Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

अब कांग्रेस सरकार के विरोध में उतरे किसान क्यों फूटा गुस्सा हिंसक प्रदर्शन की दे दी चेतावनी…


Last Updated:

Karnataka Farmer Protest: कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के निर्देश के बाद कर्नाटक में किसानों का गुस्सा भड़क गया है. मांड्या, मैसूर और श्रीरंगपट्टना में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तमिलनाडु को पानी छोड़ा गया तो आंदोलन हिंसक हो सकता है. किसान नेता कुरुबुरु शांतकुमार ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट जाने और एक बूंद पानी भी न छोड़ने की मांग की. सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा शुरू कर दी है और सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है.

अब कांग्रेस सरकार के विरोध में उतरे किसान, क्यों फूटा गुस्सा? Zoom

कावेरी जल विवाद पर CWMA के आदेश के बाद कर्नाटक में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा.

न्यूज18 कन्नड़
Cauvery Water Dispute: मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन अभी शांत ही हुआ था कि कर्नाटक में किसान भड़क गए हैं. कर्नाटक में इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक मुद्दा फिर कावेरी नदी का पानी बन गया है. जब खेत सूख रहे हों, जलाशयों का स्तर लगातार गिर रहा हो और किसान अगली फसल को लेकर चिंता में हों तब अगर राज्य को पड़ोसी राज्य के लिए पानी छोड़ने का आदेश मिल जाए तो गुस्सा स्वाभाविक है. यही वजह है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के ताजा फैसले ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है. अब तक विपक्ष सरकार को घेर रहा था, लेकिन इस बार खुद किसान कांग्रेस सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. कई जगह प्रदर्शन हुए, टायर जलाने की कोशिश हुई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह जैसा कदम उठाने की भी कोशिश की. यह मामला सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और राजनीतिक भरोसे का भी बन गया है.

किसानों का कहना है कि जब कर्नाटक के कई हिस्से सूखे से जूझ रहे हैं और पीने के पानी तक का संकट पैदा हो रहा है, तब तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना राज्य के हितों के खिलाफ होगा. दूसरी तरफ सरकार कानूनी दायित्व और अदालत के आदेशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है. लेकिन किसानों को यह संतुलन स्वीकार नहीं है. यही कारण है कि मांड्या, श्रीरंगपट्टना और मैसूर जैसे इलाकों में विरोध तेज हो गया है. किसान संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा गया तो आंदोलन और उग्र होगा. इससे कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है.

कावेरी विवाद ने फिर बढ़ाई सियासी और किसान आंदोलन की गर्मी

  • दिल्ली में हुई कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की उच्चस्तरीय बैठक के बाद कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया. इस फैसले ने राज्य के किसान संगठनों में भारी नाराजगी पैदा कर दी. किसानों का आरोप है कि सूखे की स्थिति में पहले राज्य के लोगों और किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. आदेश सामने आते ही मांड्या समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
  • प्रदर्शन के दौरान मांड्या के संजय सर्कल में किसानों ने CWMA के खिलाफ नारेबाजी की. एक प्रदर्शनकारी ने टायर जलाकर विरोध दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने समय रहते टायर जब्त कर लिया. इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने खुद पर डीजल डालने की कोशिश की. पुलिस ने हस्तक्षेप कर डीजल की बोतल भी जब्त कर ली और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने की सलाह दी. वहीं श्रीरंगपट्टना में किसान नदी किनारे उतर गए और स्नान घाट के पास प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई.

‘सुप्रीम कोर्ट जाइए, पानी की एक बूंद भी मत छोड़िए’

किसान नेता कुरुबुरु शांतकुमार ने राज्य सरकार से तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पीने का पानी नहीं है, सूखे से किसान मर रहे हैं. पानी की एक बूंद भी नहीं छोड़ी जानी चाहिए. राज्य सरकार को तुरंत सर्वोच्च न्यायालय जाना चाहिए और हम कल से सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और कानूनी लड़ाई लड़ते हुए CWRC के आदेश को चुनौती देनी चाहिए. किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात में पानी छोड़ना राज्य के लाखों किसानों के साथ अन्याय होगा.

हिंसक आंदोलन की चेतावनी से बढ़ी सरकार की चिंता

मैसूर में कर्नाटक रक्षा वेदिका स्वाभिमानी बलगा के कार्यकर्ताओं ने भी जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के खिलाफ नारे लगाए. संगठन ने साफ चेतावनी दी कि यदि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा गया तो आंदोलन और उग्र होगा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को किसानों की भावनाओं को समझना चाहिए और किसी भी कीमत पर राज्य के जल अधिकारों से समझौता नहीं करना चाहिए.

सरकार ने कानूनी विकल्पों पर शुरू की चर्चा

उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कावेरी विवाद को लेकर कानूनी विशेषज्ञों से टेलीफोन पर चर्चा की. सरकार अब आगे की रणनीति तैयार करने में जुटी है. जानकारी के अनुसार, सरकार ने फिलहाल रविवार तक पानी नहीं छोड़ने का फैसला किया है. इसके बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी दलों की राय लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा. माना जा रहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है.

‘अधिकारी हमेशा तमिलनाडु के पक्ष में रहते हैं’

कांग्रेस विधायक रवि गनिगा ने भी कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा ‘कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी हमेशा तमिलनाडु के पक्ष में रहे हैं. हमारी सरकार को किसी भी कारण से पानी नहीं छोड़ना चाहिए. अगर हमारी सरकार पानी छोड़ती है, तो हमें किसानों के साथ हाथ मिलाना पड़ेगा. तमिलनाडु के बांध में हमसे कहीं ज्यादा पानी है. हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उनसे पानी न छोड़ने का अनुरोध करेंगे. सीडब्ल्यूएमए के सभी अधिकारी तमिलनाडु के हैं और वे हमेशा तमिलनाडु के पक्ष में रहे हैं.’

इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है. अब सभी की नजर सरकार की अगली रणनीति और संभावित कानूनी कदम पर टिकी है.

About the Author

Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top