नई दिल्ली (Sharad Sagar Viral Video). जिंदगी में कुछ कर दिखाने और लीक से हटकर सोचने का जज्बा पक्का हो तो इंसान हर नामुमकिन चीज को मुमकिन बना सकता है. सफलता की यह कहानी बिहार के सपूत शरद विवेक सागर की है. उन्होंने साबित कर दिया कि इरादे मजबूत हों तो मिट्टी की खुशबू वापस खींच ही लाती है. अमेरिका जैसी दुनिया की महाशक्ति में पढ़ाई, मोटी सैलरी वाली नौकरी और आलीशान जिंदगी के तमाम अवसरों को लात मारकर स्वदेश लौटने वाले शरद के इस फैसले पर तब लोग हंस रहे थे.
चौंकाने वाला था अमेरिका से वापसी का फैसला
जब शरद विवेक सागर अमेरिका में हायर एजुकेशन पूरी कर वापस भारत लौटने की तैयारी में जुटे थे तो उनके अमेरिकी दोस्त उनका यह फैसला समझ नहीं पा रहे थे. मैनहट्टन की ऊंची-ऊंची इमारतों में शानदार कॉरपोरेट नौकरी और लग्जरी लाइफस्टाइल छोड़कर आखिर कोई अपने देश क्यों वापस जाना चाहेगा? दोस्तों की इसी हैरानी पर शरद ने मुस्कुराते हुए ऐसी बात कही थी, जो उस वक्त तो मजाक लगी थी लेकिन इतिहास रचने वाली थी.
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जाग गया शरद के अंदर का बिहारी
शरद विवेक सागर ने उस दौर को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है. उन्होंने उसके कैप्शन में लिखा- मेरे अंदर के बिहारी ने दोस्तों से कहा था कि मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे. यह सिर्फ एक स्टेटमेंट नहीं था, बल्कि खुद पर और अपने काम पर अटूट विश्वास था. आखिरकार, सितंबर 2016 की एक सुबह वह ऐतिहासिक फोन कॉल आ ही गई, जिसने उनके जीवन के इस वादे को हकीकत में बदल दिया.
बराक ओबामा के मेहमान बने शरद सागर
16 सितंबर 2016 की सुबह शरद सागर पश्चिम बंगाल में थे. तब उन्हें वाइट हाउस से निमंत्रण मिला. यह बुलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरफ से आयोजित ‘साउथ बाय साउथ लॉन: अ वाइट हाउस फेस्टिवल ऑफ आइडियाज, आर्ट एंड एक्शन’ के लिए था. 3 अक्टूबर 2016 को वाइट हाउस में हुए खास कार्यक्रम में दुनियाभर के चुनिंदा क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और सोशल चेंज लाने वाले लीडर्स शामिल हुए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस साल इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में आमंत्रित होने वाले शरद एकमात्र भारतीय थे.
वाइट हाउस में बिताए 9 घंटे
शरद सागर ने वाइट हाउस में 9 यादगार घंटे बिताए. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बिताए गए अमूल्य 90 मिनट भी शामिल थे. शरद के लिए यह सिर्फ किसी मशहूर इमारत में जाने का मौका नहीं था, बल्कि उनकी उस मेहनत की गवाही थी जो उन्होंने बहुत कम उम्र में शुरू कर दी थी. मात्र 16 साल की उम्र में 2008 में उन्होंने ‘डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ की नींव रखी थी. इसका उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के स्टूडेंट्स को लीडरशिप और हायर एजुकेशन के बेहतरीन मौके दिलाना था.
सफलता का असली मतलब और युवाओं के लिए सीख
शरद सागर की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है. साथ ही अपनी मेहनत के दम पर उन्हें पूरा करने का जुनून भी रखता है.