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Jamui River Man Nandlal Singh Story: 2002 में उन्होंने इसकी शुरुआत की थी और उस वक्त उनके बच्चे छोटे थे परिवार चलाने की जवाबदेही भी थी. लेकिन नदियों को बचाने के लिए जब आगे निकले तो कई तरह की मुश्किलें आई. उन्होंने बताया कि परिवार चलाने में उनकी पत्नी ने भरपूर सहयोग किया.
जमुई: करीब पच्चीस साल पहले एक बाढ़ में आई त्रासदी ने एक व्यक्ति के जीवन पर इतना गहरा असर किया कि उसने अपना पूरा जीवन ही नदियों को समर्पित कर दिया. पिछले 25 सालों से लगातार यह शख्स नदियों को बचाने की दिशा में काम कर रहा है. अब तक कई बार जल यात्रा से लेकर नदी बचाने को लेकर अभियान चला चुका है. यह कहानी है जमुई जिले के रहने वाले नंदलाल सिंह की, जो पिछले 25 सालों से नदी बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं. नंदलाल सिंह ने बताया कि बाढ़ के बाद जो त्रासदी देखी, उसमें यह समझ आया की नदियों को बचाना जरूरी है. अगर इसका स्वरूप बदल गया तो यह किसी न किसी तरीके से हमें नुकसान पहुंचाएगी. उन्होंने बताया कि जमुई जिले में कुल 32 नदियां हैं, जिनमें कभी पूरे साल पानी रहा करता था. लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि अब इसमें बरसात के महीने में भी पानी देखने को नहीं मिलता है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदियों का अस्तित्व अब पूरी तरह से खतरे में है.
अब तक मिल चुके हैं कई तरह के सम्मान
बताते चलें कि नंदलाल सिंह को अभी पिछले ही महीने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय नदी परिषद के द्वारा राष्ट्रीय नदी मंथन 2024 में सम्मानित किया गया था. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर सहित कई बड़े चेहरों की उपस्थिति में उन्हें यह सम्मान मिला था. इसके अलावा नंदलाल सिंह को और भी कई अलग-अलग सम्मान मिल चुके हैं. जिसमें जल प्रहरी सम्मान शामिल है, जो उन्हें जल शक्ति मंत्रालय के द्वारा दिया गया था. इसके साथ ही उन्हें कई तरह के सम्मान मिल चुके हैं. नंदलाल सिंह को अब तक एक दर्जन से अधिक अलग-अलग सम्मान दिया जा चुका है. नंदलाल सिंह ने बताया कि उन्होंने देहरादून नमामि गंगे के प्रमुख पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी, भारतीय नदी परिषद के नदी पुरुष रमणकांत और जल पुरुष राजेंद्र सिंह इत्यादि के संरक्षण में नदियों के संरक्षण का काम शुरू किया था, जो अब तक अनवरत रूप से जारी है.
पत्नी की मौत के बाद भी नहीं मुड़े पीछे
नंदलाल सिंह ने बताया कि 2002 में उन्होंने इसकी शुरुआत की थी और उस वक्त उनके बच्चे छोटे थे परिवार चलाने की जवाबदेही भी थी. लेकिन नदियों को बचाने के लिए जब आगे निकले तो कई तरह की मुश्किलें आई. उन्होंने बताया कि परिवार चलाने में उनकी पत्नी ने भरपूर सहयोग किया. वह उनके साथ अलग-अलग आंदोलन में भी जाया करती थी. जब भी वह किसी आंदोलन पर रहते थे, तब वह बच्चों का देखभाल करती थी और परिवार की देखभाल भी किया करती थी.
पैतृक खेत थे जिससे पूरा परिवार चलता था. लेकिन 2014 में उनकी पत्नी का निधन हो गया. परिवार की जवाबदेही आई, लेकिन उसके बाद भी नंदलाल सिंह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार वह अपने इस काम में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि नदियों को बचाना ही होगा, नहीं तो आने वाले दिनों में बड़ी संकट आ जाएगी. पहले हम देखते थे कि लोग नदी का पानी पीते थे. फिर धीरे-धीरे लोग कुएं का पानी पीने लगे, फिर लोग चापानल का पानी पीने लगे और अब बोरिंग का पानी पी रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसके बाद क्या करेंगे, जब बोरिंग के जलस्तर का पानी समाप्त हो जाएगा तब लोगों के पास कोई उपाय नहीं बचेगा, ऐसे में नदियों को बचाए रखना अतिआवश्यक है.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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