नई दिल्ली. अगर आपको लगता है कि मकानों की कीमतें सिर्फ दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बैंगलुरु जैसे बड़े शहरों में ही बढ़तीह हैं तो जरा नाइट फ्रैंक की हालिया रिपोर्ट पर नजर डालें. यह रिपोर्ट साफ खुलासा करती है कि भारत में अगला रियल एस्टेट बूम किसी बड़े मेट्रो सिटी से नहीं, बल्कि 11 छोटे शहरों से आने वाला है. रिपोर्ट में इन 11 शहरों में पिछले 5 साल में प्रॉपर्टी की कीमतों में आए उछाल का आंकड़ा दिया गया है, जो मेट्रो शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा है.
उद्योग मंडल सीआईआई और रियल एस्टेट की सलाहकार कंपनी नाइट फ्रैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बुनियादी ढांचे, बेहतर संपर्क और खपत में बढ़ोतरी के दम पर भोपाल, भुवनेश्वर, इंदौर जैसे देश के उभरते 11 प्रमुख रियल एस्टेट (टियर-2) बाजारों में पिछले पांच वर्षों के दौरान मकानों की कीमतों में 63 फीसदी की भारी ग्रोथ दर्ज की गई है. यह देश के शीर्ष आठ महानगरों की तुलना में काफी अधिक है. इसका मतलब है कि देश के मेट्रो शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बीते 5 साल में कम बढ़ीं जबकि छोटे शहरों में ज्यादा उछाल आया है.
क्या कहती है रिपोर्ट
भारत के अगले रियल एस्टेट बाजार शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2021 से 2026 के बीच इन 11 उभरते बाजारों में आवासीय कीमतों में 63 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसी दौरान देश के शीर्ष आठ शहरों में यह वृद्धि 42 फीसदी के आसपास रही है. दूसरी ओर, 2016 से 2026 के दौरान इन उभरते शहरों में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमतों में सालाना 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. यह देश के शीर्ष 8 महानगरों के 4 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले दोगुना है.
किन शहरों में आने वाला है बूम
इस रिपोर्ट में जिन 11 शहरों के नाम लिए गए हैं, उनमें भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश के कुल सरकारी खर्च में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 2014-15 के 39 फीसदी से बढ़कर वित् वर्ष 2025-26 में 55 फीसदी हो गई है. सरकार की तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पाइपलाइन में 17 लाख करोड़ रुपये की 852 परियोजनाएं शामिल हैं, जो मझोले (टियर-2) और छोटे शहरों के लॉन्ग टर्म विकास को गति दे रही हैं.
कितनी है छोटे शहरों की आबादी
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत का रियल एस्टेट विकास पारंपरिक महानगरों से आगे हो रहा है. देश में शीर्ष आठ महानगरों से बाहर के शहरों में आबादी 28.2 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह ग्रोथ मात्र 8.7 फीसदी रहने की संभावना है. इसके साथ ही, देश के 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप में करीब 50 फीसदी टियर-2 और टियर-3 शहरों से संचालित हो रहे हैं.