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West Bengal Madrasa News: वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रवाद का परिचय है. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्याग्रहियों और क्रांतिकारियों द्वारा इसका गायन किया जाता था. अंग्रेजी हुकूमत इसे अपने खिलाफ मानती थी. इसके बावजूद देशभक्तों की जुबान पर यह एक मंत्र की तरह रहता था.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रदेश के सभी पंजीकृत मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य बनाने की बात कही है. (फाइल फोटो)
West Bengal Madrasa News: वंदे मातरम् को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. पश्चिम बंगाल के रजिस्टर्ड मदरसों में वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य किया गया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश के सभी मदरसों में वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य किया है. सीएम सुवेंदु अधिकारी ने का कि पश्चिम बंगाल में अब राष्ट्रवादी पार्टी की सरकार है, जिसके लिए सनातनी परंपरा सर्वोच्च है. मदरसों में वंदे मातरम् के गायन का मुद्दा कलकत्ता हाईकोर्ट भी पहुंचा था.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी भाजपा सरकार ने राज्य के पंजीकृत मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों में भी राष्ट्रीय गीत का गायन अनिवार्य किया गया है. नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारी ने पिछली ममता बनर्जी सरकार पर राज्य में घुसपैठियों को प्रवेश देने और प्रदेश की डेमोग्राफी बदलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखने और घुसपैठ को रोकने के लिए कदम उठा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारी सरकार ने राज्य के स्कूलों और रजिस्टर्ड मदरसों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया है.’ सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि निश्चिंत रहें… एक ऐसी राष्ट्रवादी सरकार के सत्ता में होने के साथ, जो ‘सनातनी’ परंपरा को बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, राज्य की सीमाएं सुरक्षित रहेंगी और हर घुसपैठिए को पीछे धकेल दिया जाएगा.
ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप
राज्य सरकार ने इससे पहले मई में स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था. इसके बाद मदरसों में भी सुबह की सभा के दौरान राष्ट्रीय गीत का गायन अनिवार्य किए जाने की खबर सामने आई थी. सीएम सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भाजपा और अन्य हिंदुत्व संगठनों को 6 दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ मनाने की अनुमति नहीं दी थी. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी. उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंदिर के खिलाफ रैली आयोजित करने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया था.
हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
मदरसों में वंदे मातरम् गाने को अनिवार्य करने का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा था. कोर्ट ने इसपर अहम टिप्पणी की थी. कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कई अहम मौखिक टिप्पणियां की थीं. कोर्ट ने कहा कि अगर मदरसों में वंदे मातरम् गाया जाए तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा. सुनवाई के दौरान ईसाई स्कूलों में होने वाली प्रार्थना का भी जिक्र हुआ. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति से उसके धर्म से अलग कोई पंक्ति बोलने के लिए कहा जाए तो इससे उसका धर्म नहीं बदल जाता. उन्होंने टिप्पणी की, ‘अगर मदरसों में वंदे मातरम् के पूरे छह छंद गाए जाएं तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा.’
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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