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मक्का की अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ सिंचाई ही नहीं बल्कि समय पर निराई-गुड़ाई, जल निकासी, मिट्टी चढ़ाना, संतुलित पोषण और कीट नियंत्रण भी जरूरी है. भुट्टा निकलने, सिल्क आने और दाने भरने की अवस्था में खेत में नमी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. वहीं बारिश के दौरान जलभराव से बचाव और फॉल आर्मी वर्म की समय पर पहचान भी फसल को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाती है.
मक्का की अच्छी फसल के लिए नियमित निरीक्षण, सही समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित खाद, उचित सिंचाई और कीट नियंत्रण जरूरी है. फसल की बेहतर देखभाल के लिए खेत में समय-समय पर ये जरूरी कदम उठाने चाहिए. भुट्टे निकलते समय, रेशे आते वक्त और दाने भरते समय खेत में पानी की कमी न होने दें. इसके अलावा जल निकासी, शुरुआती अवस्था में खेत में पानी बिल्कुल न जमने दें वरना जड़ें सड़ सकती हैं.
किसान भाइयों के लिए मक्का की अच्छी पैदावार हासिल करने में सिंचाई का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है. खासकर मक्का की कुछ अवस्थाएं ऐसी होती हैं. जब पौधे को पानी की कमी होने पर उपज पर सीधा असर पड़ सकता है. भुट्टे निकलने के समय, रेशे यानी सिल्क आने के समय और दाने भरने की अवस्था को मक्का की नाजुक अवस्थाएं माना जाता है. इन दिनों खेत में नमी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. बारिश न होने पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और खेत में पानी जमा भी न होने दें.
बरसात के मौसम में मक्का की फसल में किसानों को सिंचाई के साथ-साथ जल निकासी का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. खेत में लगातार पानी जमा रहने से मक्का की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती और जड़ें सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ फसल कमजोर हो सकती है और पैदावार में भी कमी आ सकती है.किसानों को बारिश से पहले खेत में उचित नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी की निकासी का इंतजाम कर लेना चाहिए.
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मक्का की फसल में पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के करीब 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए. इस समय मक्का के पौधे शुरुआती बढ़वार पर होते हैं और खेत में खरपतवार तेजी से निकलने लगते हैं. इसलिए खेत का निरीक्षण करते रहें और जहां भी घास-फूस दिखाई दे उसे निकाल दे.पौधों की कतारों के बीच हल्की गुड़ाई करने से मिट्टी भी भुरभुरी रहती है और जड़ों के आसपास हवा का संचार बेहतर होता है.हालांकि, गुड़ाई करते समय ध्यान रखें कि मक्का के पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे.
मक्का की खेती में अच्छी पैदावार के लिए फसल की सही समय पर देखभाल करना बेहद जरूरी है.मक्का के पौधे जब घुटने के बराबर ऊंचाई के हो जाएं तब पौधों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाने का काम जरूर करें. इसे मक्का की खेती में महत्वपूर्ण कृषि कार्य माना जाता है.खासकर बारिश और तेज हवा के मौसम में मिट्टी चढ़ाने से पौधों को सहारा मिलता है और उनके गिरने की संभावना कम हो जाती है.जब मक्का के पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं और उनकी ऊंचाई लगभग घुटने के बराबर हो जाती है.
मक्का की फसल में अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए सही समय पर पोषक तत्व देना बेहद जरूरी है. इसी के तहत टॉप ड्रेसिंग की जाती है.किसान भाई निराई-गुड़ाई के बाद फसल की जरूरत के अनुसार यूरिया की उचित मात्रा खेत में डाल सकते हैं.निराई के बाद यूरिया देने से खरपतवार हट चुके होते हैं और मक्का के पौधों को पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने का मौका मिलता है.मक्का की फसल में यूरिया मुख्य रूप से नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करता है.
मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म एक प्रमुख कीट समस्या बन सकता है। इसकी शुरुआती पहचान कर समय पर नियंत्रण करना बेहद जरूरी है. क्योंकि यह कीट मक्का की कोमल पत्तियों और बढ़ते हुए पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है.किसान भाई नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते रहें और खासकर पौधों की नई पत्तियों पर विशेष नजर रखें.अगर मक्का की पत्तियों पर छोटे-बड़े छेद दिखाई दें पत्तियां कटी हुई नजर आएं या पौधे के बीच में कीड़े का मल यानी भुरभुरा कचरा दिखाई दे तो फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप की आशंका हो सकती है.
मक्का की फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए केवल सिंचाई और निराई-गुड़ाई ही पर्याप्त नहीं है.बल्कि फसल को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलना भी जरूरी है. किसान भाई खेत में खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं. मिट्टी की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और फसल को कितनी मात्रा में खाद की जरूरत है.मक्का की फसल में नाइट्रोजन और पोटाश का विशेष महत्व होता है. नाइट्रोजन पौधों की हरी पत्तियों और अच्छी बढ़वार में मदद करता है.