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Bankipur Upchunav Result: बिहार की बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर भाजपा उम्मीदवार से काफी वोटों से आगे चल रहे हैं. भाजपा के अध्यक्ष नितीन नवीन के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी. यह भाजपा के लिए काफी अहम मानी जा रही थी. उपचुनाव में प्रशांत किशोर की संभावित जीत को कुछ जानकार सीधे भाजपा के लिए झटका बता रहे हैं. लेकिन, राजनीति में यह अपनी तरह की पहली घटना नही है. 2018 में गोरखपुर में कबीर-करीब ऐसी ही स्थिति देखी गई थी. लेकिन, उसके बाद भाजपा ने जिस ताकत से वापसी की, उसके बारे में हर किसी को पता है.
बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर करीब 8 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं.
Bankipur Upchunav Result: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर दोपहर दो बजे के करीब रुझानों में आठ हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं. यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. इस सीट पर भाजपा के पिछड़ने को विरोधी दल एक बड़ा झटका बता रहे हैं. उनका तर्क है कि यह सीट नितीन नवीन और राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए बेहद अहम थी लेकिन पहली अग्नि परीक्षा में ये दोनों हारते हुए दिख रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि बांकीपुर नितीन नवीन का गढ़ है. यहां से वह पांच बार विधायक रहे हैं. पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. फिर उन्होंने बांकीपुर सीट छोड़ दी.
दूसरी तरफ राज्य की कमान अपने हाथ में लेने के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा के सामने यह पहली बड़ी अग्नि परीक्षा थी. लेकिन, हमारा मानना है कि भाजपा की इस संभावित हार से विपक्षी दलों को बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए. चुनाव और उपचुनाव में कई बार चीजें भाजपा के खिलाफ चली जाती हैं लेकिन, बाद में पार्टी कई गुना अधिक ताकत से वापसी करती है. इसका सबसे ताजा उदाहरण है 2018 में गोरखपुर में लोकसभा के लिए हुआ उपचुनाव.
2018 का गोरखपुर उपचुनाव
उत्तर प्रदेश का गोरखपुर जिला सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ है. यहीं पर गोरखनाथ मठ है. यह नाथ संप्रदाय का एक सबसे प्रसिद्ध मंदिर है. उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम गोरखपुर पड़ा है. योगी आदित्यनाथ इस मठ के महंत भी हैं. गोरखपुर और आसपास के इलाकों की सीटों पर इस मठ का गहरा प्रभाव रहा है. ऐसे में 2018 में गोरखपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव करवाना पड़ा. उससे कुछ समय पहले ही 2017 में राज्य की सत्ता में भाजपा आई थी. केंद्र में पीएम मोदी के लीडरशिप में भाजपा अपने बेहतरीन दौर में थी. लेकिन, उस साल हुए उप चुनाव में इस प्रतिष्ठित सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. लेकिन उसके बाद जिस तरह से भाजपा ने वापसी की उसके बारे में दुनिया जानती है.
दरअसल, 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम बने. सीएम बनने से पहले योगी गोरखपुर संसदीय सीट से सांसद थे. उन्होंने लोकसभा की सदस्या से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद मार्च 2018 में यहां इलेक्शन करवाया गया. यह वही गोरखपुर की सीट थी जहां बीते करीब सात चुनाव से योगी आदित्यनाथ और उनके गुरु योगी अवैद्यनाथ चुनाव जीतते आए थे. लेकिन, 2018 के उपचुनाव में यह सिलसिला टूट गया.
2018 का उपचुनाव
2018 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण कुमार निषाद यह सीट से विजयी घोषित हुए. सपा उम्मीदवार को बसपा ने भी अपना समर्थन दिया था. यह राज्य में सपा और बसपा के बीच संभावित गठबंधन का एक लिटमस टेस्ट था. प्रवीण निषाद 21 हजार से अधिक वोटों से भाजपा के उपेंद्र शुक्ला को हरा दिया. राजनीति के जानकार इसे भाजपा के लिए एक बड़ा बताने लगे.
गोरखपुर के चुनावी नतीजे के आधार पर 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य में बसपा और सपा के बीच आधिकारिक तौर गठबंधन हुआ. बसपा प्रमुख मायावती अपने जीवन में पहली बार सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के साथ मंच साझा किया. लेकिन, 2019 के चुनावी नतीजे उम्मीद से बिल्कुल उलट आए. दोनों दलों के बीच गठबंधन के बावजूद राज्य में भाजपा को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. राज्य की 80 में 62 सीटों पर अपने दम पर भाजपा को जीत मिली. उसकी सहयोगी अपना दल सोनेवाल को दो सीटें मिलीं. बसपा को 10 और सपा को पांच सीटों पर जीत मिली. कांग्रेस के खाते में केवल एक सीट आई. राहुल गांधी अमेठी से अपनी सीट हार गए थे. खुद गोरखपुर में बाजी पलट गई. भाजपा उम्मीदवार रवि किशन की गोरखपुर से जबर्दस्त जीत हुई. वह तीन लाख से अधिक वोटों की मार्जिन से सपा उम्मीदवार रामभूवन निषाद को हरा दिया.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…
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