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New Project : बैंगलुरु शहर को जाम से छुटकारा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 2 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है. इन दोनों की लंबाई 46.5 किलोमीटर होगी और इस पर 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाले को टोल का भुगतान करना होगा. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 40 फीसदी रकम राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी. कॉरिडोर पूरा होने के बाद शहर में जाम से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी.
बैंगलुरु में 2 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव मिला है.
नई दिल्ली. दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम वाले शहर बैंगलुरु को जल्द बड़ी सौगात मिलने वाली है. यहां दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है. कर्नाटक के वित्त विभाग ने साफ कहा है कि इन कॉरिडोर का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को भुगतान करना होगा. इसका मतलब है कि यह टोल आधारित व्यवस्था होगी और इस पर चलने वाले को टोल टैक्स देना पड़ेगा. वित्त विभाग ने कहा है कि 10 किलोमीटर से ज्यादा लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का इस्तेमाल करने पर टोल का भुगतान करना होगा.
शहरी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैंगलुरु में यशवंतपुर से केआरपुरम और मरेनाहल्ली मेन रोड से कनकपुरा मेन रोड तक 2 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि बैंगलुरु स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) के लिए 2 टेंडर जारी कर दिए गए हैं. इस टेंडर के तहत 46.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो बिल्ड ऑन ऑपरेट ट्रांसफर (BOOT) मॉडल पर तैयार किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार की ओर से 40 फीसदी फंडिंग उपलब्ध कराई जाएगी.
कितने लंबे होंगे दोनों कॉरिडोर
बैंगलुरु में 2 एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाने हैं, जिसमें से एक यशवंतपुर से केआरपुरम तक होगा और इसकी लंबाई 28 किलोमीटर की होगी. दूसरा कॉरिडोर मारेनहल्ली से कनकपुरा तक बनाया जाएगा और इसकी लंबा ई 18.5 किलोमीटर होगी. वित्त विभाग ने कहा है कि जो भी इन कॉरिडोर को 10 किलोमीटर से ज्यादा इस्तेमाल करेगा, उसे टोल का भुगतान करना होगा. इसका मतलब है कि यह कॉरिडोर टोल पर आधारित है.
7 किमी का एक और कॉरिडोर
मामले से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि शहर में 7 किलोमीटर का एक और एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाने का प्रस्ताव है, लेकिन इस पर टोल वसूलने का कोई प्रस्ताव नहीं है. टोल वसूलने की शर्त 10 किलोमीटर ही रखी है. प्रोजेक्ट के डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि 46.5 किलोमीटर के कॉरिडोर को बनाने पर 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार खर्च करेगी, शेष रकम टोल के जरिये वसूल की जाएगी.
बनाने पर कितना खर्चा आएगा
वित्त विभाग का कहना है कि इन दोनों कॉरिडोर को बनाने पर करीब 5,820 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा, जिसमें से करीब 2,200 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च करने वाली है. यह फंडिंग जमीन अधिग्रहण पर आने वाले खर्च से अलग होगी. मारेनहल्ली मेन रोड से कनकपुरा मेन रोड तक बनने वाले 18.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को बनाने पर 2,283.19 करोड़ का खर्चा आने का अनुमान है, जिसमें से 40 फीसदी यानी 913.29 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी. 28 किलोमीटर के दूसरे कॉरिडोर को बनाने पर करीब 3,536.89 करोड़ का खर्चा आने का अनुमान है, जिसमें से 40 फीसदी यानी 1,414.76 करोड़ रुपये राज्य सरकार से आने हैं.
क्यों नहीं लगता 10 किलोमीटर तक शुल्क
अगर आप यह सोच रहे कि एलिवेटेड कॉरिडोर पर टोल 10 किलोमीटर के बाद ही क्यों वसूला जा रहा है तो इसके पीछे राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 है, जो नगर पालिका के भीतर टोल प्लाजा पर शुल्क वसूलने पर रोक लगाता है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी साल 2026 में एक फैसला दिया था कि नगर पालिका के 5 किलोमीटर के भीतर कोई टोल की वसूली नहीं होगी. हालांकि, एनएचएआई ने 9.9 किलोमीटर के दायरे में शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी है. यही वजह है कि बैंगलुरु में एलिवेटेड रोड पर 10 किलोमीटर के बाद ही टोल वसूलने का प्रावधान किया गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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