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आज भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत को होगा पहला श्राद्ध जानिए पूरी श्राद्ध तिथियां और धार्मिक मान्यताएं…


Bhadrapada Purnima Rishi Tarpan Today 2026: आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और इस दिन पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाती है. हालांकि आश्विन मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यानी कल 27 सितंबर को पहला श्राद्ध कर्म किया जाएगा. सनातन धर्म में पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने का 16 दिनों का एक पवित्र काल है. इस अवधि में पितरों की आत्मा की शांति के लिए मुख्य रूप से तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न व जल ग्रहण करने की कामना रखते हैं. आइए जानते हैं श्राद्ध पक्ष की सभी तिथियां और धार्मिक मान्यताएं…

भाद्रपद पूर्णिमा पर ऋषियों के नाम का तर्पण
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पितरों के लिए नहीं बल्कि ऋषियों के नाम का तर्पण किया जाता है. ऋषि तर्पण के बाद ही पितरों का तर्पण करने का नियम है. बिना ऋषि तर्पण के पितृ तर्पण कभी सफल नहीं होता है. पहले दिन के श्राद्ध तर्पण में इस बात का ध्यान रखें कि यह तर्पण श्राद्ध तालाब या नदी के पास हो. अगर आपके आसपास नदी या तालाब नहीं है तो घर के आंगन या छत पर जहां हैंड पंप या कोई टोटी लगी हो उस स्थान पर बैठकर आप तर्पण कर सकते हैं.

ऐसे करें पूर्णिमा का ऋषि तर्पण
अगर आप भाद्रपद पूर्णिमा का ऋषि तर्पण कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि तर्पण के समय सिलाई किया हुआ वस्त्र धारण ना करें. हमेशा स्नान के बाद गिले वस्त्रों में ही ऋषि और पितरों का तर्पण किया जाता है. तर्पण करते समय हाथ में सफेद फूल, तिल, कुश जरूर रखना चाहिए. तर्पण के समय सफेद रंग के फूल के अलावा कोई अन्य रंगों के फूलों का प्रयोग ना करें.

पूर्णिमा ऋषि तर्पण मंत्र
ॐ आगच्छ मुनि शार्दूल तेजोरासे जगतपते. उदयंते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रतिगृह्यताम्
ॐ कुम्भयोनि समुत्पन्न मुनीना मुनिसत्तम्. उदयन्ते लंका द्वारे अर्घोऽयं प्रतिगृह्यताम्

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 ऋषि तर्पण श्राद्ध आज
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत – 25 सितंबर, रात 11 बजकर 06 मिनट से
पूर्णिमा तिथि का समापन – 26 सितंबर, रात 10 बजकर 18 मिनट तक
शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन शाम के समय पूर्णिमा तिथि लगी हुई होती है, उसी दिन ही पूर्णिमा तिथि मानी जाती है। ऐसे में 26 सितंबर यानी आज ही पूर्णिमा तिथि का व्रत किया जाएगा. रात 10 बजकर 18 मिनट तक पूर्णिमा तिथि है, इसके बाद आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी और प्रतिपदा तिथि लगते ही पितृपक्ष की शुरुआत हो जाती है.

श्राद्ध कर्म 27 सितंबर
आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत – 26 सितंबर, रात 10 बजकर 18 मिनट से
आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि का समापन – 27 सितंबर, रात 8 बजकर 58 मिनट तक
ऐसे में पितरों के श्राद्ध कर्म की प्रकिया कल यानी 27 सितंबर दिन रविवार से होगी.

प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत
पितृपक्ष की शुरुआत हमेशा आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है, इस अवधि को श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं. इस साल 27 सितंबर 2026 दिन रविवार से महालया प्रारंभ हो रहे हैं. इस दौरान पितरों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए घरों में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं. इस दौरान पिंडदान का भी विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है. वहीं पितृपक्ष का समापन आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक यानी सर्वपितृ अमावस्या को होता है.

श्राद्ध पक्ष में हिंदू तिथि
मान्यता के अनुसार, जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि में पितृ पक्ष के दौरान उसका श्राद्ध किया जाता है. इसलिए केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर श्राद्ध की तिथि तय नहीं की जाती, हिंदू तिथि को देखा जाता है. अगर किसी परिजन की मृत्यु की तिथि पता नहीं है, श्राद्ध का समय और विधि स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार तय करना उचित माना जाता है.

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा. इस दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या रहेगी. जिन पितरों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं है, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है. किसी कारण से तय तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तब भी सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है.

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण
श्राद्ध पक्ष में श्रद्धा और श्रद्धा के साथ संपन्न संपूर्ण अनुष्ठान में संकल्प, तर्पण, पिंडदान, सात्विक भोजन पकाना और अर्पित करना, गाय, कौवे और कुत्ते के लिए अलग रखा गया भाग और दान शामिल हैं. पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए जल में काले तिल, जौ और कुशा घास मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण दिया जाता है. इसके अलावा पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर पिंडदान किया जाता है.

पितृपक्ष 2026 की प्रमुख श्राद्ध तिथियां
26 सितंबर, शनिवार – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार – तृतीया श्राद्ध, महाभरणी
30 सितंबर, बुधवार – चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार – षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार – सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार – अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर, रविवार – नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर, सोमवार – दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार – एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार – द्वादशी और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार – त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार – चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार – सर्वपितृ अमावस्या



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