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Supreme Court Judges Bill: भारत को जल्द ही अपनी पहली महिला प्रधान न्यायाधीश मिलने वाली है. राज्यसभा में उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश जल्द पहली बार किसी महिला को CJI के पद पर देखेगा. उन्होंने बताया कि नए विधेयक के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी.
जस्टिस बीवी नागरत्ना भारत की पहली महिला सीजेआई बनने वाली हैं.
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में जल्द ही एक नया अध्याय जुड़ सकता है. देश को पहली बार महिला प्रधान न्यायाधीश (Women Chief Justice of India) मिलने वाली है. राज्यसभा में बुधवार को उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश जल्द ही पहली बार एक महिला को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर देखेगा. यहां उनका इशारा जस्टिस बीवी नागरत्ना की तरफ था, जो सितंबर 2027 में बतौर सीजेआई सुप्रीम कोर्ट में पदभार संभालेंगी. हालांकि इस सर्वोच्च न्यायिक पद उनका कार्यकाल महज 36 दिनों का होगा.
मेघवाल का यह बयान उस समय आया, जब राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़े विधेयक पर चर्चा हो रही थी. लोकसभा से पारित हो चुके इस विधेयक को राज्यसभा में भी चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया के लिए पूरा किया गया. हालांकि इस दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया.
कानून मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लिया गया है. उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 1950 को जब सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब वहां केवल 8 न्यायाधीश थे. इनमें एक प्रधान न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश शामिल थे.
अब नए विधेयक के लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 न्यायाधीश होंगे. इससे अदालत में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने और न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. तत्काल जरूरत को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी कर यह व्यवस्था लागू की गई थी.
मेघवाल ने बताया कि अध्यादेश लागू होने के बाद 1 जून 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी से नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चार विशेष पीठों का गठन किया है. इन पीठों को केवल पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई का जिम्मा दिया गया है. इन्हें नियमित मामलों की सुनवाई से अलग रखा गया है, ताकि दशकों से लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जा सके.
महिला न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि हाल के समय में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मेघालय और पटना उच्च न्यायालयों में महिला मुख्य न्यायाधीश जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार नारी शक्ति को आगे बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं और न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है.
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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