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ITR Update : इनकम टैक्स रिटर्न भरने का अब आखिरी समय है. अगले कुछ घंटे में जल्दबाजी में लाखों लोग अपना आईटीआर दाखिल करेंगे. जाहिर है इस जल्दबाजी में गलतियां होने की भी बड़ी गुंजाइश है. एक्सपर्ट का कहना है कि आईटीआर भरने से पहले करदाताओं को ब्याज का मिलान कर लेना चाहिए.
आईटीआर भरते समय तीनों फॉर्म की डिटेल मिलाना जरूरी होता है.
नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने में अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं. जल्दबाजी में आईटीआर भरते समय कई बार लोगों से गलतियां हो जाती हैं. सबसे ज्यादा गलती 2 चीजों की होती है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि टीडीएस तो काटा जा चुका है और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) 1.25 लाख से कम है तो इसे आईटीआर में दिखाने की जरूरत नहीं. वास्तव में ऐसा नहीं है और इनकम टैक्स विभाग एलटीसीजी टैक्स और बैंक खाते में आए ब्याज का मिलान करता है और इसमें मिसमैच पाए जाने पर नोटिस जारी हो जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपना आईटीआर भरने से पहले एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाना जरूरी होता है. आपकी आमदनी की हर डिटेल एआईएस में जुड़ी होती है. इसके अलावा फॉर्म 26एएस और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) के साथ भी अपनी इनकम को मिलाना चाहिए. अगर आप रिटर्न भरने से पहले अपनी इनकम डिटेल इन सभी डॉक्यूमेंट से मिलाते हैं तो निश्चित रूप से गलती की गुंजाइश कम हो जाती है.
क्या गलती करते हैं करदाता
टैक्सपेयर्स की ओर से सबसे ज्यादा गलती बैंक से मिलने वाले ब्याज को लेकर होती है. कई करदाता मानते हैं कि टीडीएस पहले ही कट जाता है तो लोग यही मानने लगते हैं कि बैंक से मिलने ब्याज की जानकारी आईटीआर में देने की जरूरत नहीं होती. लेकिन, इनकम टैक्स कानून के तहत आपको इस तरह की इनकम की जानकारी भी आईटीआर भरते समय देना जरूरी होता है. टैक्सपेयर्स मानते हैं कि टीडीएस काटे जाने के बाद इसकी जानकारी खुद इनकम टैक्स विभाग के पास पहुंच जाती है. इसी गफलत की वजह से कई करदाताओं को सेक्शन 143(1)(a) के तहत नोटिस जारी होता है.
क्यों जरूरी है टीडीएस की जानकारी देना
एक्सपर्ट का कहना है कि टीडीएस सिर्फ एडवांस टैक्स कलेक्शन का एक जरिया मात्र है. इससे किसी करदाता की फाइनल टैक्स देनदारी का खुलासा नहीं होता है. सामान्य नियम यही कहता है कि बचत खाते से मिले ब्याज, एफडी, रिकरिंग डिपॉजिट और अन्य बैंक जमाओं पर मिलने वाले ब्याज की जानकारी भी आईटीआर में देना जरूरी होता है. इन सभी इनकम को सेक्शन 80TTA और 80TTB के तहत आईटीआर में दाखिल करना जरूरी होता है. इसका कारण ये है कि बैंक हर ब्याज इनकम की जानकारी टैक्स विभाग को देते हैं, जिसकी डिटेल एआईएस और फॉर्म 26एएस में दर्ज रहती है.
क्या सावधानी बरतें टैक्सपेयर्स
- अगर आईटीआर में कोई इनकम नहीं डाली जाती है तो सिस्टम इसे एआईएस से कम्पेयर करता है और मिसमैच पाए जाने पर सेक्शन 143 के तहत एडजस्ट किया जाता है.
- बैंकों का ब्याज एआईएस में दिखता है, फॉर्म 26एएस और बैंक इंट्रेस्ट सिर्टिफिकेट में भी इसकी जानकारी होती है.
- ब्याज से हुई कमाई को आईटीआर फॉर्म में ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के तहत रिपोर्ट करना होता है.
- टीडीएस को अलग से कैलकुलेट करें और फिर अपनी पूरी टैक्स देनदारी का पता लगाएं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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