बेगूसराय: बिहार की एक प्रधानाध्यापिका जिसका सपना था स्कूल को एजुकेशन का रॉल मॉडल बनाना. कड़ी मेहनत से प्रखंड का टॉप सरकारी स्कूल बनाया भी. जिले में इनके प्रयास की चर्चा शुरू ही थीं कि अचानक एक दिन बच्चों को पढ़ाने के बाद बीमार पड़ी महीनों तक चले ईलाज के बाद दुनियां को अलविदा कह दिया. इस गुरुजी के निधन के बाद पूरे प्रखंड में शिक्षक संघ ने उन्हें याद करते हुए कई दिनों तक श्रद्धांजलि दी. लेकिन सरकारी फाइलों में अपनी व्यवस्था दिखाने वाली जिम्मेदार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी को यह घटना एक मज़ाक लगा.
अब शिक्षा विभाग का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिजनों और शिक्षकों को हैरान कर दिया है. जिस सरकारी स्कूल की HM पंचमुखी देवी ने अपनी मेहनत और संघर्ष से अंग्रेजों के जमाने के स्कूल को प्राइवेट स्कूलों की टक्कर में खड़ा किया, उनके निधन के बाद विभागीय कार्रवाई का पत्र उन्हीं के लिए जारी हो गया. हैरानी की बात यह है कि पत्र में उन्हें सेवाकालीन प्रशिक्षण में शामिल नहीं होने पर 24 घंटे के अंदर साक्ष्य सहित जवाब देने का आदेश दिया गया.
क्या है लोकल 18 की पड़ताल
बताया गया पंचमुखी देवी का निधन 9 सितंबर को हुआ था. उनके इकलौते बेटे आलोक कुमार ने LOCAL18 को बताया कि उनकी मां स्कूल में पढ़ाने के दौरान बीमार हुई थीं. मरने से भी एक महीने पहले इसकी सूचना पत्र के माध्यम से विभाग को दे दिया गया था. फिर महीनों तक तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर से इलाज कराया गया और उन्हें दरभंगा में भर्ती कराया गया. करीब एक महीने तक अस्पताल में इलाज चला. इसकी सूचना भी विद्यालय ने विभाग को पत्र के माध्यम से दिया था. आलोक के मुताबिक, करीब एक महीने बाद मां अस्पताल से घर लौटीं, लेकिन एक-दो दिन बाद ही उनका निधन हो गया. परिवार के मुताबिक निधन के समय विद्यालय के शिक्षक भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे.
पति बोले- निधन के बाद भी आया पत्र
पंचमुखी देवी के पति इंद्र भूषण प्रसाद नेलोकल 18 से बताया कि पत्नी के बीमार होने की जानकारी विद्यालय प्रबंधन को दी गई थी. उनके मुताबिक निधन के बाद भी विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया. उन्होंने बताया कि मरने के करीब 20 से 25 दिन बाद स्पष्टीकरण का पत्र मिला, जिसमें 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया था.
शिक्षक संघ ने उठाए सवाल
प्रखंड शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि निधन की सूचना विभाग को दिया गया था. उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक के निधन के बाद इस तरह का पत्र आना शिक्षकों के लिए बेहद दुखद है.राजेश कुमार के मुताबिक, शिक्षक संघ की ओर से पंचमुखी देवी को निधन के बाद श्रद्धांजलि भी दी गई थी. उनका कहना है कि शिक्षक की सेवा के दौरान निधन पर किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता मदद नहीं मिली.
उन्होंने यह भी कहा कि पंचमुखी देवी प्रखंड के लिए गौरव थीं. उनके मुताबिक, बीमारी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के विकास के लिए काम किया. परिवार का आरोप है कि निधन के बाद भी उन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई और उल्टे कार्रवाई के लिए 24 घंटे का समय दे दिया गया.
अभिभावक बोले- ऐसी HM फिर मिलना मुश्किल
अभिभावक सुरेश महतो ने LOCAL18 को बताया कि पंचमुखी देवी एक बेहतर HM थीं. उन्होंने अपनी मेहनत से गांव के पुराने स्कूल को इस स्तर तक पहुंचाया कि वह प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने लगा था. उन्होंने कहा कि ऐसी HM के निधन से अभिभावकों और ग्रामीणों को काफी दुख हुआ है.
उन्होंने कहा कि गांव और अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल को उसी तरह आगे बढ़ाने वाला नेतृत्व मिले, जैसा पंचमुखी देवी ने दिया था.
स्कूल कमेटी की सदस्य ने भी बताई अलग पहचान
विद्यालय कमेटी की सदस्य रीता देवी ने बताया कि पंचमुखी देवी स्कूल के विकास को लेकर लगातार सोचती थीं. कमेटी के साथ स्कूल को बेहतर बनाने को लेकर बातचीत होती थी. उन्होंने कहा कि उनके जाने का बहुत दुख है और शायद वैसी HM दोबारा मिलना मुश्किल होगा.
22 सितंबर को जारी हुआ पत्र
LOCAL18 को उपलब्ध कराए गए पत्र के मुताबिक, जिला कार्यक्रम प्राधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान, बेगूसराय की ओर से 22 सितंबर को पत्र जारी किया गया. पत्र में कहा गया कि पूर्व में जारी विभागीय आदेश के तहत संचालित सेवाकालीन प्रशिक्षण में HM ने भाग नहीं लिया.पत्र में आदेश की अवहेलना, कर्तव्य एवं अनुशासनहीनता का उल्लेख करते हुए 24 घंटे के अंदर साक्ष्य सहित जवाब देने को कहा गया.
पड़ताल के बाद लोकल 18 का सवाल
एक तरफ ग्रामीण और अभिभावक उनकी मेहनत को याद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ निधन के बाद जारी हुआ यह विभागीय पत्र अब चर्चा का विषय बना हुआ है. सवाल है बिहार में कब तक करने के बाद इंसान को लौटकर आना होगा ? विभाग के जिम्मेदार क्या पत्र किसी एजेंट के कहने पर जारी करते हैं? क्या जारी पत्र करते समय जिम्मेदार अधिकारी खानापूर्ति करते हैं? या कही बेगूसराय के शिक्षा विभाग का मकसद सीएम सम्राट सरकार को बदनाम करने का है?