Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

विवाद के बीच चुनाव आयोग ने ऐप में जोड़ा मार्क पर क्या पड़ेगा इसका असर


हालिया सीईसी ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को लेकर विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. एसआईआर की गणना के दौरान इलेक्शन कमीशन ने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के ऐप में एक नया फीचर जोड़ा है. इसका नाम है ‘मार्क वीआईपी’. जानकारी के मुताबिक यह फीचर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, बीएलओ ऐप को 30 जुलाई को अपडेट किया गया था. एप्पल ऐप स्टोर के रिकॉर्ड में 31 जुलाई को “मार्क वीआईपी इलेक्टर रिलेटेड चेंजेस” देखा गया लेकिन एंड्रॉइड प्ले स्टोर पर ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. कार्यालय के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे ऐप या सॉफ्टवेयर में कोई बदलाव नहीं कर सकते. आदेश सीधे आयोग से आते हैं.

क्या है इस फीचर का काम
बताया जा रहा है कि इस फीचर मार्क वीआईपी के जुड़ने से अब वीआईपी वोटरों को चिह्नित करना आसान हो गया है. बीएलओ इस फीचर के माध्यम से उन वोटरों की पहचान कर सकते हैं जो वीआईपी हैं. इनमें इनमें सांसद, विधायक, विधायक परिषद सदस्य, घोषित पदों के धारक, कला-संस्कृति-पत्रकारिता-खेल के व्यक्तित्व, न्यायपालिका और सार्वजनिक सेवाओं के सदस्य शामिल हैं. इस फीचर के तहत इन लोगों को कुछ विशेष सुविधाएं भी दी गई हैं, खासतौर पर चुनाव के दौरान. इन लोगों को नोटिस और आपत्ति से दूर नहीं किया गया है लेकिन इन्हें जनसुनवाई के लिए आने से छूट दी गई है.

कब जोड़ा गया है फीचर
बताया जा रहा है कि यह फीचर पश्चिम बंगाल में हुए एसआईआर के बाद जोड़ा गया है. उस समय दिल्ली और चार अन्य राज्यों में गणना चरण चल रहा था, जबकि ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित 10 राज्यों में दावे और आपत्ति का चरण था. जब इसे लेकर दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के बीएलओ से बातचीत की गई तो पता चला कि दिल्ली और हरियाणा में यह मॉड्यूल सक्रिय है. वहीं इसे लेकर पश्चिम बंगाल के बीएलओ ने बताया कि 2025 में जब वहां एसआईआर शुरू हुआ था, तब यह फीचर मौजूद नहीं था. पश्चिम बंगाल बीएलओ एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, “मार्क वीआईपी फीचर 2025 में नहीं था. एक महीने पहले जोड़ा गया. इससे बीएलओ सत्यापन के दौरान व्यक्ति को वीआईपी के रूप में चिह्नित कर सकता है.”

विवाद के बाद किया गया फैसला
यह बदलाव राजधानी दिल्ली में वीआईपी वोटरों को लेकर विवाद के बीच आया है. बता दें कि दिल्ली में रहने वाली कई प्रमुख वीआईपी हस्तियों को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी नोटिस भेजे गए थे. इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और चुनाव आयुक्त एसएस संधू शामिल हैं.

हालांकि अब सत्यापन के दौरान वीआईपी मार्क होने से ऐसी गलतियां होने की संभावना नहीं होगी और ये सभी वीआईपी की सूची में मार्क होंगे. कोई कमी आने पर इनके दस्तावेज आसानी से इकट्ठे किए जा सकेंगे.

चुनाव आयोग के मैनुअल में है नियम
बता दें कि वीआईपी वोटर को चिह्नित करने का नियम नया नहीं है. चुनाव आयोग के नियमों और मैनुअल में 2018 से ही कुछ वोटरों को वीआईपी चिह्नित करने का प्रावधान है. दिल्ली में ऐसे करीब 3,000 वीआईपी इलेक्टर हैं. नियमों के अनुसार वीआईपी वोटरों को ड्राफ्ट रोल में स्वचालित रूप से जोड़ा जा सकता है, लेकिन वे दावे-आपत्ति नोटिस से मुक्त नहीं हैं. इसी वजह से कई नामी लोगों को नोटिस मिले.

क्या है यह मार्क वीआईपी फीचर
नई दिल्ली जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ‘मार्क वीआईपी’ फीचर एक स्वचालित अभ्यास की तरह है. अभी तक बीएलओ घर जाकर वोटर को अपने रिस्क पर वीआईपी चिह्नित करता है. फिर एईआरओ, ईआरओ और सीईओ कार्यालय इसकी जांच करते हैं. जिले में करीब 1,000 वीआईपी इलेक्टर हैं. सीईओ कार्यालय के दूसरे अधिकारी ने कहा कि बीएलओ को हमेशा वीआईपी या अलग आयु वर्ग के वोटरों की सूची दी जाती थी. इसका उद्देश्य चुनाव के समय सुविधा देना है. ऐसे लोगों की पहले पहचान करनी होती थी और उन्हें वीआईपी मार्क करना होता था, लेकिन इस ऐप से अब ये काम अपने आम हो जाएगा.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top