जौनपुर: विदेश में पढ़ाई के दौरान आया एक बिजनेस आइडिया आज जौनपुर में एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग कारोबार का रूप ले चुका है. जौनपुर के युवा उद्यमी हर्षवर्धन रघुवंशी ने लंदन में मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान भारतीय मसालों की संभावनाओं को करीब से देखा और इसी सोच के साथ अपने शहर में HVR मसाले की नींव रखी. महज डेढ़ साल में यह ब्रांड उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के बाजारों तक पहुंच बना चुका है.
पिता भी हैं कारोबारी
हर्षवर्धन रघुवंशी खुद को सेकंड जनरेशन एंटरप्रेन्योर बताते हैं. उनके पिता फर्स्ट जनरेशन कारोबारी हैं और बचपन से ही उन्होंने घर में व्यवसाय को करीब से देखा. हालांकि हर्षवर्धन अपनी अलग पहचान और खुद की वैल्यू बनाना चाहते थे. इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक कारोबार से अलग मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. मसालों के कारोबार को चुनने के पीछे भी उनकी सोच बेहद स्पष्ट थी. उनका मानना है कि भारत में मसालों का बाजार बहुत बड़ा है और यह ऐसा उत्पाद है जिसकी जरूरत रोजमर्रा के खाने में हमेशा बनी रहती है. उनके मुताबिक, चाहे दिन में चार बार खाना हो या पांच बार, मसालों की खपत लगातार होती है. साथ ही इस कारोबार की ग्लोबल पहुंच की भी बड़ी संभावनाएं हैं.
लंदन में मिला आइडिया
हर्षवर्धन रघुवंशी ने बताया कि जब वह लंदन में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्हें इंडियन फूड्स का काफी शौक था. वहां एशियन मार्केट में उन्हें कुछ ही प्रमुख भारतीय ब्रांड दिखाई दिए। इसी कमी ने उनके मन में एक नया विजन पैदा किया. उनका सपना था कि एक दिन भारतीय मसालों का ऐसा ब्रांड खड़ा किया जाए जिसकी पहचान विदेशों तक पहुंचे और आने वाली पीढ़ियां यह कह सकें कि उनके शहर के एक युवा ने ऐसा ब्रांड बनाया था. HVR मसाले की सफलता के पीछे हर्षवर्धन क्वालिटी को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं. उनका कहना है कि भारत में हर कुछ किलोमीटर पर लोगों का स्वाद बदल जाता है. कहीं लोग तीखा पसंद करते हैं तो कहीं चटपटा स्वाद। ऐसे में मसाला कारोबार में अच्छी सोर्सिंग, बेहतरीन कच्चा माल और फाइन प्रोडक्शन सबसे बड़ी ताकत है.
उनके अनुसार क्वालिटी बनाए रखने के लिए सिर्फ अच्छी फसल खरीदना पर्याप्त नहीं है. उसकी मैन्युफैक्चरिंग, ग्रेडिंग, स्टोरेज और एम्बिएंट टेम्परेचर तक का ध्यान रखना पड़ता है. इसी पूरी प्रक्रिया पर फोकस करते हुए उन्होंने उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने की कोशिश की.
डेढ़ साल में 20 से ज्यादा शहरों तक पहुंच
हर्षवर्धन ने बताया कि करीब डेढ़ साल के सफर में HVR मसाले 20 से ज्यादा शहरों में पहुंच चुका है. कंपनी के साथ 150 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा हरियाणा में इसकी पहुंच है. उनका कहना है कि विस्तार का काम लगातार जारी है और कंपनी आने वाले समय में अपने नेटवर्क को और बड़ा करने पर काम कर रही है. हर्षवर्धन के अनुसार मसाला कारोबार में सबसे बड़ी चुनौती लोगों की जुबान पर अपने ब्रांड का स्वाद बैठाना और भरोसा कायम करना है. बाजार में पहले से बड़े और स्थापित खिलाड़ी मौजूद हैं. ऐसे में नए ब्रांड के लिए उपभोक्ताओं को अपने उत्पाद की ओर आकर्षित करना आसान नहीं होता.
उन्होंने बताया कि इस सफर में उन्हें कई तरह के सुझाव और आलोचनाएं भी मिलीं. किसी ने पाउच छोटा बताया तो किसी ने बड़ा, किसी ने पैकेट के रंग को लेकर सुझाव दिया. लेकिन उन्होंने इन सभी बातों को सीख के तौर पर लिया और लगातार सुधार करते रहे.
सफलता के लिए धैर्य जरूरी
हर्षवर्धन युवा उद्यमियों को एक ही संदेश देते हैं पेशेंस यानी धैर्य. उनके मुताबिक बिजनेस में तुरंत परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. लगातार मेहनत, लोगों की प्रतिक्रिया सुनना, कमियों को सुधारना और अपने उत्पाद पर भरोसा बनाए रखना ही सफलता की राह है. लंदन में पढ़ाई के दौरान जन्मा एक विचार आज जौनपुर की जमीन पर HVR मसाले के रूप में आकार ले चुका है. हर्षवर्धन रघुवंशी की यह कहानी दिखाती है कि सही विजन, बेहतर क्वालिटी और धैर्य के साथ स्थानीय स्तर से शुरू किया गया कारोबार भी बड़े बाजार तक अपनी पहचान बना सकता है.