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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जो देश की युवा पीढ़ी को सीधा आकर्षित करता है. राजनीति से लेकर आधुनिक सांस्कृतिक रुझानों तक, उनका यह अंदाज हमेशा चर्चा का विषय रहता है. इसी कड़ी में वे दिल्ली में एक भजन क्लबिंग कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने युवाओं के साथ खंजरी और ढफली बजाकर गहरी छाप छोड़ी. राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जा रहे इस दौर में, देश का हर चौथा वोटर यानी जेन-जी इस वर्ग की सियासी ताकत को भी साफ तौर पर दर्शाता है.
पंडित दीनदयाल की जयंती पर भजन क्लबिंग में शिरकत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के दीनदयाल पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान वे पारंपरिक रूप से भक्ति भाव में डूबे नजर आए और कार्यक्रम में खंजरी (डफली) बजाते हुए ताल से ताल मिलाते दिखे. उनका यह अनूठा और सहज रूप वहां मौजूद हर एक युवा के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. (PTI)
राजनीतिक माहौल में युवाओं के बीच खास संदेश: यह दौरा ऐसे वक्त में हुआ है जब देश की राजनीति में ‘जेन-जी’ वोटर्स और उनके अधिकारों को लेकर बयानबाजी तेज है. विपक्ष की तरफ से हाल ही में युवाओं के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया गया है, जिसके ठीक एक दिन बाद पीएम मोदी का सीधे युवाओं के बीच इस तरह पहुंचना एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. यह हार्ड-नुक पॉलिटिकल स्ट्रेटजी का हिस्सा है, जो सीधा असर डालती है. (PTI)
आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम: भजन क्लबिंग आज की युवा पीढ़ी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा एक ऐसा ट्रेंड है जहां युवा कम्युनिटी सेटिंग्स में मिलकर भजन गाते हैं. पीएम मोदी ने इस आधुनिक आध्यात्मिक ट्रेंड की सराहना करते हुए इसे ग्लोबल कॉन्सर्ट जैसा बताया है. उनका मानना है कि यह भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का एक बेहतरीन मेल है, जो युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. (PTI)
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ग्लोबल मंचों पर भी कर चुके हैं इस ट्रेंड की तारीफ: पीएम मोदी केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस नए यूथ ट्रेंड की सराहना कर चुके हैं. जुलाई में अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान उन्होंने मेलबर्न में भजन क्लबिंग का विशेष तौर पर जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि यह इस बात का सबूत है कि आज का युवा अपनी आस्था और परंपराओं को नए और आधुनिक तरीकों से अपना रहा है, जो भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है. (PTI)
मन की बात में भी कर चुके हैं जेन-जी की पहल का जिक्र: इसी साल जनवरी में प्रसारित अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने ‘भजन क्लबिंग’ की जमकर तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि युवाओं द्वारा भक्ति और संगीत का यह नया फ्यूजन बेहद एनर्जेटिक है. जब देश का प्रधानमंत्री इस तरह के छोटे और ट्रेंडी इनिशिएटिव्स को नेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान देते हैं, तो वह सीधे तौर पर यूथ कनेक्ट को मजबूत करता है. (Screengrab)
जेन-जी से जुड़ने का पीएम का अनूठा ‘स्वैग’ और तरीका: पीएम मोदी लगातार जेन-जी की बदलती जीवनशैली और कम्युनिकेशन स्टाइल को अपना रहे हैं. वे सोशल मीडिया पर ‘GRWM’ (गेट रेडी विद मी) जैसे ट्रेंड्स का इस्तेमाल करने से लेकर अपनी स्पीच में ‘फ्लेक्स’ और ‘OG’ जैसे यूथ स्लैंग्स का इस्तेमाल कर चुके हैं. रील्स और सेल्फी-स्टेरल वीडियो के जरिए वे युवाओं को ‘फ्रेंड्स’ कहकर संबोधित करते हैं, जो उनके कूल और डायनेमिक राजनीतिक व्यक्तित्व को दिखाता है. (X/Shruti Koshiya)
देश का हर चौथा वोटर है ‘जेन-जी’, सियासी अहमियत: राजनीतिक दलों के लिए आज जेन-जी सबसे बड़ा फोकस बन चुका है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 में देश में 15 से 29 साल की उम्र के करीब 36.74 करोड़ युवा हैं, जो कुल आबादी का लगभग 26% हिस्सा हैं. साल 2029 के आम चुनाव में यही युवा देश की दशा और दिशा तय करेंगे, यही वजह है कि तमाम पार्टियां इस वर्ग को लुभाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही हैं. (Screengrab)