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Organic waste series-9: घरों से निकलने वाला गीला कचरा फेंकने के लिए नहीं होता, बल्कि यह उद्योग के लिए कच्चा माल है, जिससे कंपोस्ट, बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), खाद और तरल किण्वित जैविक खाद बना सकते हैं. घर पर कंपोस्टिंग या छोटे बायोगैस प्लांट से काम शुरू कर सकते हैं.
गीले कचरे से क्या बना सकते हैं और कितना फायदा कमा सकते हैं?
Organic waste series-9: घर से निकलने वाला गीला कचरा किसी काम भी आ सकता है, बहुत सारे लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं होता लेकिन अगर हकीकत देखें तो यह बहुत कीमती है और यह इतना फायदेमंद हो सकता है कि इससे सालाना रोजगार हासिल किया जा सके. इससे स्टार्टअप शुरू किया जा सके, इससे काम शुरू करके जॉब को रिप्लेस किया जा सके और अपने सभी खर्चों के लिए पैसा कमाया जा सके. आजकल गीला कचरा सिर्फ कूड़ा नहीं है,कि इसे फेंका जाए, बल्कि यह वो कीमती कच्चा माल है, जिसे रीसायकल कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
गीले या जैविक कचरे को लेकर News18hindi की सीरीज की 9वीं स्टोरी में हम जानते हैं कि गीले कचरे से क्या-क्या बना सकते हैं? घर पर शुरू कर सकते हैं काम? इसकी जानकारी यहां काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह दे रही हैं जवाब…
इस बारे में प्रियंका बताती हैं कि ऑर्गेनिक वेस्ट (गीला कचरा) को प्रोसेस करने से कई उपयोगी चीजें बनती हैं. जैसे, बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), खाद (कंपोस्ट) और तरल किण्वित जैविक खाद (यह CBG बनाने का एक बाय-प्रॉडक्ट है).
हालांकि घर से शुरू करते हुए छोटी सी जगह पर छोटा सा प्लांट लगाकर या छोटा काम शुरू करने के लिए बायो वेस्ट प्रोसेस करने के दो मुख्य तरीके हैं –
कंपोस्टिंग
छोटे बायोगैस प्लांट
प्रियंका कहती हैं कि कंपोस्टिंग से अच्छी खाद बनती है. इसमें बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं. यह रासायनिक खाद का अच्छा विकल्प है और मिट्टी की सेहत भी सुधारती है. कंपोस्टिंग में खाद जल्दी बन जाती है. राजकोट की एक मिसाल बताती है कि जैविक कचरे को मशीन में डालने के सिर्फ 10 दिन बाद खाद तैयार हो गई थी. इसमें बदबू दूर करने के लिए इलाज (क्योरिंग) के दौरान एक खास दवा (इनोक्यूलम) डाली गई थी. इसलिए ये छोटी कंपोस्टिंग यूनिट आसानी से दूसरी जगहों पर भी लगाई जा सकती हैं. क्योंकि इनमें लोकल कचरा ही इस्तेमाल होता है. छोटी यूनिट लगाने के लिए बड़ी यूनिट की तुलना में बहुत कम सरकारी अनुमतियां लगती हैं.
छोटे बायोगैस प्लांट में बिना ऑक्सीजन के सड़ाने (एनारोबिक डाइजेशन) की प्रक्रिया से बायोगैस बनाई जाती है. ये उन जगहों पर सबसे फायदेमंद हैं जहां कचरा निकलता हो और गैस का सीधा इस्तेमाल हो सके. अगर आसपास खाना पकाने के लिए रोजाना करीब 1 टन कचरा मिल जाए तो छोटा बायोगैस प्लांट बहुत सस्ता और फायदेमंद साबित हो सकता है.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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