Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

साल में कैसे बदली भारत की आर्थिक तस्वीर कदम में नाप डाली दुनिया


होमफोटोमनीLatest Money

80 साल में कैसे बदली भारत की आर्थिक तस्वीर, 10 कदम में नाप डाली दुनिया

Last Updated:

From Licence Raj to Modern Economy : आज पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है. आज ही के दिन साल 1947 में देश को 200 से भी ज्यादा पुरानी गुलामी से आजादी मिली थी. इस आजादी ने सिर्फ सामाजिक तौर पर ही स्वतंत्र महसूस नहीं कराया, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारतीयों को स्वतंत्रता मिली. बीते 80 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया. कभी लाइसेंस राज से शुरू हुआ यह सफर आज मॉडर्न इकनॉमी की मिसाल बन चुका है. आइये भारत की प्रगति के इस सफर को 10 बड़े कदमों और उसकी सफलता के नजरिये से देखते हैं.

औद्योगिक नीति और इकनॉमी की योजना : भारत की आजादी के तत्काल बाद सबसे बड़ी जरूरत एक ऐसी औद्योगिक नीति की थी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव रख सके. इस नीति को 1948 से 1950 तक लागू किया गया, तब देश की ज्यादातर इकनॉमी कृषि पर आधारित थी. ऐसे में साल 1948 में औद्योगिक नीति क्रांति का ढांचा तैयार किया गया, जिसमें सरकार और निजी सेक्टर की भूमिका को तय किया गया. बाद में साल 1951 में इसे बदलकर इंडस्ट्रीज (विकास एवं नियंत्रण) एक्ट, 1951 कर दिया गया. इसके तहत उद्योगों को लाइसेंस देने का अधिकार सरकार के पास रहा. 5 साल के शुरुआती प्लान में इन्फ्रा, बड़े उद्योग, बांध, पावर प्रोजेक्ट और सरकारी कंपनियां बनाने पर जोर दिया गया.

राष्ट्रीयकरण पर जोर : आजादी के बाद दूसरा सबसे बड़ा सुधार राष्ट्रीयकरण और सरकारी कंपनियों के विस्तार पर दिया गया. साल 1950, 1960 और 1970 के दशक में सरकार ने अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका लगातार बढ़ाई और तमाम निजी कंपनियों को सरकारी अधिकार में खरीदा गया. तब जीवन बीमा का 1956 में राष्ट्रीयकरण किया गया, जबकि 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1969 में हुआ, जबकि 1980 में 6 और बैंकों को सरकारी अधिकार में शामिल कर लिया गया. जनरल इंश्योरेंस को भी 1972 में सरकारी अधिकार में लिया गया. इसका मकसद बैंकिंग व अन्य सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसानी से पहुंचाना था.

हरित क्रांति : देश जब भुखमरी और अनाज की कमी से जूझ रहा था, तब देश में हरित क्रांति का जन्म हुआ. यह सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आिर्थक बदलावों में से एक था. इसके तहत भारत ने ज्यादा पैदावार वाले बीजों का इस्तेमाल करना शुरू किया और सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशकों के इस्तेमाल से मॉडर्न कृषि तकनीक के जरिये खेती शुरू हुई. यह क्रांति रंग लाई और पंजाब, हरियाणा सहित पश्चिमी यूपी के तमाम जिलों में उत्पादन तेजी से बढ़ा. इस क्रांति का ही नतीजा है कि जो देश कभी अनाज की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा था, आज 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज बांट रहा है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

लाइसेंस राज ने पैदा की समस्या : देश आजाद भले ही हो गया, लेकिन कई दशकों तक लाइसेंस राज की वजह से समस्या पैदा होती रही. लाइसेंस लेने से लेकर, परमिट बनवाने, कोटा पाने और सरकारी मंजूरी लेना काफी मुश्किल काम होता था. कंपनियों को फैक्ट्री लगाने अथवा नया काम शुरू करने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता था. इस सिस्टम को आर्थिक ताकत पर नियंत्रण बनाने और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था. हालांकि, समय के साथ ब्यूरोक्रेसी और लालफीताशाही की वजह से लाइसेंस मिलने में देरी होने लगी.

आर्थिक उदारीकरण : यह साल 1991 था, जब देश ने पहली बार आर्थिक उदारीकरण को अपनाया और भारत के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए खुल गए. यह वह समय था जब भारत का खजाना लगभग खाली हो चुका था और प्रधानमंत्री नरसिंम्हा राव की अगुवाई में देश को बड़े कदम उठाने थे. इस आर्थिक सुधार के तहत उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण पर जोर दिया गया. इसमें विदेशी निवेश लाने और आयात पर निर्भरता घटाने के साथ निजी सेक्टर की भागीदारी बढ़ाई गई. भारतीय अर्थव्यवस्था अब बाजार आधारित होने लगी और धीरे-धीरे सरकारी नियंत्रण कम होता गया. इससे भारतीय कंपनियां भी ग्लोबल मार्केट के साथ प्रतिस्पर्धा करने लायक बन गईं.

पूंजी बाजार में सुधार : भारतीय अर्थव्यवस्था ने साल 1990 में अपने वित्तीय सिस्टम में बड़ा बदलाव किया और पूंजी बाजार को ज्यादा नियंत्रित व प्रभावी बनाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) का ढांचा बनाया, जिसे काफी शक्तियां दी गईं. सेबी को पूंजी बाजार पर नियंत्रण पाने के सभी अधिकार दिलाए गए. कंपनियों को भी अपनी इक्विटी को निर्धारित करने के लिए ज्यादा स्वतंत्रता मिली. इसी दौरान बैंकिंग सेक्टर में भी सुधार किए गए और उन्हें ज्यादा बेहतर प्रबंधन के साथ अपना कामकाज चलाने के लिए कई नियम भी बनाए गए.

जीएसटी ने बदल दी दुनिया : वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लागू होते तो अपने अपनी आंखों से देखा होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में यह देश का सबसे बड़ा कर सुधार था. साल 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद कई तरह के टैक्स खत्म हो गए और अप्रत्यक्ष कर के कई स्तरों को खत्म करके सिंगल टैक्स लागू किया गया. इसका मकसद कारोबारियों को ज्यादा आसान टैक्स व्यवस्था दिलाने के साथ ही एक सरल और पारदर्शी टैक्स सिस्टम तैयार करना था.

दिवालिया कानून : साल 2016 में मोदी सरकार ने दिवालिया एवं कर्ज समाधान कानून (IBC) बनाया, जो बैड लोन वसूलने और डूबती कंपनियों से बैंकों को पैसा वापस दिलाने के लिए लगाया गया था. इससे पहले तक कंपनियों में फंसे कर्ज को वसूलना काफी कठिन काम हुआ करता था, लेकिन आईबीसी ने इस काम को पारदर्शी और सरल बनाया. यह कानून खासकर बैंकों के लिए गेमचेंजर साबित हुआ, क्योंकि उनका बड़ा पैसा कॉरपोरेट के पास फंसा होता था और उसे वापस पाने का कोई सामान्य तरीका नहीं होता था.

डिजिटल अर्थव्यवस्था : इंडियन इकनॉमी को दुनिया के साथ कदमताल कराने के लिए सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर दिया. इसके लिए सबसे पहले आधार के जरिये सभी की एक समान पहचान बनाई गई और फिर जन धन खातों के जरिये उनकी पहुंच बैंकिंग सेवाओं तक बनाई गई. सभी के मोबाइल नंबर खातों से जोड़ने के बाद डिजिटल भुगतान का इन्फ्रा तैयार किया गया और आज छोटे से लेकर बड़े अमाउंट तक डिजिटली ट्रांसफर किए जा रहे हैं. यूपीआई के आने से तो तस्वीर ही बदल गई. इसी डिजिटल इकनॉमी ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लीकेज को भी खत्म कर दिया और सरकारी मदद अब ज्यादा आसान तरीके से पहुंचने लगी.

पीएलआई ने बदल दी तस्वीर : भारतीय अर्थव्यवस्था का हालिया बदलाव है प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जो औद्योगिक नीति को नए जमाने के साथ तालमेल के लिए बनाई गई है. साल 2020 में लॉन्च इस योजना के जिरये भारत में उत्पादन बढ़ाकर मेक इन इंडिया जैसे अभियान को नया आयात दिया गया. इससे तकनीक और निवेश दोनों को ही बढ़ावा मिला. योजना के तहत कंपनियों को उनके उत्पादन के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है और देश का निर्यात बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं. यह योजना एक चक्र की तरह काम करती है, जो देश के कई सेक्टर को एकसाथ फायदा पहुंचाती है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top