताई गई है.