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आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर ने ट्रोल्स को सिखाया अनोखा सबक बॉट ग्रोक से दिलवाया करारा जवाब…


नई दिल्ली (IIT Bombay Prof Suryakant Waghmore). सोशल मीडिया की दुनिया अजब-गजब दावों और धड़ाधड़ चलने वाली ट्रोलिंग का अखाड़ा बन चुकी है. यहां कब किसको क्या टैग मिल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. हाल ही में ऐसा ही कुछ देखने को मिला देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे में, जहां एक छात्र की खुदकुशी के बाद खड़ा हुआ विवाद इंटरनेट की सुर्खियों में छा गया है. सोशल मीडिया यूजर्स ने संस्थान के सोशियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे को निशाना बनाते हुए ‘नक्सली’ तक कह दिया.

ट्रोलिंग के दौर में लोग सफाई देने या कानूनी रास्ता अपनाने की सोचते हैं. लेकिन IIT बॉम्बे के प्रोफेसर वाघमोरे ने ट्रोल्स से निपटने के लिए बिल्कुल अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने किसी इंसान या आयोग का दरवाजा खटखटाने के बजाय सीधे X के एआई चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) से ही सवाल पूछ डाला. एआई ने भी बिना देर किए उनके एकेडमिक रिकॉर्ड और उनके खिलाफ उठी बातों का ऐसा कच्चा चिट्ठा खोला कि ट्रोल्स की बोलती बंद हो गई. तकनीक का ऐसा इस्तेमाल शायद ही किसी ने पहले देखा होगा.

ग्रोक से क्या बोले प्रोफेसर वाघमोरे? AI ने क्या दिया जवाब?

जब सोशल मीडिया पर प्रोफेसर वाघमोरे के खिलाफ बातें हद से ज्यादा बढ़ने लगीं और IIT बॉम्बे में उनकी मौजूदगी पर ताने कसे जाने लगे तो उन्होंने ग्रोक को टैग करते हुए लिखा- हेलो ग्रोक, मैं समाजशास्त्र का प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे हूं. यह भीड़ मुझे नक्सल कह रही है और पूछ रही है कि किसी टेक्निकल इंस्टीट्यूट में मेरी क्या जगह है. क्या तुम इन्हें जवाब दे सकते हो?

प्रोफेसर के सवाल पर ग्रोक ने तुरंत एक्शन लिया. AI ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर वाघमोरे का किसी भी नक्सली गतिविधि या संगठन से कोई लेना-देना नहीं है. ग्रोक ने इसे वैचारिक रूप से असहमति रखने वाले शिक्षाविदों को दबाने और निशाना बनाने वाला राजनीतिक हथकंडा करार दिया. इतना ही नहीं, AI ने IIT जैसे तकनीकी संस्थान में मानवीय मूल्यों, समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र का महत्व भी बहुत शानदार तरीके से समझाया.

रिसर्च पेपर पर उठे सवाल तो एआई ने गिना दीं किताबें

अन्य यूजर ने प्रोफेसर वाघमोरे की एकेडमिक साख और रिसर्च पेपर पर सवाल उठाए, तब भी ग्रोक ढाल बन गया. AI ने तुरंत उनकी लिखी प्रसिद्ध किताबों, अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में छपे उनके लेखों और एकेडमिक योगदान का ब्योरा सोशल मीडिया पर रख दिया. सटीक और तथ्यात्मक जवाब देखकर प्रोफेसर वाघमोरे ने बेहद मजेदार अंदाज में अंग्रेजी में लिखा, ‘डन… डस्टेड.’ सोशल मीडिया पर इस मजेदार और बेबाक अंदाज की खूब चर्चा हो रही है कि कैसे एक प्रोफेसर ने एआई की मदद से ट्रोलर्स की बोलती बंद कर दी.

आईआईटी बॉम्बे के इस पूरे विवाद की असली जड़ क्या है?

इस पूरे हंगामे की शुरुआत 18 सितंबर को हुई थी, जब आईआईटी बॉम्बे के बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली थी. इस दर्दनाक घटना के बाद कैंपस में हड़कंप मच गया. शुरुआती जांच में आरोप सामने आया कि परीक्षा के दौरान प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला ने साहिल को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया था. इसके कुछ ही घंटों बाद छात्र ने यह खौफनाक कदम उठा लिया.

साहिल के परिवार ने लगाया आरोप

साहिल के परिवार ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे को महीनों से जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा था. परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर डुल्ला के खिलाफ SC/ST एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली. दबाव बढ़ने पर आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने भी आरोपी प्रोफेसर को तुरंत प्रभाव से छुट्टी पर भेजते हुए मामले की गहराई से जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी का गठन कर दिया है.

फैकल्टी फोरम के रुख से क्यों अलग हुए प्रोफेसर वाघमोरे?

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब आईआईटी बॉम्बे का ‘फैकल्टी फोरम’ खुलकर आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के समर्थन में उतर आया. फोरम का तर्क था कि प्रोफेसर डुल्ला केवल अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ गलत माहौल बनाया जा रहा है. यहां तक कि देश के दूसरे प्रतिष्ठित संस्थानों (जैसे आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास) के कुछ शिक्षकों ने भी इस समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की.

इस मामले पर प्रोफेसर वाघमोरे की राय क्या है?

प्रोफेसर सूर्यकांत वाघमोरे ने अपनी ही फैकल्टी के इस कदम का कड़ा विरोध किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर बेबाकी से लिखा कि फैकल्टी फोरम कोई अदालत या कानूनी संस्था नहीं है. इस तरह का खुला समर्थन देकर जांच कमेटी पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने साफ किया कि संस्थान का हर शिक्षक फोरम के इस एकतरफा फैसले से इत्तेफाक नहीं रखता. इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर तीखी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था.



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